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यूपी में अवैध खनन पर योगी सरकार का डिजिटल प्रहार, 24 घंटे निगरानी से कसा शिकंजा

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उत्तर प्रदेश में अवैध खनन और खनिजों के अवैध परिवहन पर योगी सरकार ने तकनीक के जरिए शिकंजा कस दिया है। प्रदेश में लागू एकीकृत खनन निगरानी तंत्र (IMSS) के जरिए खनन क्षेत्रों और खनिज परिवहन की 24 घंटे निगरानी की जा रही है। डिजिटल मॉनिटरिंग की इस व्यवस्था से न सिर्फ अवैध गतिविधियों पर प्रभावी कार्रवाई हो रही है, बल्कि सरकार के खनन राजस्व में भी इजाफा हुआ है।

उत्तर प्रदेश भूतत्व एवं खनिकर्म विभाग की सचिव एवं निदेशक माला श्रीवास्तव के मुताबिक, IMSS के तहत खनन क्षेत्रों की जियो-फेंसिंग के साथ कैमरा युक्त वे-ब्रिज, खनिज परिवहन वाले वाहनों पर RFID माइन टैग और प्रमुख मार्गों पर IoT व आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस आधारित स्वचालित चेकगेट लगाए गए हैं। इन सभी व्यवस्थाओं को लखनऊ स्थित कमांड सेंटर से जोड़ा गया है, जहां से प्रदेशभर की खनन गतिविधियों पर नजर रखी जा रही है।

लखनऊ स्थित कमांड सेंटर में स्थापित डिसीजन सपोर्ट सिस्टम के जरिए जनपदों से चिन्हित की जाने वाली अवैध गतिविधियों की निगरानी की जाती है। नियमों का उल्लंघन सामने आने पर संबंधित मामलों में तत्काल ई-नोटिस जारी किए जाते हैं। इससे कार्रवाई की प्रक्रिया पहले की तुलना में तेज और पारदर्शी हुई है।

प्रदेश में फिलहाल 62 चेकगेट संचालित किए जा रहे हैं, जबकि दो नए चेकगेट निर्माणाधीन हैं। निगरानी व्यवस्था को मजबूत करने के लिए 75 RFID रीडर और एम-चेक एप का इस्तेमाल किया जा रहा है। अब तक 1.53 लाख से अधिक वाहनों पर RFID माइन टैग लगाए जा चुके हैं। इसके जरिए खनिजों के परिवहन की ऑनलाइन ट्रैकिंग और वाहनों की आवाजाही की निगरानी संभव हो रही है।

उत्तर प्रदेश खनन नीति-2017 के तहत लागू एकीकृत खनन निगरानी तंत्र के जरिए अवैध खनन और परिवहन के खिलाफ लगातार कार्रवाई की जा रही है। 16 जुलाई 2026 तक IMSS के माध्यम से 2.41 लाख से अधिक ई-नोटिस जारी किए जा चुके हैं। इन मामलों में 998 करोड़ रुपये से अधिक की धनराशि निर्धारित की गई, जिसमें से अब तक 756 करोड़ रुपये से अधिक की वसूली की जा चुकी है।

सरकार का दावा है कि तकनीक आधारित निगरानी व्यवस्था ने अवैध खनन और खनिजों के अवैध परिवहन पर प्रभावी नियंत्रण स्थापित करने में मदद की है। जियो-फेंसिंग, RFID, AI आधारित चेकगेट और कमांड सेंटर के जरिए खनन गतिविधियों की निगरानी होने से मानवीय हस्तक्षेप कम हुआ है और कार्रवाई की प्रक्रिया अधिक पारदर्शी बनी है। सरकार के मुताबिक, डिजिटल सिस्टम के जरिए अवैध गतिविधियों पर कार्रवाई के साथ-साथ सरकारी राजस्व की सुरक्षा भी सुनिश्चित हो रही है। IMSS से हुई 756 करोड़ रुपये से अधिक की वसूली को इसी तकनीक आधारित निगरानी व्यवस्था की बड़ी उपलब्धि के तौर पर देखा जा रहा है।

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