लखनऊ, 13 सितंबर। उत्तर प्रदेश की फॉरेंसिक और तकनीकी प्रतिभा अब अमेरिका की नई पीढ़ी को आधुनिक तकनीकों की शिक्षा देगी। उत्तर प्रदेश स्टेट इंस्टीट्यूट ऑफ फॉरेंसिक साइंस (UPSIFS) के एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. कमलेश कुमार दुबे को वर्ष 2026-27 के लिए प्रतिष्ठित ‘फुलब्राइट स्कॉलर-इन-रेजिडेंस’ कार्यक्रम के तहत अमेरिका आमंत्रित किया गया है। वह नॉर्थ कैरोलिना के सैलिसबरी स्थित लिविंगस्टोन कॉलेज में दो अकादमिक सेमेस्टर तक शैक्षणिक गतिविधियों में भाग लेंगे और मई 2027 तक वहां रहेंगे।
डॉ. दुबे अमेरिका में गणित के साथ प्रेडिक्टिव एनालिटिक्स, बिजनेस एनालिटिक्स, डिस्क्रिप्टिव एनालिटिक्स और डेटा माइनिंग जैसे आधुनिक विषयों पर विद्यार्थियों के साथ काम करेंगे। इसके अलावा आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, डेटा एनालिटिक्स, साइबर सिक्योरिटी, क्रिप्टोग्राफी, क्वांटम क्रिप्टोग्राफी और ब्लॉकचेन जैसी उभरती तकनीकों से भी अमेरिकी विद्यार्थियों को परिचित कराएंगे।यूपीएसआईएफएस के संस्थापक निदेशक डॉ. जीके गोस्वामी ने डॉ. दुबे के चयन को उत्तर प्रदेश की अकादमिक और तकनीकी क्षमता के लिए महत्वपूर्ण उपलब्धि बताया। उन्होंने कहा कि इस अकादमिक यात्रा से भारत और अमेरिका के बीच गणित, डेटा एनालिटिक्स, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, साइबर सिक्योरिटी और क्रिप्टोग्राफी जैसे क्षेत्रों में शोध और शैक्षणिक सहयोग की नई संभावनाएं मजबूत होंगी।
डॉ. गोस्वामी स्वयं भी फुलब्राइट फ्लेक्स अवार्ड फेलो रह चुके हैं।मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश में फॉरेंसिक साइंस और आधुनिक तकनीकी क्षमताओं को मजबूत करने पर जोर दिया जा रहा है। यूपीएसआईएफएस के माध्यम से फॉरेंसिक साइंस को साइबर सिक्योरिटी, डिजिटल फॉरेंसिक, डेटा एनालिटिक्स और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस जैसी तकनीकों से जोड़ने की दिशा में काम किया जा रहा है।अपराध के बदलते स्वरूप के बीच वैज्ञानिक और तकनीकी साक्ष्यों की भूमिका लगातार बढ़ रही है। साइबर अपराध, डिजिटल फ्रॉड और डेटा आधारित अपराधों की जांच में आधुनिक तकनीक की जरूरत को देखते हुए फॉरेंसिक साइंस का दायरा भी तेजी से विस्तृत हो रहा है। इसी बदलाव के बीच डॉ. दुबे का अमेरिका जाना उत्तर प्रदेश की तकनीकी विशेषज्ञता के अंतरराष्ट्रीय विस्तार के तौर पर देखा जा रहा है।
डॉ. कमलेश कुमार दुबे की यह उपलब्धि उनके 19 वर्षों से अधिक के अकादमिक अनुभव का परिणाम है। उन्होंने दीनदयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय से गणित में पीएचडी तथा इलाहाबाद विश्वविद्यालय से बीएससी और एमएससी की पढ़ाई की है। उनके नाम 40 से अधिक शोध-पत्र, 10 पेटेंट और चार पुस्तकें प्रकाशित होने का रिकॉर्ड है। उनके निर्देशन में छह शोधार्थी पीएचडी पूरी कर चुके हैं।फुलब्राइट स्कॉलर-इन-रेजिडेंस के रूप में अमेरिका में उनकी मौजूदगी से विद्यार्थियों और शिक्षकों के बीच ज्ञान एवं अनुभव के आदान-प्रदान को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है। साथ ही यह उपलब्धि उत्तर प्रदेश की अकादमिक प्रतिभा और आधुनिक तकनीकी क्षमता को वैश्विक मंच पर स्थापित करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।
