यूपी के अयोध्या में श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के पहले मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सीईओ) के रूप में रिटायर्ड एयर मार्शल जीतेंद्र मिश्रा की नियुक्ति के बाद से राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है, विभिन्न राजनीतिक दलों के बीच अब बिहार की बांकीपुर सीट से विधायक और ‘जन सुराज’ के संस्थापक प्रशांत किशोर (पीके) ने भी इस मुद्दे पर कड़ा रुख अपनाया है, बिहार के गयाजी में आयोजित ‘शिक्षक संवाद एवं नागरिक अभिनंदन समारोह’ में शामिल होने पहुंचे प्रशांत किशोर ने मीडिया से बातचीत के दौरान मंदिर ट्रस्ट और अर्थव्यवस्था के मुद्दों पर केंद्र सरकार को घेरा।
‘आस्था के केंद्र में गबन का आरोप, कार्रवाई जरूरी’
अयोध्या मंदिर में नए सीईओ की तैनाती पर प्रतिक्रिया देते हुए प्रशांत किशोर ने कहा कि महज नए अधिकारी की नियुक्ति से मूल समस्या का समाधान नहीं हो जाता, “नए व्यक्ति को नियुक्त करने से मामला खत्म नहीं होने वाला। सरकार को यह बताना चाहिए कि देश के हिंदुओं के इतने बड़े आस्था के केंद्र राम मंदिर में चोरी और गबन के जो आरोप लगे हैं, उस पर क्या कार्रवाई हुई? सरकार को इस पर स्पष्ट जवाब और कार्रवाई करनी चाहिए।”
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‘जीडीपी आंकड़े बेहतर, पर जमीनी हकीकत कुछ और’
प्रशांत किशोर ने देश की अर्थव्यवस्था और जीडीपी (GDP) के आंकड़ों पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि सरकारी दावों और जमीनी हकीकत में बड़ा अंतर है:
- आंकड़ों पर संदेह: विशेषज्ञ पिछले कई सालों से सरकार द्वारा जारी जीडीपी आंकड़ों पर सवाल उठाते रहे हैं।
- रोजगार का अभाव: सरकार भले ही बेहतर स्थिति के दावे कर रही हो, लेकिन आम आदमी के जीवन में सुधार नहीं दिख रहा।
- प्रभावित वर्ग: युवाओं को नौकरी नहीं मिल रही है, जबकि मजदूर, किसान और छात्र आज भी बदहाली का सामना कर रहे हैं।
‘शिक्षा प्राथमिकता में नहीं, तो कैसे सुधरेगी शिक्षकों की हालत?’
बिहार की शिक्षा व्यवस्था और शिक्षकों के मुद्दों पर प्रशांत किशोर ने राज्य सरकार को आड़े हाथों लिया, उन्होंने कहा कि जब तक राज्य की राजनीति और समाज की प्राथमिकता में शिक्षा नहीं आएगी, तब तक सुधार असंभव है।
- शिक्षा व्यवस्था का संकट: बिहार में शिक्षकों की स्थिति तब तक नहीं सुधरेगी, जब तक पूरे राज्य की शिक्षा प्रणाली को दुरुस्त नहीं किया जाता।
- प्राथमिकता की कमी: दुर्भाग्य से बिहार के समाज और सरकार दोनों की प्राथमिकताओं में शिक्षा काफी पीछे छूट गई है।
