Home Political news UP कांग्रेस में बड़ा बदलाव,दलित चेहरे राजेंद्र पाल गौतम को मिली कमान,...

UP कांग्रेस में बड़ा बदलाव,दलित चेहरे राजेंद्र पाल गौतम को मिली कमान, 2027 चुनाव से पहले नए सामाजिक समीकरण पर दांव

48
0

लखनऊ। उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 से पहले कांग्रेस ने अपनी संगठनात्मक और सामाजिक रणनीति को नई दिशा देते हुए बड़ा बदलाव किया है। पार्टी ने वरिष्ठ दलित नेता राजेंद्र पाल गौतम को उत्तर प्रदेश का नया प्रभारी नियुक्त किया है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह बदलाव केवल संगठनात्मक फेरबदल नहीं, बल्कि दलित, पिछड़ा और सामाजिक न्याय की राजनीति को केंद्र में रखकर 2027 के चुनावी अभियान की शुरुआत है।इसी रणनीति के तहत लखनऊ स्थित कांग्रेस प्रदेश मुख्यालय में पिछले कुछ दिनों से लगातार समीक्षा बैठकों का दौर जारी है, जहां जिला अध्यक्षों, संगठन प्रभारियों और वरिष्ठ नेताओं के साथ चुनावी तैयारियों पर मंथन किया जा रहा है।

राजेंद्र पाल गौतम को यूपी की जिम्मेदारी, कांग्रेस ने दिया बड़ा संदेश

26 जून को कांग्रेस नेतृत्व ने उत्तर प्रदेश प्रभारी के रूप में राजेंद्र पाल गौतम की नियुक्ति की। गौतम वर्तमान में कांग्रेस के अनुसूचित जाति (SC) विभाग के राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं और दलित राजनीति में एक प्रमुख चेहरा माने जाते हैं।उनकी नियुक्ति ऐसे समय हुई जब एक दिन पहले ही उन्होंने लखनऊ में छत्रपति शाहूजी महाराज जयंती को “आरक्षण दिवस” के रूप में मनाने के कार्यक्रम में हिस्सा लिया था। कांग्रेस के भीतर इसे सामाजिक न्याय की राजनीति को मजबूत करने की रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है।

लोकसभा चुनाव 2024 के प्रदर्शन से बढ़ा कांग्रेस का आत्मविश्वास

कांग्रेस का मानना है कि 2024 लोकसभा चुनाव में समाजवादी पार्टी के साथ गठबंधन के बाद उसे उत्तर प्रदेश में नई राजनीतिक ऊर्जा मिली।

2022 विधानसभा चुनाव

  • 399 सीटों पर चुनाव लड़ा
  • केवल 2 सीटों पर जीत
  • लगभग 2.3% वोट शेयर

2024 लोकसभा चुनाव

  • 17 सीटों पर चुनाव लड़ा
  • 6 सीटों पर जीत
  • लगभग 9.5% वोट शेयर

पार्टी का आकलन है कि संविधान, आरक्षण और सामाजिक न्याय जैसे मुद्दों पर जनता का समर्थन भविष्य की राजनीति की नई दिशा तय कर सकता है।

दलित वोट बैंक पर कांग्रेस की नई रणनीति

उत्तर प्रदेश में अनुसूचित जाति (SC) की आबादी लगभग 21 प्रतिशत मानी जाती है। इनमें जाटव के अलावा पासी, वाल्मीकि, कोरी, धोबी, खटीक और अन्य गैर-जाटव समुदाय बड़ी संख्या में मौजूद हैं।बीते वर्षों में भारतीय जनता पार्टी ने गैर-जाटव दलित समाज में अपनी मजबूत पकड़ बनाई है, जबकि बहुजन समाज पार्टी (BSP) का जनाधार लगातार कमजोर हुआ हैकांग्रेस का मानना है कि बसपा के कमजोर पड़ने से दलित राजनीति में जो राजनीतिक स्पेस बना है, उसे सामाजिक न्याय की राजनीति के जरिए भरा जा सकता है।

राहुल गांधी की सामाजिक न्याय की राजनीति को मिलेगा संगठनात्मक आधार

कांग्रेस नेतृत्व अब राहुल गांधी की “संविधान बचाओ” और “आबादी के अनुपात में अधिकार” की राजनीतिक लाइन को संगठन में भी लागू करने की तैयारी कर रहा है।राजनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि दलित नेतृत्व को आगे लाकर कांग्रेस यह संदेश देना चाहती है कि सामाजिक न्याय केवल चुनावी मुद्दा नहीं बल्कि संगठन की प्राथमिकता भी है।

क्या अगला प्रदेश अध्यक्ष होगा OBC चेहरा?

