UGC Rules Controversy: विश्वविद्यालय अनुदान आयोग यानी UGC के प्रस्तावित इक्विटी नियमों को लेकर चल रही बहस के बीच RSS प्रमुख मोहन भागवत के एक बयान ने चर्चा को फिर तेज कर दिया है। राजस्थान के भीलवाड़ा में जैन संत आचार्य पुलकसागर महाराज से मुलाकात के दौरान UGC के प्रस्तावित नियमों का मुद्दा उठा। आचार्य पुलकसागर महाराज के मुताबिक, बातचीत में मोहन भागवत ने कहा कि ये नियम फिलहाल सिर्फ मसौदा हैं और इन्हें कानून का रूप नहीं दिया जाएगा।
हालांकि, इस बयान को समझने के लिए UGC नियमों की मौजूदा कानूनी स्थिति भी महत्वपूर्ण है। 2026 में अधिसूचित UGC के इक्विटी नियमों पर सुप्रीम कोर्ट पहले ही रोक लगा चुका है। कोर्ट ने नियमों को प्रथम दृष्टया अस्पष्ट बताते हुए फिलहाल 2012 के नियमों को जारी रखने का निर्देश दिया था।
40 मिनट की मुलाकात में UGC पर हुई चर्चा
रिपोर्टों के मुताबिक, मोहन भागवत और आचार्य पुलकसागर महाराज के बीच करीब 40 मिनट तक बातचीत हुई। इस दौरान UGC के प्रस्तावित नियमों के अलावा सामाजिक समरसता, जातिगत विषमता और देश की मौजूदा परिस्थितियों जैसे मुद्दों पर भी चर्चा हुई।आचार्य पुलकसागर महाराज ने मुलाकात के बाद दावा किया कि UGC के प्रस्ताव को लेकर बातचीत में मोहन भागवत ने स्पष्ट किया कि यह अभी केवल एक ड्राफ्ट है। उनके अनुसार, इसे कानून का रूप नहीं दिया जाएगा।
आखिर क्या है UGC का पूरा विवाद?
UGC ने 2026 में उच्च शिक्षण संस्थानों में समानता और भेदभाव से जुड़ी शिकायतों के लिए नए इक्विटी नियम अधिसूचित किए थे। प्रस्तावित व्यवस्था के तहत विश्वविद्यालयों और कॉलेजों में Equal Opportunity Centre और Equity Committee जैसी व्यवस्थाओं का प्रावधान किया गया था। इनका उद्देश्य जाति, धर्म और लिंग के आधार पर भेदभाव से जुड़ी शिकायतों के निपटारे के लिए संस्थागत व्यवस्था तैयार करना था।इन नियमों को लेकर अलग-अलग छात्र और सामाजिक संगठनों की ओर से आपत्तियां सामने आईं। कुछ समूहों ने तर्क दिया कि प्रस्तावित व्यवस्था में सामान्य वर्ग के छात्रों के लिए समान सुरक्षा को लेकर पर्याप्त स्पष्टता नहीं है। दूसरी ओर, नियमों के समर्थकों की ओर से इन्हें उच्च शिक्षा संस्थानों में भेदभाव रोकने की व्यवस्था के तौर पर देखा गया।
सुप्रीम कोर्ट की रोक के बाद मामला और अहम
UGC के 2026 नियमों को लेकर विवाद बढ़ने के बाद मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंचा। कोर्ट ने जनवरी 2026 में इन नियमों के लागू होने पर रोक लगाई और 2012 के नियमों को फिलहाल जारी रखने का निर्देश दिया। केंद्र और UGC से भी इस मामले में जवाब मांगा गया।यानी मौजूदा स्थिति में प्रस्तावित 2026 नियम लागू कानून के तौर पर प्रभावी नहीं हैं। मोहन भागवत का हालिया बयान इसी पृष्ठभूमि में सामने आया है।
अब आगे क्या होगा?
भागवत के बयान के बाद UGC नियमों को लेकर राजनीतिक और सामाजिक चर्चा फिर तेज हो गई है। हालांकि यह ध्यान रखना जरूरी है कि आचार्य पुलकसागर महाराज द्वारा बताई गई बातचीत और केंद्र सरकार या UGC की औपचारिक घोषणा अलग-अलग चीजें हैं। रिपोर्टों के अनुसार, इस बयान के बाद केंद्र या UGC की ओर से तत्काल कोई नया औपचारिक निर्णय सामने नहीं आया है।अब नजर इस बात पर है कि सरकार और UGC इस विवादित मसौदे को लेकर आगे क्या रुख अपनाते हैं और सुप्रीम कोर्ट में मामले की अगली कानूनी प्रक्रिया किस दिशा में जाती है। फिलहाल UGC इक्विटी नियमों का मुद्दा शिक्षा, सामाजिक समानता और उच्च शिक्षा संस्थानों में भेदभाव की व्यवस्था को लेकर जारी राष्ट्रीय बहस का हिस्सा बना हुआ है।
