डीएम खीरी की पाठशाला से घर-घर पहुंचेगा ज्ञान, 9 हजार बेटियों को मिला पढ़ाई का संबल
लखनऊ। उत्तर प्रदेश में “बेटी बचाओ–बेटी पढ़ाओ” को सिर्फ नारा नहीं, ज़मीन पर उतरता हुआ विजन बनाने की दिशा में लखीमपुर खीरी से एक प्रेरणादायक पहल सामने आई है। जिले की बेटियों की शिक्षा को नई उड़ान देने के लिए जिला प्रशासन ने ऐसा मॉडल पेश किया है, जो आने वाले समय में पूरे प्रदेश के लिए उदाहरण बन सकता है।
जिलाधिकारी दुर्गा शक्ति नागपाल के नेतृत्व में शुरू की गई ‘डीएम खीरी की पाठशाला’ न केवल स्कूल शिक्षा को मजबूत करेगी, बल्कि घर को भी बेटियों की अपनी पाठशाला में बदलने का माध्यम बनेगी। इस अभिनव पहल के तहत हजारों बेटियों को पढ़ाई के लिए जरूरी संसाधन देकर यह संदेश दिया गया है कि बेटियों की शिक्षा सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है।
डीएम खीरी की पाठशाला का भव्य आगाज़
जिले में शुरू हुई इस अनूठी पहल के पहले चरण में परिषदीय और कस्तूरबा गांधी आवासीय बालिका विद्यालयों की करीब 9,000 छात्राओं को विशेष रूप से तैयार की गई ‘विद्यादायिनी पोटली’ सौंपी गई। इस कार्यक्रम में प्रशासन के साथ जनप्रतिनिधियों की सक्रिय भागीदारी देखने को मिली।

क्या है ‘विद्यादायिनी पोटली’?
‘विद्यादायिनी पोटली’ बेटियों के लिए सिर्फ एक उपहार नहीं, बल्कि उनके भविष्य की नींव है। इसमें शामिल हैं—
व्हाइट बोर्ड कम स्टडी टेबल
मार्कर और डस्टर
ताकि बेटियां स्कूल के साथ-साथ घर पर भी एक बेहतर पढ़ाई का माहौल तैयार कर सकें।

पढ़ाई अब स्कूल तक सीमित नहीं
जिलाधिकारी दुर्गा शक्ति नागपाल ने स्पष्ट किया कि इस पहल का उद्देश्य बेटियों की शिक्षा को चारदीवारी से बाहर निकालकर उनके घर तक पहुंचाना है।
उन्होंने कहा कि जब बेटियां घर में भी नियमित अध्ययन करेंगी, तो न सिर्फ उनका आत्मविश्वास बढ़ेगा, बल्कि पूरे परिवार और समाज में शिक्षा का वातावरण बनेगा।
पहले चरण में 9 हजार बेटियां शामिल
पहले चरण में योजना का लाभ—
परिषदीय विद्यालयों की कक्षा 6, 7 और 8 की टॉपर छात्राओं
‘वाल ऑफ ड्रीम्स’ में चयनित मेधावी छात्राओं
कस्तूरबा गांधी आवासीय बालिका विद्यालयों में पढ़ने वाली छात्राओं
को दिया गया है।
इन सभी के लिए करीब 19.80 लाख रुपये की लागत से ‘विद्यादायिनी पोटली’ तैयार कराई गई।

जनप्रतिनिधियों की सक्रिय भागीदारी
इस मेगा इवेंट में क्षेत्रीय विधायकों और जनप्रतिनिधियों ने भी छात्राओं को पोटली वितरित कर उनका उत्साह बढ़ाया। जनप्रतिनिधियों ने इस पहल को बेटियों के भविष्य में निवेश बताते हुए जिला प्रशासन की सराहना की।
वाल ऑफ ड्रीम्स बना आकर्षण का केंद्र
कार्यक्रम में तैयार किया गया ‘वाल ऑफ ड्रीम्स’ बेटियों के सपनों का आईना बना। छात्राओं ने अपने भविष्य के लक्ष्य—डॉक्टर, इंजीनियर, अफसर, शिक्षक बनने के सपनों को रंग-बिरंगे पोस्टरों के माध्यम से प्रस्तुत किया, जिसने सभी का ध्यान खींचा।
शिक्षा से सशक्तिकरण की मजबूत नींव
‘डीएम खीरी की पाठशाला’ यह साबित करती है कि जब प्रशासनिक इच्छाशक्ति और सरकारी विजन एक साथ चलते हैं, तो बदलाव सिर्फ योजनाओं में नहीं, ज़िंदगी में दिखता है। यह पहल न केवल बेटियों की पढ़ाई को मजबूती देगी, बल्कि उन्हें आत्मनिर्भर और आत्मविश्वासी भविष्य की ओर ले जाएगी।





