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SP अविनाश पांडेय ने दलित नेताओं पर बरसाए थप्पड़! मायावती ने दिया समर्थन! रावण और भीम आर्मी में मची खलबली!

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ये सड़क किसी के बाप की नहीं है!…” मेरठ के एसपी अविनाश पांडेय की ये दहाड़ और उसके बाद कानून हाथ में लेने वालों पर बरसे दनादन थप्पड़! यूपी की सियासत में इस वक्त मेरठ का ये ‘थप्पड़ कांड’ ज्वालामुखी बना हुआ है। एक तरफ भीम आर्मी चीफ चंद्रशेखर आजाद रावण की एंट्री से मेरठ छावनी में तब्दील हो चुका है, तो दूसरी तरफ पुलिस कप्तान ने सीधे मैदान में उतरकर वो सच उजागर कर दिया है, जिसने दलित राजनीति के नाम पर दुकान चलाने वालों के होश उड़ा दिए हैं! जब ललिता गौतम का हत्यारा अंकुश और उसके मददगार सलाखों के पीछे जा चुके हैं… तो फिर मेरठ की सड़कों पर ये कोहराम क्यों?

क्या न्याय के नाम पर ये सिर्फ 2027 के चुनाव की गंदी फील्डिंग है? आइए आपको बताते हैं इस पूरे बवाल के पीछे की इनसाइड स्टोरी! दरअसल मेरठ में ललिता गौतम की हत्या के बाद पुलिस ने मुस्तैदी दिखाते हुए ललिता के प्रेमी मुख्य आरोपी अंकुश और उसके साथियों को तुरंत गिरफ्तार कर लिया। लेकिन इसके बावजूद, कुछ तथाकथित नेताओं ने पीड़ित परिवार को बरगलाया, उन्हें आगे कर मोटी रकम और सरकारी नौकरी की मांग के नाम पर भीड़ को उकसाया और मेरठ की सड़कों को बंधक बना लिया। माहौल बिगड़ता देख मेरठ के एसपी अविनाश पांडेय खुद मैदान में उतरे। उन्होंने न सिर्फ भीड़ को खदेड़ा, बल्कि बाकायदा वीडियो जारी कर इस पूरे बवाल के पीछे का क्रिमिनल सिंडिकेट बेनकाब कर दिया है। पुलिस के मुताबिक, जिन चेहरों को आगे कर राजनीति चमकाई जा रही थी, उनका बैकग्राउंड दंगाइयों वाला है,दिग्विजय सिंह भाटी भारतीय किसान यूनियन (अंबेडकर) का राष्ट्रीय अध्यक्ष, जिस पर 9 आपराधिक मुकदमे दर्ज हैं और जो पहले से ‘जिला बदर’ है। रवि गौतम:* वही चेहरा जिस पर थप्पड़ बरसे थे, उस पर पहले से ही 4 गंभीर आपराधिक मुकदमे दर्ज हैं। अब इस पूरे मामले में भीम आर्मी चीफ और सांसद चंद्रशेखर आजाद रावण की एंट्री हो गई है।

चंद्रशेखर का साफ कहना है कि दलित संगठनों के कार्यकर्ताओं पर हुए इस एक्शन का जमकर विरोध किया जाएगा। उधर, मेरठ पुलिस ने भी साफ कर दिया है कि गांव के बाहर बैरिकेडिंग है, सुरक्षा सख्त है और किसी भी हाल में अराजकता बर्दाश्त नहीं की जाएगी। राजनीतिक गलियारों में चर्चा तेज है कि यह बवाल न्याय के लिए नहीं, बल्कि 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले दलित वोट बैंक को साधने और अपनी राजनीति चमकाने का एक सोचा-समझा पैंतरा है।वजह साफ है ललिता गौतम के हत्यारे की गिरफ़्तारी पहले ही पुलिस कर चुकी है ,, जितने अपराधी थे पकड़े जा चुके हैं, फिर भी सड़क जाम है। अब देखना यह होगा कि चंद्रशेखर के मेरठ पहुंचने के बाद पुलिस प्रशासन इस चुनौती से कैसे निपटता है। क्या आपको भी लगता है कि न्याय के नाम पर मेरठ में जानबूझकर माहौल बिगाड़ने की कोशिश की जा रही है?

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