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नीति आयोग की एबीपी डेल्टा रैंकिंग में गोरखपुर का बांसगांव ब्लॉक नंबर वन

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गोरखपुर, 12 अगस्त। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के मार्गदर्शन में गोरखपुर ने विकास के क्षेत्र में बड़ी उपलब्धि हासिल की है। भारत सरकार के नीति आयोग के आकांक्षी ब्लॉक कार्यक्रम (ABP) की जनवरी-मार्च 2026 तिमाही की डेल्टा रैंकिंग में गोरखपुर का बांसगांव विकास खंड उत्तरी भारत (जोन-2) में प्रथम स्थान पर रहा है। बांसगांव को उत्कृष्ट प्रदर्शन के लिए डेढ़ करोड़ रुपये की पुरस्कार राशि भी मिली है।

इस उपलब्धि की जानकारी नीति आयोग की मुख्य कार्यकारी अधिकारी निधि छिब्बर की ओर से उत्तर प्रदेश के मुख्य सचिव को भेजे गए पत्र के माध्यम से दी गई है। बांसगांव की इस सफलता से गोरखपुर के साथ-साथ पूरे उत्तर प्रदेश का गौरव बढ़ा है। जिलाधिकारी दीपक मीणा और मुख्य विकास अधिकारी शाश्वत त्रिपुरारी ने इस उपलब्धि का श्रेय मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के मार्गदर्शन में जिले में संचालित समावेशी विकास कार्यों और प्रशासनिक टीम के प्रयासों को दिया है।

नीति आयोग के आकांक्षी ब्लॉक कार्यक्रम का उद्देश्य पिछड़े क्षेत्रों में समावेशी विकास को गति देना और लोगों के जीवन स्तर में सुधार लाना है। इसके तहत स्वास्थ्य एवं पोषण, शिक्षा, कृषि एवं संबद्ध क्षेत्र, आधारभूत ढांचा और सामाजिक विकास जैसी पांच प्रमुख थीम के कुल 39 प्रमुख प्रदर्शन संकेतकों यानी KPI पर ब्लॉकों का मूल्यांकन किया जाता है। बांसगांव ब्लॉक ने जनवरी से मार्च 2026 की तिमाही में इन सभी पांचों थीम में उत्कृष्ट प्रदर्शन करते हुए 39 केपीआई पर शत-प्रतिशत वेटेज हासिल किया। इसी प्रदर्शन के आधार पर उसे उत्तरी भारत के जोन-2 में पहला स्थान प्राप्त हुआ। कभी विकास संबंधी चुनौतियों के लिए पहचाना जाने वाला बांसगांव आज बेहतर प्रशासन, योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन और नवाचार के जरिए मॉडल विकास खंड के रूप में उभरा है। उसकी यह उपलब्धि प्रदेश के अन्य आकांक्षी ब्लॉकों के लिए भी प्रेरणादायक मानी जा रही है।

मुख्य विकास अधिकारी शाश्वत त्रिपुरारी ने कहा कि डेल्टा रैंकिंग में प्रथम स्थान केवल एक रैंक नहीं, बल्कि बांसगांव क्षेत्र में हुए सकारात्मक बदलाव का प्रमाण है। उन्होंने बताया कि पुरस्कार के रूप में मिली डेढ़ करोड़ रुपये की राशि का उपयोग शिक्षा, स्वास्थ्य, पोषण, कृषि, आधारभूत ढांचे और आजीविका से जुड़े विकास कार्यों को और मजबूत करने में किया जाएगा। बांसगांव की इस उपलब्धि ने साबित किया है कि प्रभावी प्रशासन, योजनाओं की बेहतर मॉनिटरिंग और जनभागीदारी के जरिए आकांक्षी क्षेत्रों को विकास के नए मॉडल के रूप में विकसित किया जा सकता है।

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