आरक्षण और UGC के नए इक्विटी रेगुलेशन को लेकर विरोध तेज करने का दावा, 17, 21 और 23 अगस्त को दिल्ली में अलग-अलग कार्यक्रमों की तैयारी
उत्तर प्रदेश से लेकर दिल्ली तक सवर्ण संगठनों की सक्रियता एक बार फिर चर्चा में है। UGC के नए नियमों और आरक्षण से जुड़े मुद्दों को लेकर कुछ संगठनों ने दिल्ली में बड़े आंदोलन और महापंचायत का ऐलान किया है, इन संगठनों का आरोप है कि नए नियम उनके समुदाय के छात्रों और शिक्षकों के लिए भेदभावपूर्ण हैं। हालांकि, UGC के आधिकारिक रिकॉर्ड के मुताबिक 2026 में University Grants Commission (Promotion of Equity in Higher Education Institutions) Regulations, 2026 जारी किए गए हैं, इसलिए नियमों को लेकर लगाए जा रहे राजनीतिक और सामाजिक आरोपों को आधिकारिक प्रावधानों से अलग करके देखना जरूरी है।
‘जय भवानी’ और ‘जय परशुराम’ के नारों के साथ आंदोलन की तैयारी
आंदोलन से जुड़े संगठनों का कहना है कि आरक्षण, SC-ST एक्ट और UGC के नए नियमों को लेकर सवर्ण समाज में नाराजगी बढ़ रही है, इन संगठनों का दावा है कि अब यह नाराजगी सिर्फ सोशल मीडिया तक सीमित नहीं है, बल्कि दिल्ली में बड़े स्तर पर प्रदर्शन के जरिए सरकार तक अपनी बात पहुंचाने की तैयारी है।
UGC के नए नियमों पर क्या है विवाद?
विरोध कर रहे संगठनों का आरोप है कि UGC के नए इक्विटी रेगुलेशन में शिकायत और कार्रवाई से जुड़े कुछ प्रावधान ऐसे हैं, जिनका कथित तौर पर दुरुपयोग हो सकता है, आंदोलनकारियों का दावा है कि झूठी शिकायतों के मामले में पर्याप्त सुरक्षा नहीं है और इससे सवर्ण छात्रों तथा शिक्षकों के हित प्रभावित हो सकते हैं हालांकि, इन दावों की व्याख्या करते समय UGC के वास्तविक नियमों और उनके प्रावधानों को देखना जरूरी है, UGC की आधिकारिक वेबसाइट पर 2026 के इक्विटी रेगुलेशन उपलब्ध हैं।
17, 21 और 23 अगस्त को दिल्ली में कार्यक्रम
आंदोलन से जुड़े लोगों के मुताबिक 17 अगस्त को ‘परशुराम दल’ की ओर से UGC नियमों के विरोध में कार्यक्रम प्रस्तावित है, इसके बाद 21 अगस्त को हर्ष दुबे के नेतृत्व में ‘आरक्षण हटाओ, देश बचाओ’ आंदोलन किए जाने का दावा किया गया है, वहीं 23 अगस्त को करणी सेना प्रमुख राज शेखावत के नेतृत्व में ‘सवर्ण आक्रोश महापंचायत’ आयोजित करने की बात कही गई है, आयोजकों के मुताबिक, दिल्ली में बड़ी संख्या में लोगों को जुटाने की तैयारी की जा रही है, जंतर-मंतर की अनुमति नहीं मिलने के दावे के बाद महापंचायत को शाह ऑडिटोरियम में आयोजित करने की बात कही जा रही है।

‘वोट की चोट’ की चेतावनी
आंदोलन से जुड़े नेताओं का कहना है कि यदि सरकार उनकी मांगों पर ध्यान नहीं देती है, तो इस नाराजगी को राजनीतिक स्तर पर भी उठाया जाएगा, उनका संदेश है कि मुद्दों का समाधान नहीं हुआ तो आने वाले चुनावों में ‘वोट की चोट’ के जरिए सरकार को जवाब दिया जा सकता है, हालांकि, इससे यह निष्कर्ष निकालना जल्दबाजी होगा कि इन आंदोलनों का किसी राजनीतिक दल के चुनावी प्रदर्शन पर निश्चित प्रभाव पड़ेगा।
अब सरकार और UGC के रुख पर नजर
UGC के नए नियमों को लेकर बहस अब सिर्फ विश्वविद्यालयों तक सीमित नहीं रह गई है, इनके प्रावधानों की व्याख्या, शिकायत निवारण की व्यवस्था और छात्रों तथा शिक्षकों के अधिकारों को लेकर अलग-अलग पक्ष अपनी दलीलें सामने रख रहे हैं, अब देखना होगा कि 17, 21 और 23 अगस्त के प्रस्तावित कार्यक्रम कितने बड़े होते हैं और सरकार या UGC की ओर से इन संगठनों की आपत्तियों पर क्या प्रतिक्रिया आती है।





