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जेल से बाहर आते ही दहाड़े अनिल मिश्रा ! दे डाली बड़ी चेतावनी !

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देखो–देखो कौन आया शेर आया, शेर आया! जय जय श्रीराम हर हर महादेव! ये नारे किसी चुनावी रैली के नहीं थे, बल्कि मध्य प्रदेश की सड़कों पर उतरे उस सियासी तूफान के थे, जो जेल के फाटक खुलते ही फूट पड़ा। हजारों गाड़ियों का काफिला, भगवा झंडे, जोशीले समर्थक और बीच में एडवोकेट अनिल मिश्रा।

जेल से बाहर आते ही साफ संदेश था अनिल मिश्रा टूटे नहीं हैं, झुके नहीं हैं और पीछे हटने वाले नहीं हैं। डॉ. भीमराव अंबेडकर के पोस्टर जलाने के आरोप में बीते दिनों अनिल मिश्रा की गिरफ्तारी ने प्रदेश की राजनीति में भूचाल ला दिया था। मुरैना से हुई इस गिरफ्तारी को लेकर सवाल पहले दिन से उठ रहे थे। अब मध्य प्रदेश हाईकोर्ट की ग्वालियर खंडपीठ ने इस मामले में बड़ा फैसला सुनाते हुए अनिल मिश्रा को जमानत दे दी है।

अंबेडकर विवाद में एडवोकेट अनिल मिश्रा को जमानत, हाई कोर्ट की पुलिस को फटकार

कोर्ट ने अपने आदेश में साफ कहा कि अनिल मिश्रा की गिरफ्तारी अवैध थी,पुलिस ने गिरफ्तारी प्रक्रिया में गंभीर गलतियां कीं इस मामले में FIR बनती ही नहीं थी यानी अदालत ने सीधे-सीधे पुलिस कार्रवाई पर सवाल खड़े कर दिए। जेल से रिहा होते ही अनिल मिश्रा के स्वागत में हजारों समर्थक सड़कों पर उतर आए। लंबा काफिला, नारेबाज़ी और जोश से भरी भीड़ यह बताने के लिए काफी थी कि यह सिर्फ रिहाई नहीं, बल्कि एक सियासी ताकत का प्रदर्शन था। भीड़ का साफ संदेश था “अनिल मिश्रा न डरे हैं, न दबे हैं।

” जेल से बाहर आते ही अनिल मिश्रा ने मीडिया से दो टूक कहा “मुरैना से मेरी जिस तरह अवैध गिरफ्तारी की गई, उसे कोर्ट ने गलत माना है। मेरे साथ नाइंसाफी हुई, लेकिन मैं टूटा नहीं। आगे की लड़ाई भी इसी तरह लड़ता रहूंगा।”उन्होंने अपने समर्थकों का धन्यवाद करते हुए कहा कि “आपके हौसले और जोश की वजह से आज अनिल मिश्रा आपके सामने खड़ा है।”उनके शब्दों और तेवरों से साफ था न दबाव है, न डर।

अनिल मिश्रा के हालिया बयानों ने पहले ही राजनीतिक हलकों में आग लगा रखी है।अंबेडकर, संविधान और आरक्षण को लेकर उनके पुराने बयान देशभर में सुर्खियां बन चुके हैं। संविधान अंबेडकर ने नहीं, बी.एन. राव ने लिखा” इस बयान ने जबरदस्त बवाल मचाया आरक्षण पर उनका साफ रुख आरक्षण जाति के नाम पर नहीं, व्यक्ति के आधार पर होना चाहिए हर जाति में गरीब होता है, लेकिन डीएम के बेटे को आरक्षण क्यों? जिसने पांच पीढ़ियों तक आरक्षण का लाभ लिया, उसे फिर क्यों मिले? इन बयानों के चलते वह चंद्रशेखर आज़ाद और कई दलित संगठनों के निशाने पर रहे हैं, लेकिन जेल से बाहर आने के बाद उनके तेवर बता रहे हैं कि टकराव से वह पीछे हटने वाले नहीं हैं। अनिल मिश्रा ने साफ कहा कि उनकी लड़ाई किसी एक वर्ग के खिलाफ नहीं, बल्कि सर्व समाज के हक की लड़ाई है। उनका अंदाज़, समर्थकों की भीड़ और हाईकोर्ट का फैसला सब मिलकर यह इशारा कर रहे हैं कि यह मामला अब सिर्फ कानून तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि राजनीति के बड़े मैदान में उतर चुका है।

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