Punjab Politics: 2027 चुनाव से पहले सर्वे में भगवंत मान सबसे पसंदीदा CM चेहरा, विधायकों को लेकर जनता में नाराजगी
चंडीगढ़: पंजाब में 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले सियासी तस्वीर को लेकर एक सर्वे के आंकड़े सामने आए हैं। Vote Vibe के State Vibe Survey के मुताबिक, मुख्यमंत्री चेहरे के तौर पर भगवंत मान अभी भी पंजाब की जनता की पहली पसंद बने हुए हैं। हालांकि, सर्वे में एक अहम बात यह भी सामने आई है कि जनता की नाराजगी मुख्यमंत्री से ज्यादा अपने-अपने क्षेत्र के मौजूदा विधायकों को लेकर दिखाई दे रही है।
भगवंत मान पहली पसंद, चन्नी दूसरे नंबर पर
सर्वे के मुताबिक करीब 40.1 फीसदी लोगों ने भगवंत मान को मुख्यमंत्री पद के लिए अपनी पसंद बताया है। वहीं कांग्रेस के चरणजीत सिंह चन्नी दूसरे नंबर पर नजर आ रहे हैं। इसके अलावा अमृतपाल सिंह और सुखबीर सिंह बादल भी मुख्यमंत्री चेहरे की दौड़ में अपनी मौजूदगी दर्ज करा रहे हैं।
इन आंकड़ों से संकेत मिलता है कि पंजाब में भगवंत मान की व्यक्तिगत लोकप्रियता अभी भी आम आदमी पार्टी के लिए एक महत्वपूर्ण राजनीतिक ताकत बनी हुई है।
विधायकों के कामकाज से जनता नाराज?
सर्वे की सबसे अहम बात स्थानीय विधायकों को लेकर सामने आई नाराजगी है। कई इलाकों में लोगों ने अपने क्षेत्र के मौजूदा विधायकों के कामकाज, जनता से संपर्क और स्थानीय स्तर पर उनकी सक्रियता को लेकर असंतोष जाहिर किया है।
यानी एक तरफ मुख्यमंत्री भगवंत मान के चेहरे को लेकर स्थिति अपेक्षाकृत मजबूत दिखाई दे रही है, वहीं दूसरी तरफ विधायकों का प्रदर्शन आम आदमी पार्टी के लिए चिंता का विषय बन सकता है।
2027 में AAP के सामने क्या होगी चुनौती?
2027 के विधानसभा चुनाव में आम आदमी पार्टी के सामने सिर्फ सरकार के कामकाज का रिपोर्ट कार्ड पेश करने की चुनौती नहीं होगी, बल्कि पार्टी के मौजूदा विधायकों के प्रदर्शन का हिसाब भी जनता के सामने रखना होगा।
अगर मुख्यमंत्री की लोकप्रियता बरकरार रहती है, लेकिन स्थानीय स्तर पर विधायकों के खिलाफ नाराजगी बढ़ती है, तो इसका असर चुनावी समीकरण पर पड़ सकता है। ऐसे में AAP के लिए टिकट वितरण और मौजूदा विधायकों के प्रदर्शन की समीक्षा चुनाव से पहले अहम मुद्दा बन सकती है।
अब बड़ा सवाल यही है कि क्या भगवंत मान की लोकप्रियता आम आदमी पार्टी को 2027 में दोबारा सत्ता तक पहुंचाने के लिए पर्याप्त होगी, या फिर स्थानीय विधायकों के खिलाफ जनता की नाराजगी पंजाब के चुनावी समीकरण को बदल देगी?
