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भरत तिवारी एनकाउंटर की जांच रिटायर्ड जज को सौंपी गई, जानिए कौन हैं जस्टिस विनोद कुमार सिन्हा?

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बिहार के चर्चित भरत भूषण तिवारी एनकाउंटर मामले में अब न्यायिक जांच का रास्ता साफ हो गया है। राज्य सरकार ने इस बहुचर्चित प्रकरण की जांच की जिम्मेदारी पटना हाईकोर्ट के सेवानिवृत्त न्यायाधीश जस्टिस विनोद कुमार सिन्हा को सौंपी है। सरकार के इस फैसले के बाद अब पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की उम्मीदें बढ़ गई हैं। जस्टिस सिन्हा की रिपोर्ट यह तय करने में अहम भूमिका निभाएगी कि पुलिस की कार्रवाई कानून के दायरे में थी या फिर एनकाउंटर को लेकर लगाए जा रहे आरोपों में कोई सच्चाई है।

भरत तिवारी एनकाउंटर को लेकर पिछले कुछ दिनों से बिहार की राजनीति और प्रशासनिक हलकों में लगातार बहस जारी है। पुलिस का दावा है कि कार्रवाई आत्मरक्षा में की गई थी, जबकि मृतक के परिजनों और कई सामाजिक संगठनों ने इस पर सवाल उठाए हैं। ऐसे में सरकार ने मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए न्यायिक जांच कराने का फैसला लिया है।

कौन हैं जस्टिस विनोद कुमार सिन्हा?

जस्टिस विनोद कुमार सिन्हा का जन्म 23 अप्रैल 1958 को हुआ था। उन्होंने पटना लॉ कॉलेज से विधि की पढ़ाई पूरी की और वर्ष 1983 में वकालत के क्षेत्र में कदम रखा। अपने शुरुआती करियर में उन्होंने दीवानी, आपराधिक और सेवा मामलों से जुड़े कई महत्वपूर्ण मुकदमों की पैरवी की और कानूनी क्षेत्र में मजबूत पहचान बनाई।

उनके लंबे अनुभव और कानूनी दक्षता को देखते हुए वर्ष 1997 में उन्हें बिहार उच्च न्यायिक सेवा में शामिल किया गया। इसके बाद उन्होंने अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश के रूप में अपनी सेवाएं दीं। न्यायिक सेवा के दौरान उन्होंने कई महत्वपूर्ण प्रशासनिक और न्यायिक जिम्मेदारियां भी संभालीं।

कई महत्वपूर्ण पदों पर रह चुके हैं

जस्टिस विनोद कुमार सिन्हा समस्तीपुर के जिला एवं सत्र न्यायाधीश के पद पर भी कार्य कर चुके हैं। इसके अलावा उन्होंने बिहार सरकार के विधि सलाहकार के रूप में भी अपनी सेवाएं दीं। न्यायिक प्रशासन में उनकी भूमिका को देखते हुए उन्हें पटना हाईकोर्ट का रजिस्ट्रार जनरल भी नियुक्त किया गया था।

दिसंबर 2016 में उन्हें पटना हाईकोर्ट का न्यायाधीश बनाया गया। हाईकोर्ट में अपने कार्यकाल के दौरान उन्होंने कई महत्वपूर्ण मामलों की सुनवाई की और निष्पक्ष फैसलों के लिए पहचान बनाई। अप्रैल 2020 में वह सेवानिवृत्त हुए।

सेवानिवृत्ति के बाद भी मिली बड़ी जिम्मेदारी

सेवानिवृत्ति के बाद भी उनकी साफ-सुथरी छवि और न्यायिक अनुभव को देखते हुए बिहार राज्य मानवाधिकार आयोग का अध्यक्ष नियुक्त किया गया। इस पद पर रहते हुए उन्होंने मानवाधिकार से जुड़े कई मामलों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

जांच रिपोर्ट पर टिकी हैं निगाहें

भरत तिवारी एनकाउंटर मामले में जस्टिस विनोद कुमार सिन्हा की नियुक्ति के बाद अब सभी की नजर उनकी जांच रिपोर्ट पर है। मृतक के परिजन पहले ही सीबीआई जांच और किसी सिटिंग जज से जांच की मांग कर चुके हैं। वहीं पुलिस अपने पक्ष में लगातार सफाई दे रही है।

ऐसे में न्यायिक जांच की रिपोर्ट इस पूरे मामले की दिशा तय कर सकती है। जांच के बाद यह स्पष्ट हो सकेगा कि पुलिस की कार्रवाई परिस्थितियों के अनुरूप थी या फिर मामले में किसी प्रकार की अनियमितता हुई थी। फिलहाल बिहार की जनता, राजनीतिक दल और प्रशासनिक तंत्र सभी इस रिपोर्ट का इंतजार कर रहे हैं, क्योंकि इससे भरत तिवारी एनकाउंटर से जुड़े कई सवालों के जवाब सामने आ सकते हैं।