लखनऊ, 10 जुलाई। उत्तर प्रदेश की योगी सरकार ने गन्ना किसानों के हितों की सुरक्षा के लिए बड़ा फैसला लिया है। अब प्रदेश की सभी चीनी मिलें किसानों को केवल गुणवत्ता परीक्षण से गुजरे प्रमाणित उर्वरक, जैव उर्वरक, सूक्ष्म पोषक तत्व और कीटनाशक ही उपलब्ध करा सकेंगी। गन्ना आयुक्त मिनिस्ती एस ने इस संबंध में सभी चीनी मिलों के लिए विस्तृत दिशा-निर्देश जारी किए हैं। नई व्यवस्था के तहत प्रत्येक बैच की जांच एनएबीएल मान्यता प्राप्त प्रयोगशालाओं में कराना अनिवार्य होगा और केवल निर्धारित गुणवत्ता मानकों पर खरे उतरने वाले कृषि निवेश ही किसानों तक पहुंचाए जाएंगे। प्रतिबंधित कीटनाशकों के वितरण पर पूरी तरह रोक रहेगी।
नई गाइडलाइन के अनुसार किसी भी किसान को उसकी मांग और स्पष्ट सहमति के बिना कोई कृषि निवेश उपलब्ध नहीं कराया जाएगा। कृषि सामग्री का वितरण केवल किसान की वास्तविक आवश्यकता और गन्ना क्षेत्रफल के अनुसार होगा। सरकार ने कृषि निवेश की गुणवत्ता और वितरण की पूरी जिम्मेदारी संबंधित चीनी मिलों पर तय की है। चाहे वितरण मिल स्वयं करे या किसी एजेंसी के माध्यम से, किसी भी तरह की गड़बड़ी के लिए चीनी मिल ही जिम्मेदार होगी। जिला गन्ना अधिकारी और उप गन्ना आयुक्त नियमित रूप से इसकी निगरानी और निरीक्षण करेंगे।
सरकार ने स्पष्ट किया है कि यदि कोई चीनी मिल किसानों की सहमति के बिना या घटिया उर्वरक एवं कीटनाशक वितरित करती पाई गई तो उसके खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाएगी। ऐसे मामलों में गन्ना मूल्य से कृषि निवेश की धनराशि की वसूली या समायोजन की व्यवस्था समाप्त कर दी जाएगी और जरूरत पड़ने पर संबंधित चीनी मिल की बैंक गारंटी भी जब्त की जा सकेगी। सरकार का मानना है कि इस नई व्यवस्था से गन्ना खेती अधिक वैज्ञानिक और पारदर्शी बनेगी, किसानों को गुणवत्तापूर्ण कृषि सामग्री मिलेगी, खेती की लागत नियंत्रित होगी और गन्ने की उत्पादकता के साथ किसानों की आय में भी वृद्धि होगी।