राजनीतिक हलकों में चर्चा है कि कांग्रेस का अगला बड़ा कदम किसी प्रभावशाली OBC नेता को उत्तर प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष बनाना हो सकता है।यदि ऐसा होता है तो पार्टी दलित और पिछड़ा वर्ग दोनों को नेतृत्व में समान भागीदारी देने का संदेश देने की कोशिश करेगी।

INDIA गठबंधन में भी मजबूत होगी कांग्रेस की दावेदारी

कांग्रेस की रणनीति केवल भाजपा से मुकाबले तक सीमित नहीं है। पार्टी का मानना है कि यदि उत्तर प्रदेश में संगठन मजबूत होता है तो INDIA गठबंधन के भीतर विधानसभा चुनाव में सीट बंटवारे के दौरान उसकी स्थिति भी मजबूत होगी।एक वरिष्ठ नेता के अनुसार मजबूत संगठन ही राजनीतिक सम्मान और अधिक सीटों की दावेदारी का आधार बनेगा।

दलित-मुस्लिम समीकरण पर भी कांग्रेस की नजर

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि कांग्रेस अपने पुराने दलित-मुस्लिम-ब्राह्मण सामाजिक गठबंधन को नए स्वरूप में पुनर्जीवित करने की कोशिश कर रही है।

पार्टी के सक्रिय नेताओं में—

  • राजेंद्र पाल गौतम
  • तनुज पुनिया
  • इमरान मसूद
  • इमरान प्रतापगढ़ी

जैसे चेहरे अलग-अलग सामाजिक वर्गों तक पहुंच बनाने में जुटे हैं।

जमीनी संगठन अभी भी कांग्रेस की सबसे बड़ी चुनौती

हालांकि राजनीतिक विशेषज्ञों का कहना है कि केवल नेतृत्व परिवर्तन से चुनावी सफलता नहीं मिलेगी।

कांग्रेस के सामने प्रमुख चुनौतियां हैं—

  • बूथ स्तर पर संगठन मजबूत करना
  • निष्क्रिय जिला इकाइयों को सक्रिय करना
  • पंचायत स्तर तक कार्यकर्ता तैयार करना
  • पूर्वांचल और बुंदेलखंड में संगठन का विस्तार
  • पश्चिमी उत्तर प्रदेश में मजबूत नेटवर्क खड़ा करना

विशेषज्ञों का मानना है कि यदि अगले कुछ महीनों में संगठनात्मक ढांचा मजबूत नहीं हुआ तो यह बदलाव केवल प्रतीकात्मक बनकर रह सकता है।

बसपा के लिए सम्मान की राजनीति, गठबंधन के विकल्प खुले

हाल के दिनों में राजेंद्र पाल गौतम ने मायावती के प्रति सम्मान व्यक्त करते हुए कहा कि वे दलित समाज की बड़ी नेता हैं और अवसर मिलने पर उनसे मुलाकात करेंगे।राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि कांग्रेस फिलहाल बसपा के साथ औपचारिक गठबंधन की बात नहीं कर रही, लेकिन भविष्य के सभी राजनीतिक विकल्प खुले रखना चाहती है।

2027 से पहले कांग्रेस की असली परीक्षा

सितंबर 2022 में कांग्रेस में शामिल होने से लेकर जून 2026 में उत्तर प्रदेश प्रभारी बनने तक राजेंद्र पाल गौतम का राजनीतिक सफर तेज रहा है। अब उनके सामने सबसे बड़ी चुनौती संगठन को मजबूत करना, निष्क्रिय इकाइयों को सक्रिय करना, टिकट वितरण की रणनीति तैयार करना और कार्यकर्ताओं में यह विश्वास पैदा करना है कि कांग्रेस उत्तर प्रदेश में 2027 का चुनाव पूरी ताकत के साथ लड़ने के लिए तैयार है।