जौनपुर के पूर्व सांसद धनंजय सिंह एक बार फिर अपने दबदबे और सियासी रसूख को लेकर चर्चा में आ गए हैं। हाल ही में वह गोंडा के नंदिनी नगर स्थित नंदिनी निकेतन पहुंचे, जहां बीजेपी के कद्दावर नेता और पूर्व सांसद बृजभूषण शरण सिंह के कार्यक्रम में उनकी मौजूदगी ने सियासी हलकों में हलचल मचा दी।
इस दौरान की तस्वीरें और वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रही हैं। वायरल वीडियो में बृजभूषण शरण सिंह मंच तक धनंजय सिंह का हाथ पकड़कर ले जाते नजर आ रहे हैं, जबकि कैसरगंज से बीजेपी सांसद और बृजभूषण के बेटे करण भूषण सिंह धनंजय सिंह के पैर छूते दिखाई दे रहे हैं। मंच पर पहुंचने के बाद धनंजय सिंह ने व्यासपीठ को प्रणाम किया और सद्गुरु रितेश्वर जी महाराज से आशीर्वाद लिया।
हालांकि कार्यक्रम के बाद माहौल उस वक्त बदल गया, जब धनंजय सिंह मीडिया के सवालों से रूबरू हुए। पत्रकारों ने समाजवादी पार्टी अध्यक्ष अखिलेश यादव द्वारा लगाए गए कोडिन कफ सिरप मामले के आरोपों को लेकर सवाल कर दिया। सवाल सुनते ही धनंजय सिंह नाराज हो गए और गुस्से में “चलो, आगे बढ़ो” कहते हुए वहां से निकलने लगे। इसी दौरान उनके साथ मौजूद बाउंसरों ने पत्रकारों को पीछे धकेल दिया।
इस पूरे घटनाक्रम का वीडियो भी सोशल मीडिया पर वायरल हो गया। वीडियो सामने आने के बाद धनंजय सिंह सोशल मीडिया पर तीखी आलोचना के घेरे में आ गए। कई यूजर्स ने इसे पत्रकारों के सवालों से बचने की कोशिश बताया, तो कुछ ने सत्ता के दबाव में सवाल न पूछे जाने की मानसिकता पर तंज कसा। अखिलेश यादव का नाम सुनते ही धनंजय सिंह के बदले तेवरों को लेकर भी सोशल मीडिया पर लगातार प्रतिक्रियाएं आ रही हैं।
दरअसल पूरा विवाद कोडिन युक्त कफ सिरप की तस्करी से जुड़े मामले से जुड़ा है। इस केस में आरोपी आलोक प्रताप सिंह, शुभम जयसवाल और अमित सिंह टाटा के साथ धनंजय सिंह की तस्वीरें सामने आने के बाद उन पर भी सवाल उठने लगे। अखिलेश यादव ने कई मंचों से इशारों में धनंजय सिंह पर निशाना साधते हुए उन्हें “जौनपुर का कोडिन भैया” तक कह दिया था। वहीं धनंजय सिंह ने पहले ही इन आरोपों पर सफाई दी है। उन्होंने स्वीकार किया था कि बरखास्त सिपाही आलोक प्रताप सिंह को वह पहले से जानते हैं और शुभम जायसवाल से उनकी मुलाकात भी आलोक के जरिए हुई थी।
तीसरे आरोपी अमित सिंह टाटा से मुलाकात को भी उन्होंने स्वीकार किया, लेकिन यह स्पष्ट किया कि वकील होने के नाते कई लोगों से मिलना-जुलना स्वाभाविक है। उनका कहना था कि किसी के साथ जान-पहचान या तस्वीर होने का मतलब यह नहीं कि वह अपराध में शामिल है। बृजभूषण शरण सिंह ने भी इस मामले में धनंजय सिंह का परोक्ष रूप से समर्थन करते हुए कहा था कि केवल तस्वीरों के आधार पर किसी को आरोपी ठहराना सही नहीं है। इस पूरे घटनाक्रम के बाद एक बार फिर पूर्वांचल की राजनीति में दबदबा, रिश्ते और आरोप-प्रत्यारोप सुर्खियों में आ गए हैं।





