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गोरखपुर महोत्सव कलाकारों और शिल्पकारों के लिए बना बड़ा मंच: मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ

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मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने मशहूर गोरखपुर महोत्सव के औपचारिक समापन समारोह को संबोधित करते हुए कहा कि यह महोत्सव आज केवल एक सांस्कृतिक आयोजन नहीं, बल्कि कलाकारों, शिल्पकारों और स्थानीय उत्पादों के लिए एक सशक्त मंच बन चुका है। उन्होंने कहा कि ऐसे आयोजन प्रदेश की सांस्कृतिक विरासत को संजोने के साथ-साथ रोजगार और आत्मनिर्भरता को भी बढ़ावा देते है

गोरखपुर महोत्सव का शुभारंभ रविवार को प्रदेश सरकार के पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री जयवीर सिंह द्वारा किया गया था, जबकि 13 जनवरी (मंगलवार) को आयोजित समापन समारोह में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का सानिध्य प्राप्त हुआ।

11 से 17 जनवरी तक चलेगा महोत्सव

गोरखपुर महोत्सव का आयोजन 11 जनवरी से 17 जनवरी 2026 तक गोरखपुर स्थित चंपा देवी पार्क में किया जा रहा है। हालांकि, महोत्सव के प्रमुख सांस्कृतिक और आधिकारिक कार्यक्रम 13 जनवरी तक संपन्न हो गए, लेकिन प्रदर्शनी, मेले और स्टॉल्स 17 जनवरी तक आम जनता के लिए खुले रहेंगे।
विकास, कला और संस्कृति का आईना बना महोत्सवइस वर्ष का गोरखपुर महोत्सव विकास, कला और संस्कृति का जीवंत प्रतिबिंब बनकर सामने आया। महोत्सव के अंतर्गत—

विशेष शिल्प मेला
पुस्तक मेला
कृषि प्रदर्शनी
उद्यान प्रदर्शनी
विज्ञान प्रदर्शनी
का आयोजन किया गया।

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इसके साथ ही विभिन्न प्रकार के फूड स्टॉल्स भी लगाए गए, जहां पारंपरिक व्यंजनों की खुशबू ने लोगों को आकर्षित किया। स्थानीय उत्पादों के साथ-साथ देश के विभिन्न राज्यों से आए शिल्पकारों की दुकानें महोत्सव की शान बनीं। हस्तशिल्प, हथकरघा, मिट्टी और लकड़ी से बने उत्पादों ने लोगों का खास ध्यान खींचा।

2017 के बाद बदली गोरखपुर की तस्वीर

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि वर्ष 2017 के बाद से गोरखपुर ने प्रगति की नई उड़ान भरी है। कभी पिछड़ेपन के लिए पहचाने जाने वाले इस जिले ने आज विकास के कई नए आयाम स्थापित किए हैं।
गोरखपुर को—

शानदार इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट
औद्योगिक विकास
बेहतर सड़क, रेल और एयर कनेक्टिविटी
खाद कारखाना, एम्स, रीजनल मेडिकल रिसर्च सेंटर
आयुष विश्वविद्यालय, चिड़ियाघर, जटायु संरक्षण केंद्र
सैनिक स्कूल, वॉटर स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स
जैसी कई महत्वपूर्ण परियोजनाएं मिली हैं।

संस्कृति के साथ रोजगार को भी मिला बढ़ावा

मुख्यमंत्री ने कहा कि विकास और रोजगार के साथ-साथ गोरखपुर की कला और संस्कृति भी लगातार समृद्ध हो रही है। गोरखपुर महोत्सव जैसे आयोजनों से स्थानीय कलाकारों और शिल्पकारों को पहचान मिल रही है और उनकी आजीविका को मजबूती मिल रही है।गोरखपुर महोत्सव आज न केवल एक उत्सव, बल्कि नए गोरखपुर की पहचान बन चुका है—जहां परंपरा और प्रगति एक साथ आगे बढ़ रही हैं।

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