उत्तराखंड: चालदा महासू महाराज के जागड़ा पर्व में उमड़ी आस्था, जौनसारी संस्कृति की दिखी भव्य झलक
देहरादून/चकराता: उत्तराखंड को देवभूमि यूं ही नहीं कहा जाता। यहां देवी-देवताओं के प्रति लोगों की गहरी आस्था और सदियों पुरानी परंपराएं आज भी जीवंत हैं। जौनसार-बावर क्षेत्र में इन दिनों चालदा महासू देवता के जागड़ा पर्व की धूम देखने को मिल रही है। चकराता विधानसभा क्षेत्र के कचटा में भी जागड़ा पर्व का भव्य आयोजन किया गया, जिसमें बड़ी संख्या में श्रद्धालु शामिल हुए।
दूर-दूर से दर्शन के लिए पहुंचे श्रद्धालु
कचटा में आयोजित धार्मिक कार्यक्रम में खत कोरू क्षेत्र से बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचे और चालदा महासू महाराज के दर्शन कर आशीर्वाद लिया। इस दौरान पूर्व जिला पंचायत अध्यक्ष रामशरण नौटियाल की ओर से श्रद्धालुओं के लिए भंडारे का आयोजन भी किया गया।
यमुना में कराया गया राजसी स्नान
जागड़ा पर्व के दौरान चालदा महासू महाराज की डोली को यमुना तट तक ले जाया गया, जहां विधि-विधान के साथ राजसी स्नान कराया गया। इसके बाद डोली को मंदिर परिसर में लाया गया और धार्मिक अनुष्ठानों के बीच मंदिर में विराजमान किया गया।
पारंपरिक वेशभूषा में नजर आईं महिलाएं
महासू देवता की डोली के मंदिर पहुंचने पर श्रद्धालुओं ने जयकारों के साथ भव्य स्वागत किया। इस दौरान महिलाओं ने पारंपरिक जौनसारी वेशभूषा में नृत्य कर अपनी लोक संस्कृति की खूबसूरत झलक पेश की। पूरा मंदिर परिसर श्रद्धालुओं के जयकारों से गूंजता रहा।
मंदिर में विराजमान रहेंगे चालदा महासू महाराज
विधि-विधान के साथ डोली को मंदिर में स्थापित किए जाने के बाद अब चालदा महासू महाराज मंदिर में ही विराजमान रहेंगे। श्रद्धालु यहां पहुंचकर उनके दर्शन और पूजा-अर्चना कर सकेंगे।
कार्यक्रम के दौरान मीडिया कर्मियों और नौटियाल परिवार को मंदिर की तस्वीर भेंट कर सम्मानित भी किया गया। कुल मिलाकर चालदा महासू महाराज का यह जागड़ा पर्व आस्था, परंपरा और जौनसारी संस्कृति के अनोखे संगम की तस्वीर पेश करता नजर आया।
