लखनऊ, 7 अगस्त। राष्ट्रीय हथकरघा दिवस के अवसर पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने शुक्रवार को लखनऊ स्थित लोकभवन में आयोजित समारोह में प्रदेश के बुनकरों और हस्तशिल्पियों के उत्थान के लिए सरकार की प्रतिबद्धता दोहराई। उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश में हथकरघा और पावरलूम क्षेत्र करीब 30 लाख लोगों की आजीविका का आधार बना हुआ है। सरकार लगातार बुनकरों और कारीगरों को तकनीक, डिजाइन, बिजली, प्रशिक्षण और बाजार से जोड़ने की दिशा में काम कर रही है।
मुख्यमंत्री ने संत कबीर राज्यस्तरीय हथकरघा पुरस्कार वितरण समारोह में उत्कृष्ट कार्य करने वाले बुनकरों को सम्मानित किया। साथ ही विभिन्न योजनाओं के लाभार्थियों को चेक वितरित किए और कार्यक्रम स्थल पर लगी हथकरघा एवं हस्तशिल्प प्रदर्शनी का अवलोकन किया। इस दौरान हथकरघा उत्पादों के प्रमुख खरीदारों के साथ समझौता ज्ञापनों का आदान-प्रदान भी हुआ।
सीएम योगी ने कहा कि प्रदेश में करीब ढाई लाख परिवार सीधे हथकरघा व्यवसाय से जुड़े हैं, जिससे लगभग 14 से 15 लाख लोगों की आजीविका चलती है। पावरलूम को इसमें जोड़ने पर यह संख्या करीब 30 लाख तक पहुंच जाती है। उन्होंने कहा कि यह ऐसा क्षेत्र है, जिसके माध्यम से लाखों लोग सरकार पर निर्भर हुए बिना अपना रोजगार और कारोबार आगे बढ़ा रहे हैं।
उन्होंने बताया कि सरकार ने पिछले वर्ष हथकरघा क्षेत्र से जुड़े 40 हजार से अधिक हस्तशिल्पियों को बिजली से संबंधित सुविधाओं के लिए 109 करोड़ रुपये का लाभ दिया है। सरकार का उद्देश्य कारीगरों को सम्मान के साथ-साथ उनके काम के लिए जरूरी सुविधाएं उपलब्ध कराना है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि आज प्रतिस्पर्धा का दौर है। ऐसे में समय और बाजार की मांग के अनुरूप डिजाइन और उत्पाद तैयार करना जरूरी है। उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश के लखनऊ, गोरखपुर, बाराबंकी, अंबेडकर नगर, संत कबीर नगर, मऊ, आजमगढ़, वाराणसी, भदोही और मिर्जापुर समेत कई क्षेत्रों के हस्तशिल्प उत्पादों की देश-दुनिया में पहचान है। उन्होंने कहा कि सरकार हस्तशिल्पियों और कारीगरों के उत्पादों को डिजाइन, टेक्नोलॉजी, पैकेजिंग, एक्सपोर्ट और मार्केटिंग से जोड़ने पर विशेष ध्यान दे रही है, ताकि स्थानीय उत्पादों को वैश्विक बाजार मिल सके।
सीएम योगी ने भदोही के कालीन उद्योग का उदाहरण देते हुए कहा कि 2017 से पहले वहां का कालीन क्लस्टर लगभग मृतप्राय स्थिति में पहुंच गया था, लेकिन आज भदोही से सैकड़ों करोड़ रुपये के कालीन का निर्यात हो रहा है। उन्होंने कहा कि देश की नई संसद में भी भदोही की कालीन का इस्तेमाल हुआ है। मुख्यमंत्री ने कहा कि भदोही में केंद्र सरकार के सहयोग से कालीन एक्सपो सेंटर बनाया गया है, जबकि वाराणसी में ट्रेड फैसिलिटेशन सेंटर की स्थापना हो चुकी है। इन प्रयासों से प्रदेश के हस्तशिल्प उत्पादों को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय बाजार में नई पहचान मिल रही