उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ स्थित स्टेट डिजास्टर रिलीफ फोर्स (SDRF) मुख्यालय से एक ऐसा मामला सामने आया है, जिसने प्रशासनिक गलियारों से लेकर सोशल मीडिया तक हलचल मचा दी है। मामला किसी बड़े अनुशासन उल्लंघन का नहीं, बल्कि सरकारी परिसर में लगे अमरूद के पेड़ से एक फल तोड़कर खाने का है—लेकिन इस पर हुई कार्रवाई और सिपाही का जवाब चर्चा का विषय बन गया है।
क्या है पूरा मामला?
जानकारी के अनुसार, एसडीआरएफ मुख्यालय के कमांड हाउस परिसर में तैनात एक गार्ड ने ड्यूटी के दौरान परिसर में लगे अमरूद के पेड़ से फल तोड़कर खा लिया। जब यह बात अधिकारियों के संज्ञान में आई तो इसे अनुशासनहीनता मानते हुए संबंधित सिपाही को कारण बताओ नोटिस जारी कर दिया गया।
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नोटिस में स्पष्ट किया गया कि सरकारी परिसर में बिना अनुमति फल तोड़ना विभागीय नियमों के विरुद्ध है। साथ ही सिपाही से यह भी पूछा गया कि उसने न तो इस घटना को रोका और न ही इसकी सूचना वरिष्ठ अधिकारियों को क्यों दी। अधिकारियों ने इसे कर्तव्य के प्रति लापरवाही और गैरजिम्मेदारी की श्रेणी में रखते हुए लिखित स्पष्टीकरण मांगा।
नोटिस में क्या कहा गया
नोटिस के अनुसार, सिपाही की ड्यूटी 4 से 7 जनवरी के बीच कमांड हाउस गार्ड में लगी थी। इसी अवधि में अमरूद तोड़ने की घटना सामने आई। नोटिस में कहा गया कि यह आचरण विभागीय नियमों के विपरीत है और यदि जवाब संतोषजनक नहीं पाया गया तो विभागीय कार्रवाई की जा सकती है।
सिपाही का जवाब जिसने सबको चौंकायानोटिस के जवाब में सिपाही ने जो स्पष्टीकरण दिया, उसने अधिकारियों को भी हैरान कर दिया।
सिपाही ने अपने लिखित जवाब में कहा कि
5 जनवरी की रात स्पेशल खाने में परोसे गए पनीर की गुणवत्ता ठीक नहीं थी, जिसके कारण उसके पेट में तेज दर्द होने लगा।
उसने आगे लिखा कि उसने यूट्यूब पर पेट दर्द का घरेलू इलाज देखा, जिसमें अमरूद खाने की सलाह दी गई थी। ड्यूटी के चलते छुट्टी न मिलने और डॉक्टर से परामर्श न कर पाने की स्थिति में उसने मजबूरी में अमरूद तोड़कर खा लिया।
सिपाही ने यह भी स्पष्ट किया कि यह उसकी पहली गलती है और भविष्य में इस तरह की गलती दोबारा नहीं होगी। साथ ही उसने अधिकारियों से इस घटना के लिए क्षमा याचना भी की।
सोशल मीडिया पर छिड़ी बहस
कमांडेंट द्वारा जारी नोटिस और सिपाही के जवाब के सामने आने के बाद यह मामला सोशल मीडिया पर वायरल हो गया। लोग इसे लेकर अलग-अलग प्रतिक्रियाएं दे रहे हैं।
कुछ यूजर्स इसे नियमों का सख्त पालन बता रहे हैं, तो वहीं कई लोग सिपाही की मजबूरी को समझते हुए प्रशासनिक संवेदनशीलता की मांग कर रहे हैं।
विभागीय सूत्रों के अनुसार, सिपाही का जवाब उच्चाधिकारियों के स्तर पर विचाराधीन है। कमांडेंट की ओर से यह स्पष्ट किया गया है कि यदि जवाब संतोषजनक नहीं पाया गया तो आगे की कार्रवाई की जाएगी।
यह मामला एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर रहा है कि अनुशासन और मानवीय परिस्थितियों के बीच संतुलन कैसे बनाया जाए—खासकर तब, जब मामला सिर्फ एक अमरूद का हो, लेकिन बहस व्यवस्था और संवेदनशीलता तक पहुंच जाए।


