पंकज चौधरी की नयी टीम में योगी आदित्यनाथ और गोरखपुर का दब दबा साफ तौर पर दिखाई दे रहा ,,योगी के बेहद करीबी नेताओ को पंकज चौधरी की टीम में दिल्ली ने शामिल कर दिया है ,,,कहा जा रहा है अब योगी बीजेपी में और भी ताकतवर नेता बन गए है ,,, नई कार्यकारिणी में गोरखपुर का दबदबा देखकर राजनीतिक गलियारों में चर्चाएं तेज हो गई हैं। खास बात यह है कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के तीन बेहद करीबी नेताओं को प्रदेश उपाध्यक्ष जैसी अहम जिम्मेदारी सौंपी गई है, जबकि दो अन्य नेताओं को प्रदेश मंत्री बनाया गया है। इतना ही नहीं, गोरखपुर क्षेत्र की कमान भी ऐसे चेहरे को दी गई है जिसे संगठन और योगी दोनों का भरोसेमंद माना जाता है।
ऐसे में सवाल उठ रहे हैं कि क्या बीजेपी ने 2027 की तैयारी में योगी के संगठनात्मक विजन पर मुहर लगा दी है? क्योंकि पंकज चौधरी की नई टीम में गोरखपुर सिर्फ मजबूत नहीं दिख रहा, बल्कि पूरे प्रदेश संगठन का सबसे प्रभावशाली केंद्र बनकर उभरा है।गोरखपुर क्षेत्र से डॉ. धर्मेंद्र सिंह, कामेश्वर सिंह और रमेश सिंह को प्रदेश उपाध्यक्ष की जिम्मेदारी सौंपी गई है। वहीं सहजानंद राय और रजनी पांडेय को प्रदेश मंत्री बनाया गया है। इसके अलावा गोरखपुर क्षेत्र के नए क्षेत्रीय अध्यक्ष के रूप में विनोद राय को जिम्मेदारी दी गई है।डॉ. धर्मेंद्र सिंह को दोबारा प्रदेश उपाध्यक्ष बनाया गया है। वे पहले क्षेत्रीय अध्यक्ष और गोरखपुर महानगर अध्यक्ष की जिम्मेदारी भी संभाल चुके हैं।
वहीं अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद की पृष्ठभूमि से आने वाले कामेश्वर सिंह वर्तमान में किसान मोर्चा के प्रदेश अध्यक्ष हैं और संगठन में उनकी मजबूत पकड़ मानी जाती है। रमेश सिंह भी लंबे समय से भाजपा संगठन में सक्रिय हैं और पंचायत प्रकोष्ठ के प्रदेश संयोजक की भूमिका निभा रहे थे।राजनीतिक जानकारों का मानना है कि इन तीनों नेताओं को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का बेहद करीबी माना जाता है, ऐसे में नई टीम में उनकी मजबूत मौजूदगी इस बात का संकेत है कि संगठन में योगी आदित्यनाथ की राय और प्रभाव को पूरी अहमियत दी गई है।वहीं गोरखपुर क्षेत्र की जिम्मेदारी विनोद राय को सौंपकर बीजेपी ने पूर्वांचल में संगठन को और मजबूत करने का संदेश दिया है।
कुल मिलाकर पंकज चौधरी की नई टीम में गोरखपुर का बढ़ता कद यह दिखाता है कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का राजनीतिक और संगठनात्मक प्रभाव लगातार मजबूत हो रहा है। यही वजह है कि अब बीजेपी के भीतर और बाहर दोनों जगह यह चर्चा तेज है कि गोरखपुर सिर्फ मुख्यमंत्री का शहर नहीं, बल्कि बीजेपी संगठन का सबसे बड़ा पावर सेंटर बन चुका है।