है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि टेक्सटाइल उद्योग को मजबूती देने के लिए लखनऊ में 1000 एकड़ क्षेत्र में पीएम मित्र पार्क विकसित किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि कृषि के बाद टेक्सटाइल क्षेत्र सबसे अधिक रोजगार देने वाले क्षेत्रों में शामिल है। उन्होंने बताया कि संत कबीर के नाम पर प्रदेश में पांच स्थानों पर टेक्सटाइल पार्क स्थापित करने की दिशा में भी काम आगे बढ़ रहा है। सरकार का लक्ष्य युवाओं और हर हाथ को रोजगार से जोड़ना है।
सीएम योगी ने कहा कि हथकरघा क्षेत्र की एक बड़ी विशेषता यह है कि इसमें 70 फीसदी से अधिक महिलाएं काम कर रही हैं। उन्होंने इसे महिला सशक्तीकरण का महत्वपूर्ण उदाहरण बताया। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी विदेश यात्राओं के दौरान उत्तर प्रदेश के हस्तशिल्प उत्पादों को विभिन्न राष्ट्राध्यक्षों को उपहार के रूप में देते हैं। यह प्रदेश के लाखों कारीगरों और हस्तशिल्पियों के लिए सम्मान की बात है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि वन डिस्ट्रिक्ट-वन प्रोडक्ट (ODOP) के जरिए प्रदेश के स्थानीय उत्पादों की ब्रांडिंग हुई और उन्हें बाजार उपलब्ध कराया गया। तकनीक, डिजाइन और पैकेजिंग से जोड़कर इन उत्पादों की क्षमता को और बढ़ाया जा रहा है। उन्होंने बताया कि उत्तर प्रदेश में 96 लाख एमएसएमई इकाइयां कार्यरत हैं। मुख्यमंत्री ने विभागीय अधिकारियों को निर्देश दिया कि कारीगरों और हस्तशिल्पियों द्वारा तैयार उत्पादों को बाजार की मांग और आधुनिक तकनीक के अनुरूप तैयार कराकर बाजार से जोड़ा जाए।
सीएम योगी ने सरकारी विभागों में हथकरघा उत्पादों की खरीद बढ़ाने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि अस्पतालों, होटलों, गेस्ट हाउस और अन्य सरकारी संस्थानों में हथकरघा उत्पादों का इस्तेमाल बढ़ाया जाए। इससे बुनकरों और कारीगरों की आय में वृद्धि होगी। उन्होंने आम लोगों से भी अपील की कि वे त्योहारों और अन्य अवसरों पर स्थानीय कारीगरों के उत्पादों को उपहार के रूप में इस्तेमाल करें। उन्होंने कहा कि दीपावली, होली, ईद सहित विभिन्न पर्वों पर उत्तर प्रदेश के स्थानीय उत्पाद उपहार में देने की परंपरा को बढ़ावा दिया जाना चाहिए।
मुख्यमंत्री ने कहा कि राष्ट्रीय हथकरघा दिवस केवल हथकरघा क्षेत्र से जुड़े लोगों को सम्मान देने का अवसर नहीं, बल्कि भारत के स्वतंत्रता आंदोलन की ऐतिहासिक विरासत से भी जुड़ा है। 7 अगस्त 1905 को स्वदेशी आंदोलन ने नई दिशा हासिल की थी। उन्होंने कहा कि स्वदेशी के मंत्र ने देश को एकता के सूत्र में बांधा और स्वतंत्रता आंदोलन को मजबूती दी। महात्मा गांधी ने भी खादी और स्वदेशी को स्वतंत्रता आंदोलन का महत्वपूर्ण माध्यम बनाया और चरखे को आंदोलन का प्रतीक बनाया। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा 7 अगस्त को राष्ट्रीय हथकरघा दिवस के रूप में मनाने का निर्णय देशभर के लाखों बुनकरों, हस्तशिल्पियों और इस क्षेत्र से जुड़े उद्यमियों के सम्मान का प्रतीक है।






