बिहार में चुनावी माहौल के बीच मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक ने विकास परियोजनाओं की झड़ी लगा दी है। एक ही बैठक में 22 बड़े एजेंडों को मंजूरी देकर सरकार ने स्वास्थ्य, सड़क, शिक्षा, रोजगार और शहरी विकास के मोर्चे पर कई अहम घोषणाएं कर दी हैं।सबसे बड़ा फैसला AIIMS पटना के विस्तार को लेकर हुआ है। सरकार ने 348 करोड़ रुपये से ज्यादा की राशि मंजूर की है। दानापुर के भुसौला में नई जमीन अधिग्रहित की जाएगी, जिससे AIIMS का विस्तार होगा और मरीजों को एक ही परिसर में बेहतर चिकित्सा सुविधाएं मिल सकेंगी।वहीं भागलपुर के लोगों के लिए भी राहत की खबर है। गंगा नदी पर बने विक्रमशिला सेतु की मरम्मत और वैकल्पिक बेली ब्रिज निर्माण के लिए 126 करोड़ रुपये से ज्यादा की मंजूरी दी गई है। इससे आने वाले समय में यातायात व्यवस्था मजबूत होगी।युवाओं के लिए भी सरकार ने बड़ा ऐलान किया है।
मुख्यमंत्री निश्चय स्वयं सहायता भत्ता योजना को अगले 5 साल तक जारी रखा जाएगा। इसके लिए 300 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे, जिससे बेरोजगार युवाओं को आर्थिक सहायता मिलती रहेगी।मुजफ्फरपुर की मोतीपुर चीनी मिल की 266 एकड़ जमीन वापस लेने का फैसला भी कैबिनेट ने कर लिया है। सरकार का दावा है कि यहां नई चीनी मिल, गन्ना अनुसंधान संस्थान और अन्य उद्योग स्थापित किए जाएंगे, जिससे रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे।इसके अलावा बिहार में आधुनिक परिवहन व्यवस्था को बढ़ावा देने के लिए 4 रैपिड ट्रांजिट कॉरिडोर की तैयारी शुरू कर दी गई है। DPR और एलाइनमेंट रिपोर्ट तैयार करने के लिए 31 करोड़ रुपये से अधिक की मंजूरी दी गई है।शिक्षा क्षेत्र में भी बड़ा फैसला लेते हुए 10 पॉलिटेक्निक संस्थानों में एमटेक पाठ्यक्रम के संचालन के लिए 76 नए प्राध्यापकों के पद सृजित किए गए हैं।
कुल मिलाकर बिहार कैबिनेट के ये फैसले साफ संकेत दे रहे हैं कि सरकार स्वास्थ्य, शिक्षा, उद्योग और इंफ्रास्ट्रक्चर के जरिए विकास की नई तस्वीर पेश करने की कोशिश में जुटी हुई है। अब देखना होगा कि ये घोषणाएं जमीन पर कितनी तेजी से उतरती हैं।






