पटना: बिहार में छात्रों के आंदोलन को लेकर राजनीतिक बयानबाजी लगातार तेज होती जा रही है। NEET पेपर लीक और परीक्षा प्रणाली में कथित अनियमितताओं के विरोध में शुरू हुए छात्र आंदोलन ने अब राजनीतिक रूप ले लिया है। लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने छात्रों पर हुई पुलिस कार्रवाई को लेकर केंद्र और बिहार सरकार पर निशाना साधते हुए सरकार से जवाब मांगा है। वहीं, इस पूरे घटनाक्रम को लेकर सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच आरोप-प्रत्यारोप का दौर जारी है।
राहुल गांधी ने X पर उठाए सवाल
राहुल गांधी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर पोस्ट करते हुए आरोप लगाया कि बिहार में प्रदर्शन कर रहे छात्रों की आवाज दबाने के लिए सरकारी मशीनरी का इस्तेमाल किया गया। उन्होंने दावा किया कि बड़ी संख्या में छात्रों को हिरासत में लिया गया और उनके खिलाफ मुकदमे दर्ज किए गए।
राहुल गांधी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से सवाल करते हुए पूछा कि छात्रों पर कार्रवाई रोकने और गिरफ्तार युवाओं को रिहा करने के वादे का क्या हुआ। उन्होंने कहा कि लोकतांत्रिक तरीके से अपनी मांग रखने वाले छात्रों के साथ संवेदनशील व्यवहार किया जाना चाहिए।
AK-47 वाले दावे की नहीं हुई पुष्टि
राहुल गांधी की पोस्ट में छात्रों पर AK-47 से गोली चलाने का भी उल्लेख किया गया है। हालांकि, इस दावे की अब तक किसी आधिकारिक एजेंसी या प्रशासन की ओर से पुष्टि नहीं हुई है।
पुलिस की ओर से जारी जानकारी के अनुसार, प्रदर्शन के दौरान कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए लाठीचार्ज, वाटर कैनन और अन्य भीड़ नियंत्रण उपायों का इस्तेमाल किया गया। अधिकारियों का कहना है कि कुछ स्थानों पर प्रदर्शन हिंसक होने के बाद स्थिति को नियंत्रित करने के लिए कार्रवाई की गई।
सीवान की घटना भी चर्चा में
इस पूरे विवाद के बीच सीवान में एक पुलिसकर्मी के निलंबन की घटना ने भी मामले को और चर्चा में ला दिया है। विपक्ष इस कार्रवाई को पुलिस की भूमिका पर सवाल उठाने का आधार बना रहा है, जबकि प्रशासन का कहना है कि प्रत्येक मामले की जांच तथ्यों के आधार पर की जा रही है।
छात्र आंदोलन को मिल रहा राजनीतिक समर्थन
NEET परीक्षा में कथित पेपर लीक और परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता की मांग को लेकर शुरू हुआ आंदोलन अब कई राजनीतिक दलों और छात्र संगठनों का समर्थन हासिल करता दिखाई दे रहा है। विपक्षी दल लगातार सरकार से परीक्षा प्रणाली में सुधार, निष्पक्ष जांच और छात्रों के खिलाफ दर्ज मामलों पर पुनर्विचार की मांग कर रहे हैं।
दूसरी ओर, सरकार का कहना है कि परीक्षा प्रणाली को अधिक सुरक्षित और पारदर्शी बनाने के लिए आवश्यक कदम उठाए जा रहे हैं तथा कानून-व्यवस्था बनाए रखना प्रशासन की जिम्मेदारी है।
अगस्त में फिर बड़े प्रदर्शन की तैयारी
सूत्रों के अनुसार, छात्र हितों से जुड़े संगठन CJP अगस्त के दूसरे पखवाड़े में बिहार में फिर बड़े स्तर पर प्रदर्शन की तैयारी कर रहे हैं। यदि विभिन्न छात्र संगठनों और विपक्षी दलों का समर्थन बढ़ता है, तो यह आंदोलन केवल परीक्षा सुधार तक सीमित न रहकर आगामी राजनीतिक विमर्श का भी महत्वपूर्ण मुद्दा बन सकता है।
फिलहाल बिहार का छात्र आंदोलन शिक्षा व्यवस्था, परीक्षा प्रणाली और युवाओं के भविष्य से जुड़े सवालों के साथ-साथ राजनीतिक बहस का भी केंद्र बन गया है। आने वाले दिनों में सरकार, विपक्ष और छात्र संगठनों के अगले कदम पर सभी की निगाहें टिकी रहेंगी।






