लखनऊ की सरोजनीनगर विधानसभा सीट… उत्तर प्रदेश की उन हाई प्रोफाइल सीटों में शामिल है, जिस पर 2027 के चुनाव में सबकी नजर रहने वाली है।2022 में बीजेपी के राजेश्वर सिंह ने यहां ऐसी जीत दर्ज की, जिसने विरोधियों के सामने बड़ी चुनौती खड़ी कर दी। लेकिन पांच साल की राजनीति में समीकरण बदलते देर नहीं लगती। अब सवाल है क्या राजेश्वर सिंह 2027 में फिर इतनी बड़ी जीत दोहरा पाएंगे?या समाजवादी पार्टी इस बार कोई ऐसा सियासी दांव चलेगी, जिससे बीजेपी का मजबूत किला हिल जाए? 2022 के विधानसभा चुनाव में बीजेपी के राजेश्वर सिंह को 1 लाख 60 हजार 626 वोट मिले। उन्होंने सपा के अभिषेक मिश्रा को करीब 56 हजार 186 वोटों के बड़े अंतर से हराया।अभिषेक मिश्रा को 1 लाख 4 हजार 440 वोट मिले थे।बीएसपी के हम्मद जलीश खान करीब 33 हजार वोटों के साथ तीसरे स्थान पर रहे, जबकि कांग्रेस की शहाना सिद्दीकी को करीब 19 हजार 711 वोट मिले। यानी बीजेपी ने यहां सिर्फ जीत हासिल नहीं की… बल्कि एक बड़ा चुनावी संदेश भी दिया।लेकिन 2027 का चुनाव 2022 से अलग हो सकता है। राजेश्वर सिंह के सामने सबसे बड़ी चुनौती होगी
अपनी पिछली जीत के अंतर को बनाए रखना। विपक्ष के सामने चुनौती इससे भी बड़ी है उसे बीजेपी के खिलाफ सिर्फ उम्मीदवार नहीं, बल्कि मजबूत सामाजिक और राजनीतिक गठजोड़ तैयार करना होगा।सपा की रणनीति में यादव और मुस्लिम वोटों के साथ दूसरे पिछड़े वर्गों और शहरी मतदाताओं को जोड़ने की कोशिश महत्वपूर्ण हो सकती है।वहीं बीजेपी अपने संगठन, सरकार के कामकाज और कानून-व्यवस्था जैसे मुद्दों के साथ मैदान में उतर सकती है।
सरोजनीनगर में विकास, सड़क, रोजगार, स्वास्थ्य, शिक्षा, कानून-व्यवस्था और बढ़ता शहरीकरण जैसे मुद्दे चुनावी बहस का हिस्सा बन सकते हैं। यह सीट ग्रामीण और तेजी से विकसित हो रहे शहरी इलाकों का मिश्रण भी है। इसलिए यहां ग्रामीण वोटर और शहरी मध्यम वर्ग, दोनों का रुझान महत्वपूर्ण होगा।
युवा मतदाता भी 2027 में बड़ा फैक्टर बन सकते हैं। सबसे बड़ा सवाल विपक्ष का चेहरा कौन?बीजेपी के पास फिलहाल मजबूत विजेता चेहरा है, लेकिन विपक्ष के लिए सबसे बड़ा सवाल उम्मीदवार का है। क्या सपा अभिषेक मिश्रा पर दोबारा भरोसा करेगी? या कोई नया चेहरा मैदान में उतारकर बीजेपी को चौंकाएगी?और अगर विपक्षी वोट अलग-अलग दलों में बंटे रहे, तो इसका सीधा फायदा बीजेपी को मिल सकता है।वहीं अगर सपा, कांग्रेस और दूसरे विपक्षी दल प्रभावी तालमेल बनाते हैं, तो मुकाबला पिछली बार की तुलना में काफी कड़ा हो सकता है। तो सरोजनीनगर में 2027 की सियासी पटकथा अभी लिखी जानी बाकी है।
एक तरफ 1 लाख 60 हजार से ज्यादा वोट और 56 हजार से ज्यादा की जीत का आत्मविश्वास लेकर बीजेपी के राजेश्वर सिंह हैं… तो दूसरी तरफ विपक्ष के सामने चुनौती है क्या वह एक ऐसा चेहरा और ऐसा सामाजिक समीकरण तैयार कर पाएगा, जो बीजेपी के इस मजबूत किले को चुनौती दे सके? 2022 में सरोजनीनगर ने बीजेपी को एकतरफा जनादेश दिया था… लेकिन 2027 में सवाल है क्या राजेश्वर सिंह फिर बनाएंगे रिकॉर्ड? या इस बार विपक्ष का नया सियासी समीकरण सरोजनीनगर की तस्वीर बदल देगा? फैसला होगा जनता की अदालत में… और इस सीट पर हर वोट की कहानी बेहद दिलचस्प होने वाली है।
