भारत और अमेरिका के बीच रक्षा क्षेत्र में एक बड़ी उपलब्धि सामने आई है। दोनों देशों ने फाइटर जेट इंजन के संयुक्त उत्पादन (को-प्रोडक्शन) को लेकर महत्वपूर्ण प्रगति हासिल की है। इस समझौते में अमेरिका की GE एयरोस्पेस और भारत की हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (HAL) तकनीकी मुद्दों पर सहमत हो गए हैं। उम्मीद है कि इस साल के अंत तक इस पर अंतिम समझौता भी हो जाएगा।
यह डील भारतीय वायु सेना (IAF) के लिए काफी अहम मानी जा रही है। दरअसल, वायु सेना लंबे समय से अपने फाइटर जेट स्क्वाड्रन की घटती संख्या को बढ़ाने और अपनी ताकत मजबूत करने की कोशिश कर रही है। चीन और पाकिस्तान जैसे पड़ोसी देशों के साथ संभावित दो मोर्चों की चुनौती को देखते हुए यह कदम और भी जरूरी हो जाता है।
LCA को मिलती है ताकत
इस समझौते के तहत GE एयरोस्पेस ने IAF के साथ एक और कॉन्ट्रैक्ट साइन करने की बात कही है। यह कॉन्ट्रैक्ट F404 इंजन के लिए एक डिपो सुविधा (मेंटेनेंस सेंटर) स्थापित करने से जुड़ा है। ये इंजन भारत के लाइट कॉम्बैट एयरक्राफ्ट (LCA) को शक्ति देते हैं, जो भविष्य में वायु सेना की रीढ़ साबित हो सकते हैं।
Also Read- हापुड़ में भीषण सड़क हादसा, ट्रक पलटने से 6 की मौत, कई घायल
इसके अलावा, दोनों कंपनियों के बीच F414 इंजन के लिए भी टेक्नोलॉजी ट्रांसफर को लेकर सहमति बनी है। यह प्रक्रिया काफी जटिल मानी जाती है, लेकिन अब इसके सबसे कठिन चरण को पूरा कर लिया गया है। GE एयरोस्पेस की वाइस प्रेसिडेंट रीटा फ्लेहर्टी के मुताबिक, तकनीकी बातचीत का सबसे मुश्किल हिस्सा अब पूरा हो चुका है।
भारत को मिलेगा बड़ा फायदा
इस समझौते को ‘ऐतिहासिक’ बताया जा रहा है क्योंकि इससे भारत को आधुनिक इंजन बनाने की तकनीक मिलेगी। इससे देश के “आत्मनिर्भर भारत” मिशन को भी मजबूती मिलेगी। GE एयरोस्पेस भारत को मैन्युफैक्चरिंग टेक्नोलॉजी देगा, हालांकि इस इंजन से जुड़े करीब 80% बौद्धिक संपदा अधिकार (IPR) कंपनी के पास ही रहेंगे, जबकि बाकी हिस्से पर अन्य अमेरिकी सप्लायर्स का अधिकार होगा।
इन इंजनों की खास बात यह है कि ये बेहद शक्तिशाली और आधुनिक हैं, लेकिन इन्हें बनाना और संभालना काफी जटिल होता है। दुनिया में बहुत कम कंपनियां ही ऐसी तकनीक रखती हैं, और अब भारत भी इस सूची में शामिल होने की दिशा में बढ़ रहा है।
भारत में बनेगा इंजन प्लांट
इस समझौते के तहत HAL भारत में एक मैन्युफैक्चरिंग यूनिट स्थापित करेगा। माना जा रहा है कि कॉन्ट्रैक्ट साइन होने के दो साल के भीतर यह यूनिट काम करना शुरू कर देगी। यहां कुल 99 F414 इंजन बनाए जाएंगे, जो LCA Tejas Mk2 फाइटर जेट्स में इस्तेमाल होंगे।भारतीय वायु सेना ने करीब 120 से 130 Tejas Mk2 जेट्स की मांग रखी है, ऐसे में यह डील उनकी जरूरतों को पूरा करने में बड़ी भूमिका निभाएगी।
आगे की प्रक्रिया
अब GE और HAL के बीच कमर्शियल बातचीत का अगला चरण शुरू होगा। हालांकि, हाल के महीनों में ग्लोबल स्तर पर कंपोनेंट्स की कीमतें बढ़ने के कारण इस प्रक्रिया में थोड़ा समय लग सकता है। फिर भी, उम्मीद है कि इस वित्तीय वर्ष के भीतर अंतिम समझौते पर हस्ताक्षर हो जाएंगे।
कुल मिलाकर, यह समझौता न सिर्फ भारत की रक्षा क्षमता को मजबूत करेगा, बल्कि देश को रक्षा उत्पादन के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम साबित होगा।



