Home Political news यूपी चुनाव 2027 से पहले सपा में बढ़ी अंदरूनी कलह? रुचि वीरा...

यूपी चुनाव 2027 से पहले सपा में बढ़ी अंदरूनी कलह? रुचि वीरा की नाराजगी ने बढ़ाई अखिलेश यादव की मुश्किलें

48
0

उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 से पहले समाजवादी पार्टी (सपा) के भीतर सबकुछ ठीक नहीं दिख रहा है, पार्टी के भीतर गुटबाजी और नेताओं के बीच बढ़ती दूरियां अब खुलकर सामने आने लगी हैं, ताजा मामला मुरादाबाद से सामने आया है, जहां सपा सांसद रुचि वीरा ने अपनी ही पार्टी के नेताओं पर उन्हें नजरअंदाज करने का आरोप लगाया है।

पीडीए सम्मेलन से दूरी बनी विवाद की वजह

मुरादाबाद में रविवार को आयोजित समाजवादी पार्टी के पीडीए सम्मेलन में कई बड़े नेता शामिल हुए, कार्यक्रम में राज्यसभा सांसद जावेद अली, पूर्व सांसद डॉ. एसटी हसन, पूर्व कैबिनेट मंत्री और विधायक कमाल अख्तर, विधायक नासिर कुरैशी समेत कई वरिष्ठ नेता मंच पर मौजूद रहे हालांकि, मुरादाबाद की सांसद रुचि वीरा को न तो कार्यक्रम में आमंत्रित किया गया और न ही इसकी जानकारी दी गई, इसी बात को लेकर रुचि वीरा ने नाराजगी जाहिर करते हुए कहा कि वह इस पूरे मामले की शिकायत पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव से करेंगी।

“सांसद को ही नहीं बुलाया, जनता का क्या सम्मान करेंगे?”

रुचि वीरा ने कहा कि पार्टी के मौजूदा सांसद को यदि किसी महत्वपूर्ण कार्यक्रम की सूचना तक नहीं दी जा रही है, तो यह गंभीर मामला है, उन्होंने सवाल उठाते हुए कहा कि जो लोग जनप्रतिनिधियों का सम्मान नहीं कर रहे, वे आम जनता का सम्मान कैसे करेंगे? उन्होंने यह भी कहा कि विधानसभा चुनाव नजदीक हैं और ऐसे समय में पार्टी के भीतर इस तरह की राजनीति से संगठन को नुकसान पहुंच सकता है, उनके मुताबिक कुछ लोग जानबूझकर पार्टी की एकजुटता को कमजोर करने का काम कर रहे हैं।

सपा में दो गुटों की चर्चा तेज

राजनीतिक गलियारों में लंबे समय से चर्चा है कि मुरादाबाद में समाजवादी पार्टी के भीतर दो अलग-अलग गुट सक्रिय हैं, एक तरफ सांसद रुचि वीरा का खेमा है, जबकि दूसरी ओर राज्यसभा सांसद जावेद अली और उनके समर्थक नेताओं का प्रभाव माना जाता है, पीडीए सम्मेलन में रुचि वीरा की गैरमौजूदगी ने इन चर्चाओं को और हवा दे दी है।

अखिलेश यादव के पीडीए फॉर्मूले पर पड़ सकता है असर

समाजवादी पार्टी आगामी विधानसभा चुनाव में पीडीए (पिछड़ा, दलित और अल्पसंख्यक) समीकरण को मजबूत करने की रणनीति पर काम कर रही है, लेकिन यदि पार्टी के भीतर ही नेताओं के बीच समन्वय की कमी और गुटबाजी बढ़ती है, तो इसका असर संगठनात्मक मजबूती और चुनावी तैयारियों पर पड़ सकता है, अब देखना होगा कि रुचि वीरा की शिकायत पर पार्टी नेतृत्व क्या रुख अपनाता है और क्या मुरादाबाद में उभरती यह अंदरूनी खींचतान समय रहते सुलझाई जा सकेगी।