लखनऊ की विशेष सीबीआई अदालत ने 2013 के चर्चित सीओ जियाउल हक हत्याकांड में कुंडा विधायक और पूर्व मंत्री रघुराज प्रताप सिंह उर्फ राजा भैया को बड़ी राहत दी है। अदालत ने मामले की दोबारा जांच के बाद सीबीआई की ओर से दाखिल क्लोजर रिपोर्ट को स्वीकार कर लिया है। इसके साथ ही राजा भैया के खिलाफ आगे की न्यायिक कार्रवाई की मांग खारिज कर दी गई है।
यह मामला 2 मार्च 2013 को प्रतापगढ़ के कुंडा क्षेत्र के बलीपुर गांव में हुई घटनाओं से जुड़ा है। ग्राम प्रधान नन्हे यादव की हत्या के बाद इलाके में तनाव फैल गया था। हालात संभालने पहुंचे तत्कालीन कुंडा सीओ जियाउल हक की भीड़ ने हत्या कर दी थी। घटना के बाद मामले की जांच सीबीआई को सौंप दी गई थी।सीओ जियाउल हक की पत्नी परवीन आजाद ने मामले में राजा भैया समेत अन्य लोगों की कथित भूमिका पर सवाल उठाते हुए सीबीआई की पहली क्लोजर रिपोर्ट का विरोध किया था। उन्होंने मामले की दोबारा जांच की मांग की थी। मामला सुप्रीम कोर्ट तक पहुंचा, जिसके बाद सीबीआई ने अक्टूबर 2023 में नए सिरे से जांच शुरू की।दोबारा जांच पूरी करने के बाद सीबीआई ने दिसंबर 2023 में अदालत में फिर क्लोजर रिपोर्ट दाखिल की। जांच एजेंसी ने राजा भैया को आरोपी नहीं बनाया और कहा कि उनके खिलाफ साजिश या हत्याकांड में प्रत्यक्ष भूमिका साबित करने के लिए पर्याप्त दस्तावेजी या मौखिक साक्ष्य नहीं मिले हैं।
लखनऊ की विशेष सीबीआई अदालत ने मामले से जुड़े दस्तावेजों, केस डायरी और जांच रिपोर्ट पर सुनवाई के बाद 19 सितंबर 2026 को सीबीआई की फाइनल रिपोर्ट स्वीकार कर ली। अदालत ने माना कि उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर राजा भैया के खिलाफ मुकदमा आगे बढ़ाने का पर्याप्त आधार नहीं है। इसके साथ ही उनके खिलाफ इस मामले में आगे की कार्रवाई समाप्त कर दी गई।हालांकि, अदालत का यह आदेश राजा भैया से जुड़े आरोपों और उनकी कथित भूमिका की दोबारा जांच तक सीमित है। हत्याकांड से जुड़े अन्य मामलों और अन्य आरोपियों के खिलाफ चली न्यायिक प्रक्रिया इससे अलग है।
सीओ जियाउल हक हत्याकांड के मूल मामले में सीबीआई की जांच के बाद आरोपियों के खिलाफ अलग से कानूनी कार्रवाई चली। ऐसे में मौजूदा अदालत का आदेश विशेष रूप से राजा भैया से संबंधित मामले और उनकी भूमिका की दोबारा जांच के बाद दाखिल की गई क्लोजर रिपोर्ट पर आधारित है।करीब 13 साल पुराने इस मामले में पहले सीबीआई की क्लोजर रिपोर्ट, फिर उसके खिलाफ आपत्ति, अदालतों में चली कानूनी लड़ाई और सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के बाद दोबारा जांच हुई। अब विशेष सीबीआई अदालत द्वारा दूसरी क्लोजर रिपोर्ट स्वीकार किए जाने के बाद राजा भैया को इस मामले में बड़ी कानूनी राहत मिली है।
