“यूपी की सियासत में फिर गूंज रही है ठाकुर शक्ति की चर्चा… 2027 से पहले आखिर क्यों अपनी ताकत दिखा रहा है क्षत्रिय समाज? क्या 7 से 8 फीसदी आबादी वाला यह वर्ग एक बार फिर चुनावी बाजी पलटने की तैयारी में है? क्या ठाकुर राजनीति यूपी में नया अध्याय लिखने जा रही है, या फिर योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में भाजपा के साथ ही अपनी सबसे बड़ी ताकत दिखाएगी? क्योंकि यूपी की राजनीति में एक कहावत लंबे समय से चली आ रही है.
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संख्या भले कम हो, लेकिन असर इतना कि सत्ता का रास्ता तय कर दे!” उत्तर प्रदेश की राजनीति में ठाकुर समाज का प्रभाव हमेशा चर्चा का विषय रहा है। राजा भैया से लेकर बृजभूषण शरण सिंह, बृजेश सिंह, धनंजय सिंह, विनीत सिंह और सूर्य प्रताप शाही जैसे कई बड़े चेहरे आज भी अपने-अपने इलाकों में मजबूत पकड़ रखते हैं। माना जाता है कि प्रदेश की करीब 70 से 80 विधानसभा सीटों पर क्षत्रिय समाज चुनावी नतीजों को प्रभावित करने की क्षमता रखता है। इसी बीच करणी सेना के प्रमुख सूरजपाल सिंह अम्मू के यूपी विधानसभा चुनाव लड़ने के ऐलान ने नई सियासी बहस छेड़ दी है। सवाल उठ रहे हैं कि क्या क्षत्रिय समाज कोई नया राजनीतिक समीकरण बनाने जा रहा है? हालांकि राजनीतिक जानकारों का कहना है कि वर्तमान समय में क्षत्रिय समाज का बड़ा वर्ग मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और भाजपा के साथ मजबूती से खड़ा दिखाई देता है। ऐसे में 2027 के चुनाव से पहले यह देखना दिलचस्प होगा कि क्या ठाकुर राजनीति कोई नया मोड़ लेगी या फिर एक बार फिर योगी के नेतृत्व में अपनी ताकत का प्रदर्शन करेगी। “क्योंकि यूपी में यह माना जाता है कि अगर क्षत्रिय समाज पूरी ताकत से किसी एक दिशा में खड़ा हो जाए, तो कई सीटों का गणित बदल सकता है और सत्ता का रास्ता भी!”






