लखनऊ। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश ने डिजिटल और पारदर्शी सरकारी खरीद के क्षेत्र में बड़ी उपलब्धि हासिल की है। प्रदेश ने गवर्नमेंट ई-मार्केटप्लेस (GeM) पर वर्ष 2017 में इसकी शुरुआत से अब तक ₹1 लाख करोड़ से अधिक की खरीद दर्ज की है। देश के सभी राज्यों द्वारा GeM के माध्यम से की गई कुल खरीद में उत्तर प्रदेश की हिस्सेदारी 30 प्रतिशत से अधिक है।
उत्तर प्रदेश की इस उपलब्धि को राष्ट्रीय स्तर पर भी पहचान मिली है। 10 अगस्त 2026 को नई दिल्ली स्थित भारत मंडपम में आयोजित GeM के 10वें स्थापना दिवस समारोह में केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने उत्तर प्रदेश को सार्वजनिक खरीद के क्षेत्र में उत्कृष्ट प्रदर्शन के लिए तीन प्रतिष्ठित राष्ट्रीय पुरस्कार प्रदान किए। इनमें GeM ओवरऑल एक्सीलेंस अवार्ड, हाईएस्ट GeM प्रोक्योरमेंट वैल्यू अवार्ड और बेस्ट आउटरीच बिल्डिंग अवार्ड शामिल हैं। ये पुरस्कार उत्तर प्रदेश शासन के प्रमुख सचिव शशिभूषण लाल सुशील ने प्राप्त किए।
सरकार के अनुसार, GeM के व्यापक इस्तेमाल से प्रदेश में सरकारी खरीद प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी, प्रतिस्पर्धी, सरल और जवाबदेह बनाने में मदद मिली है। डिजिटल प्लेटफॉर्म के जरिए विभागों को गुणवत्तापूर्ण उत्पाद और सेवाएं बेहतर कीमत पर उपलब्ध कराने के साथ खरीद प्रक्रिया में पारदर्शिता और ‘वैल्यू फॉर मनी’ को भी बढ़ावा मिला है।
GeM के माध्यम से उत्तर प्रदेश ने सरकारी खरीद में एमएसएमई, महिला उद्यमियों, एससी-एसटी वर्ग के उद्यमों और स्टार्टअप्स की भागीदारी बढ़ाने पर भी जोर दिया है। डिजिटल प्लेटफॉर्म ने छोटे और स्थानीय कारोबारियों को सरकारी खरीदारों तक पहुंच बनाने का अवसर दिया है। इससे प्रदेश के उद्यमियों के लिए राज्य के बाहर भी अपने उत्पाद और सेवाएं बेचने का बाजार खुला है।
उत्तर प्रदेश की इस सफलता में अधिकारियों और अन्य हितधारकों के प्रशिक्षण एवं क्षमता निर्माण की भी अहम भूमिका रही है। GeM की सुविधाओं और प्रक्रियाओं के प्रभावी इस्तेमाल के लिए प्रदेश में लगातार प्रशिक्षण और जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए गए। इसी प्रयास को राष्ट्रीय स्तर पर बेस्ट आउटरीच बिल्डिंग अवार्ड के जरिए मान्यता मिली है।
₹1 लाख करोड़ से अधिक की खरीद और तीन राष्ट्रीय पुरस्कार उत्तर प्रदेश में डिजिटल गवर्नेंस और सार्वजनिक खरीद व्यवस्था में हो रहे बदलाव को दर्शाते हैं। प्रदेश सरकार का जोर सरकारी खरीद को अधिक पारदर्शी, प्रतिस्पर्धी, समावेशी और परिणाम आधारित बनाने पर है।
