आम आदमी पार्टी, उत्तर प्रदेश की छात्र विंग (एएसएपी) के प्रदेश महासचिव अनित रावत ने सोमवार को लखनऊ स्थित पार्टी के प्रदेश मुख्यालय में आयोजित प्रेस वार्ता में भाजपा सरकार पर सीधा और तीखा हमला बोलते हुए आरोप लगाया कि प्रदेश की सरकारी शिक्षा व्यवस्था को जानबूझकर बर्बाद कर निजी स्कूलों के सिंडिकेट को खुला संरक्षण दिया जा रहा है। उन्होंने कहा कि आज उत्तर प्रदेश में शिक्षा सेवा नहीं बल्कि मुनाफे का धंधा बन चुकी है, जहां अभिभावकों की मजबूरी का फायदा उठाकर संगठित तरीके से लूट की जा रही है और सरकार इस पूरे खेल की साझेदार बनी हुई है।
अनित रावत ने कहा कि आज अखबारों की कटिंग इस लूट का सबसे बड़ा सबूत हैं, जहां ₹50 की किताब स्कूल का टैग लगते ही ₹250 में बेची जा रही है। उन्होंने कहा कि यह कोई एक दिन की खबर नहीं है, बल्कि पूरे महीने अखबारों में इस तरह की खबरें लगातार सामने आती रही हैं, जो पूरे सिस्टम में फैली कमीशनखोरी और भ्रष्टाचार को उजागर करती हैं।
उन्होंने कहा कि स्कूल ड्रेस के नाम पर भी अभिभावकों से खुली लूट हो रही है, जहां ₹2500 से ₹5000 तक की कीमत वसूली जा रही है। यह केवल लखनऊ की समस्या नहीं है, बल्कि नोएडा से लेकर लखनऊ और लखनऊ से लेकर महाराजगंज तक पूरे प्रदेश में निजी स्कूलों की दादागिरी चरम पर है। नोएडा जैसे शहरों में 40% तक फीस बढ़ाई जा रही है, जिससे आम परिवार पूरी तरह टूट चुका है।
अनित रावत ने कहा कि ₹15 हजार से ₹20 हजार कमाने वाले अभिभावक अपने बच्चों की फीस भरने के लिए अपना पेट काटने को मजबूर हैं, लेकिन इसके बावजूद निजी स्कूलों की लूट रुकने का नाम नहीं ले रही। हर साल पाठ्यक्रम बदलकर कॉपी, किताब और ड्रेस के नाम पर जबरन वसूली की जाती है। उन्होंने गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि यह पैसा केवल स्कूलों तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका हिस्सा भाजपा सरकार के मंत्रियों और शिक्षा विभाग के अधिकारियों तक पहुंचाया जाता है।
उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि केआर मंगलम जैसे स्कूल तीन महीने की फीस ₹33,000 तक वसूल रहे हैं, जबकि एमिटी इंटरनेशनल जैसे स्कूलों की फीस इतनी अधिक है कि एक निम्न वर्ग के परिवार की सालाना आय भी उसके सामने छोटी पड़ जाती है। उन्होंने कहा कि अब स्कूलों को इस तरह चलाया जा रहा है जैसे होटल हों, जहां एसी और नॉन-एसी कमरों के आधार पर फीस तय की जा रही है, जो शिक्षा व्यवस्था का मजाक है।
अनित रावत ने कहा कि एक समय था जब शिक्षा सेवा होती थी और गरीब परिवारों के बच्चे पढ़-लिखकर आगे बढ़ने का सपना देखते थे, लेकिन आज भाजपा सरकार की नीतियों ने शिक्षा को पूरी तरह बाजार के हवाले कर दिया है, जिससे पूरा प्रदेश शिक्षा के बाजारीकरण की मार झेल रहा है।
आम आदमी पार्टी की छात्र विंग (एएसएपी) ने प्रदेश सरकार से मांग की है कि उत्तर प्रदेश फीस अधिनियम 2018 को पूरे प्रदेश में सख्ती से लागू किया जाए। अधिनियम के अनुसार फीस में केवल महंगाई दर के अनुसार सीमित वृद्धि की अनुमति होनी चाहिए और एडमिशन व मेंटेनेंस फीस के नाम पर किसी प्रकार की वसूली पूरी तरह बंद की जाए। साथ ही 2018 से लेकर अब तक निजी स्कूलों द्वारा की गई अतिरिक्त वसूली को अभिभावकों को वापस किया जाए।
प्रेस वार्ता के अंत में अनित रावत ने चेतावनी देते हुए कहा कि यदि सरकार ने जल्द कोई ठोस कदम नहीं उठाया, तो आम आदमी पार्टी की छात्र विंग (एएसएपी) आगामी 16 अप्रैल को प्रदेश में शिक्षा के निजीकरण, निजी स्कूलों की धनउगाही और मनमानी फीस वृद्धि के खिलाफ बड़ा धरना-प्रदर्शन करेगी। उन्होंने कहा कि यह आंदोलन केवल फीस का नहीं बल्कि प्रदेश के बच्चों के भविष्य और उनके अधिकारों की लड़ाई है, जिसे हर हाल में लड़ा और जीता जाएगा।





