आयकर विभाग ने मौलाना मोहम्मद अली जौहर ट्रस्ट की टैक्स छूट समाप्त कर दी है। विभाग ने ट्रस्ट पर फर्जी डोनेशन, वित्तीय अनियमितताओं और नियमों के उल्लंघन के गंभीर आरोप लगाए हैं।
समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता मोहम्मद आजम खान से जुड़े मौलाना मोहम्मद अली जौहर ट्रस्ट को बड़ा झटका लगा है, आयकर विभाग ने ट्रस्ट को मिलने वाली आयकर छूट समाप्त कर दी है। विभाग ने 147 पन्नों के विस्तृत आदेश में ट्रस्ट पर कई गंभीर वित्तीय अनियमितताओं और नियमों के उल्लंघन के आरोप लगाए हैं।
आयकर विभाग का बड़ा फैसला
आयकर विभाग ने 23 जून 2026 को जारी आदेश में जौहर ट्रस्ट की कर छूट रद्द करने का निर्णय लिया, विभाग के अनुसार सितंबर 2023 में हुई आयकर छापेमारी और उसके बाद की जांच में कई ऐसी जानकारियां सामने आईं, जिनसे ट्रस्ट की कार्यप्रणाली और वित्तीय लेनदेन पर सवाल खड़े हुए, आदेश में कहा गया है कि ट्रस्ट की गतिविधियां उसके घोषित उद्देश्यों के अनुरूप नहीं पाई गईं और कई मामलों में आयकर नियमों की अनदेखी की गई।
परिवार के नियंत्रण में था ट्रस्ट: आयकर विभाग
जांच रिपोर्ट के अनुसार ट्रस्ट का संचालन मुख्य रूप से मोहम्मद आजम खान और उनके परिवार के सदस्यों के नियंत्रण में था, विभाग ने दावा किया कि कुछ गैर-पारिवारिक ट्रस्टी केवल नाममात्र के सदस्य थे और उन्हें ट्रस्ट के प्रशासनिक या वित्तीय निर्णयों की पर्याप्त जानकारी नहीं थी, आयकर विभाग का मानना है कि ट्रस्ट के संचालन में पारदर्शिता और स्वतंत्र निगरानी का अभाव था, जो एक सार्वजनिक ट्रस्ट के लिए आवश्यक माना जाता है।
59 भवनों और 494 करोड़ रुपये की परिसंपत्तियों पर सवाल
आदेश में जौहर यूनिवर्सिटी परिसर में मौजूद 59 भवनों का भी उल्लेख किया गया है, विभाग के अनुसार इन परिसंपत्तियों का अनुमानित मूल्य 494 करोड़ रुपये से अधिक है, जांच एजेंसियों ने इन भवनों के निर्माण, फंडिंग और वित्तीय स्रोतों को लेकर सवाल उठाए हैं, विभाग का कहना है कि निर्माण कार्यों में इस्तेमाल धनराशि और उससे जुड़े दस्तावेजों की जांच के दौरान कई विसंगतियां सामने आईं।
दानदाताओं की वैधता पर भी उठे सवाल
आयकर विभाग ने ट्रस्ट को मिले कई दान और चंदों की वैधता पर भी प्रश्नचिह्न लगाया है, जांच में कुछ ऐसे दानदाताओं का उल्लेख किया गया है, जिनके अस्तित्व और वित्तीय क्षमता को लेकर स्पष्ट जानकारी उपलब्ध नहीं हो सकी, विभाग का दावा है कि कुछ दानदाता संस्थाएं और व्यक्ति जांच के दौरान संदिग्ध पाए गए तथा उनके द्वारा दिए गए दान के स्रोतों का पर्याप्त प्रमाण नहीं मिला।
भाजपा विधायक आकाश सक्सेना ने दी प्रतिक्रिया
रामपुर से भाजपा विधायक आकाश सक्सेना ने आयकर विभाग के फैसले का स्वागत किया है, उन्होंने कहा कि वर्ष 2017 में उन्होंने जौहर यूनिवर्सिटी और ट्रस्ट से जुड़े मामलों की शिकायत आयकर विभाग से की थी, आकाश सक्सेना का आरोप है कि ट्रस्ट को मिले कई दान संदिग्ध थे और जांच में अनेक वित्तीय अनियमितताएं सामने आई हैं, उन्होंने दावा किया कि ट्रस्ट की संरचना और वित्तीय संचालन को लेकर लंबे समय से शिकायतें की जा रही थीं।
आगे क्या होगा?
आयकर विभाग के इस फैसले के बाद जौहर ट्रस्ट को मिलने वाले कर लाभ समाप्त हो जाएंगे हालांकि, इस मामले में ट्रस्ट प्रबंधन और संबंधित पक्षों के पास कानूनी विकल्प उपलब्ध हैं और वे आदेश को चुनौती दे सकते हैं, फिलहाल आयकर विभाग की कार्रवाई ने जौहर ट्रस्ट और उससे जुड़े वित्तीय लेनदेन को लेकर नई बहस छेड़ दी है, आने वाले दिनों में इस मामले में कानूनी और प्रशासनिक स्तर पर और भी महत्वपूर्ण घटनाक्रम देखने को मिल सकते हैं।






