प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने 12 सितंबर को BRICS Summit से इतर मुलाकात की। बैठक में दोनों नेताओं के बीच भारत-चीन संबंधों से जुड़े कई अहम मुद्दों पर चर्चा हुई। प्रधानमंत्री मोदी ने चीन की ओर से मिले समर्थन और सहयोग के लिए धन्यवाद भी दिया।
बैठक को भारत-चीन संबंधों में आगे की दिशा तय करने के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। दोनों देशों के बीच LAC पर तनाव के साथ-साथ व्यापार और आर्थिक संबंधों में आई चुनौतियों को लेकर भी बातचीत हुई। भारत का लगातार रुख रहा है कि सीमा पर शांति और स्थिरता के बिना द्विपक्षीय संबंधों में स्थायी सुधार संभव नहीं है। वहीं, चीन सीमा विवाद को अन्य द्विपक्षीय संबंधों से अलग रखने की बात करता रहा है।
अरुणाचल प्रदेश और LAC का मुद्दा भी उठा
बातचीत में जुलाई में अरुणाचल प्रदेश के ऊपरी सुबानसिरी जिले के ताकसिंग क्षेत्र में बने तनाव और उसके बाद हुई सैन्य कमांडर स्तर की वार्ता का मुद्दा भी शामिल रहा। भारत ने स्पष्ट किया है कि अरुणाचल प्रदेश देश का अभिन्न और अटूट हिस्सा है। वहीं चीन की ओर से राज्य में 27 जगहों के नाम बदले जाने को लेकर आपत्ति जताई जाती रही है। LAC के पूर्वी क्षेत्र को लेकर भी दोनों देशों के बीच मतभेद बने हुए हैं। ऐसे में सीमा पर शांति और स्थिरता कायम करना दोनों देशों के रिश्तों के लिए अहम मुद्दा है।
ब्रह्मपुत्र पर चीन के हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट पर चिंता
बैठक में ब्रह्मपुत्र नदी से जुड़ा मुद्दा भी भारत की चिंताओं में शामिल रहा। तिब्बत में यारलुंग त्सांगपो नदी के ऊपरी हिस्से पर चीन बड़े हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट की योजना बना रहा है। भारत को आशंका है कि इस परियोजना का नदी के निचले इलाकों पर असर पड़ सकता है। भारत चीन से इस परियोजना से जुड़ी जानकारी साझा करने की मांग कर चुका है। क्षेत्र में खराब मौसम और ग्लेशियरों में हो रहे बदलावों के बीच ब्रह्मपुत्र नदी को लेकर भारत की चिंताएं और बढ़ी हैं।
व्यापार और सप्लाई चेन पर भी हुई चर्चा
दोनों नेताओं की बैठक में भारतीय सामानों की चीन के बाजार तक पहुंच बढ़ाने और सप्लाई चेन से जुड़ी निर्भरता को लेकर भी चर्चा हुई। प्रमुख तकनीकों और उपकरणों के निर्यात पर लगी पाबंदियों के कारण भारतीय उद्योग को चीन से मशीनरी, उपकरण और स्पेयर पार्ट हासिल करने में चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है। इलेक्ट्रॉनिक्स, कैपिटल गुड्स और सोलर सेल जैसे कुछ क्षेत्रों में पाबंदियों में ढील दी गई है, लेकिन कई क्षेत्रों में सरकारी मंजूरी को लेकर अब भी दिक्कतें बनी हुई हैं। डिक्सन टेक्नोलॉजीज और Vivo के बीच हालिया साझेदारी को इस दिशा में सकारात्मक कदम के तौर पर देखा जा रहा है।
लंबे समय के लिए रिश्तों को स्थिर बनाने पर जोर
PM मोदी और शी जिनपिंग की बैठक का फोकस दोनों देशों के बीच मौजूद मतभेदों को बातचीत और तय व्यवस्थाओं के जरिए सुलझाने पर रहा। इसका उद्देश्य संवाद और सहयोग को बढ़ावा देना तथा विवादों के समाधान के लिए मौजूदा तंत्रों का इस्तेमाल करना है। बैठक को भारत-चीन संबंधों को केवल तात्कालिक स्तर पर संभालने के बजाय लंबे समय के लिए स्थिर और भरोसेमंद दिशा देने की कोशिश के तौर पर देखा जा रहा है।
