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कानपुर में बनेगा 1000 करोड़ का सुपर पीडियाट्रिक्स ब्लॉक, बच्चों को मिलेगा विश्वस्तरीय इलाज

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कानपुर और आसपास के जिलों के लाखों परिवारों के लिए बड़ी राहत की खबर सामने आई है। अब गंभीर बीमारियों से जूझ रहे बच्चों के इलाज के लिए दिल्ली, मुंबई या अन्य महानगरों का रुख करने की मजबूरी काफी हद तक समाप्त हो सकती है। जीएसवीएम मेडिकल कॉलेज से संबद्ध सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल में बच्चों के लिए अत्याधुनिक सुविधाओं से लैस सुपर पीडियाट्रिक्स ब्लॉक बनाने की तैयारी शुरू हो गई है। इस महत्वाकांक्षी परियोजना पर 1000 करोड़ रुपये से अधिक की लागत आने का अनुमान है। शासन स्तर से परियोजना को हरी झंडी मिल चुकी है और औपचारिक स्वीकृति मिलते ही निर्माण कार्य शुरू कर दिया जाएगा।

वर्तमान में कानपुर मंडल और आसपास के जिलों से बड़ी संख्या में ऐसे बच्चे सामने आते हैं जिन्हें हृदय रोग, कैंसर, किडनी की गंभीर समस्याओं या अन्य जटिल बीमारियों के उपचार के लिए बड़े शहरों में रेफर करना पड़ता है। इससे न केवल इलाज में देरी होती है बल्कि परिवारों पर आर्थिक और मानसिक बोझ भी बढ़ जाता है। नए सुपर पीडियाट्रिक्स ब्लॉक के निर्माण के बाद बच्चों को आधुनिक चिकित्सा सुविधाएं, विशेषज्ञ चिकित्सकों की सेवाएं और उन्नत तकनीक से लैस उपचार एक ही स्थान पर उपलब्ध हो सकेगा।

सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल के प्रभारी डॉ. मनीष सिंह के अनुसार, प्रस्तावित ब्लॉक में बच्चों की गंभीर और जटिल बीमारियों के उपचार के लिए कई सुपर स्पेशियलिटी विभाग स्थापित किए जाएंगे। यहां बाल हृदय रोग, बाल कैंसर, गैस्ट्रोएंटेरोलॉजी, नेफ्रोलॉजी और अन्य महत्वपूर्ण विभागों की सुविधाएं उपलब्ध रहेंगी। इसके अलावा अत्याधुनिक मेडिकल उपकरणों और आधुनिक तकनीक की मदद से बच्चों का इलाज तेज, सटीक और प्रभावी ढंग से किया जाएगा।

उन्होंने बताया कि यह परियोजना केवल कानपुर तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि पूरे क्षेत्र के लिए एक महत्वपूर्ण स्वास्थ्य केंद्र के रूप में विकसित होगी। गंभीर बीमारियों से पीड़ित बच्चों को समय पर उपचार मिलने से मृत्यु दर में कमी आने और बेहतर स्वास्थ्य परिणाम मिलने की संभावना बढ़ेगी।

इस सुपर पीडियाट्रिक्स ब्लॉक का लाभ कानपुर के अलावा उन्नाव, फतेहपुर, कानपुर देहात, कन्नौज, औरैया, इटावा, जालौन, हमीरपुर समेत 15 से अधिक जिलों के मरीजों को मिलेगा। खास तौर पर गरीब और मध्यम वर्गीय परिवारों को कम खर्च में उच्च स्तरीय चिकित्सा सेवाएं उपलब्ध हो सकेंगी। इससे निजी अस्पतालों पर निर्भरता भी कम होगी और मरीजों को बेहतर सुविधाएं सरकारी स्तर पर मिल सकेंगी।

जीएसवीएम मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य डॉ. संजय काला ने बताया कि परियोजना के लिए शासन को विस्तृत प्रस्ताव भेजा जा चुका है और इसे मौखिक स्वीकृति भी प्राप्त हो चुकी है। औपचारिक आदेश जारी होते ही निर्माण कार्य शुरू कर दिया जाएगा। लक्ष्य है कि अगले एक से दो वर्षों के भीतर इस अत्याधुनिक चिकित्सा केंद्र का संचालन शुरू कर दिया जाए।

स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि यह परियोजना कानपुर और आसपास के क्षेत्रों के स्वास्थ्य ढांचे को नई दिशा देने वाली साबित होगी। बच्चों को विश्वस्तरीय इलाज अपने शहर और प्रदेश में उपलब्ध होगा, जिससे हजारों परिवारों को समय, धन और अनावश्यक भागदौड़ से राहत मिलेगी। यह पहल उत्तर प्रदेश में बाल स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम मानी जा रही है।