दिल्ली हाई कोर्ट में एक जनहित याचिका (PIL) दायर की गई है। जिसमें यह मांग की गई है कि जब तक बांग्लादेश में हिन्दुओं के खिलाफ हिंसा बंद नहीं हो जाती, देश को सभी क्रिकेट से जुड़ी प्रतियोगिताओं से प्रतिबंधित किया जाए। कोर्ट इस पर बुधवार को सुनवाई करेगा।
बांग्लादेश में हिन्दुओं के खिलाफ हो रही हिंसा और अत्याचार रुकने का नाम नहीं ले रही हैं। पड़ोसी देश में हिन्दुओं पर हो रहे अत्याचार को लेकर भारत में भारी आक्रोश की स्थिति है। देश भर में इसको लेकर विरोध प्रदर्शन भी किए गए। इस बीच दिल्ली हाई कोर्ट में एक जनहित याचिका (PIL) दायर की गई है, जिसमें देश में हिंदू समुदाय के खिलाफ हिंसा का हवाला देते हुए बांग्लादेश को सभी क्रिकेट कॉम्पिटिशन से बैन करने की मांग की गई है।
याचिका के मुताबिक, जब तक हिंदू कम्युनिटी के खिलाफ हिंसा बंद नहीं हो जाती, बांग्लादेश को किसी भी क्रिकेट प्रतियोगिता में हिस्सा लेने की इजाजत नहीं दी जानी चाहिए। दिल्ली हाई कोर्ट के चीफ जस्टिस देवेंद्र कुमार उपाध्याय और जस्टिस तेजस करिया की डिवीजन बेंच बुधवार (21 जनवरी) को इस मामले की सुनवाई करेगी।
देवयानी सिंह ने दायर की याचिका –
जानकारी के मुताबिक यह याचिका देवयानी सिंह नाम की एक महिला ने वकील पुलकित प्रकाश के जरिए से दायर की है। इस याचिका में बांग्लादेश क्रिकेट टीम को अगले महीने शुरू होने वाले ICC मेन्स T20 वर्ल्ड कप में हिस्सा लेने से रोकने के लिए भी निर्देश देने की मांग की गई है। इस बार वर्ल्ड कप की मेजबानी भारत और श्रीलंका संयुक्त रूप से कर रहे हैं।
याचिकाकर्ता ने PIL में बोर्ड ऑफ़ कंट्रोल फ़ॉर क्रिकेट इन इंडिया (BCCI), इंटरनेशनल क्रिकेट काउंसिल (ICC), श्रीलंका क्रिकेट बोर्ड और बांग्लादेश क्रिकेट बोर्ड को रेस्पोंडेंट बनाया है।
हिंदू समुदाय को बनाया जा रहा निशाना –
याचिका के मुताबिक बांग्लादेश में हिन्दुओं की आबादी लगभग 8% है, और पिछले कुछ महीनों में इस समुदाय पर हमले लगातार बढ़ते जा रहे हैं, दिसंबर 2025 में, एक हिंदू युवक की ईश निंदा के आरोप में पीट-पीटकर हत्या कर दी गई थी। इसके बाद कई ऐसी घटनाएं सामन आईं।
भारत सरकार ने इन घटनाओं पर कड़ी प्रतिक्रिया दी है और कहा है कि ये घटनाएं अल्पसंख्यकों के खिलाफ लगातार दुश्मनी को दर्शाती हैं। हालांकि, बांग्लादेश ने कहा है कि ये छिटपुट आपराधिक घटनाएं हैं।





