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विजयोत्सव के मंच से ताकत का संदेश, बृजभूषण-धनंजय की मौजूदगी बनी चर्चा का केंद्र

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बाबू वीर कुंवर सिंह की जयंती पर आयोजित विजयोत्सव कार्यक्रम सिर्फ एक सांस्कृतिक आयोजन नहीं रहा, बल्कि राजनीतिक संदेशों का बड़ा मंच भी बन गया। गोंडा से लेकर जौनपुर तक इस कार्यक्रम की चर्चा तेज है, खासकर मंच पर बृजभूषण शरण सिंह और धनंजय सिंह की मौजूदगी को लेकर।

विजयोत्सव कार्यक्रम में कैसरगंज से पूर्व भाजपा सांसद बृजभूषण शरण सिंह ने राजपूत नेतृत्व को लेकर बड़ा बयान दिया। उन्होंने कहा कि देश की राजनीति में राजपूत समाज की भूमिका ऐतिहासिक रही है और आगे भी बनी रहेगी। बाबू वीर कुंवर सिंह का उदाहरण देते हुए उन्होंने कहा कि देश में “राजपूतों का दबदबा था, है और आगे भी कायम रहेगा।”

वहीं, धनंजय सिंह ने अपने संबोधन में 1857 के प्रथम स्वतंत्रता संग्राम में बाबू वीर कुंवर सिंह के योगदान को याद किया। उन्होंने कहा कि 80 वर्ष की उम्र में भी कुंवर सिंह ने अंग्रेजी हुकूमत के खिलाफ लंबी और निर्णायक लड़ाई लड़ी।

धनंजय सिंह ने बताया कि युद्ध के दौरान गंभीर रूप से घायल होने पर कुंवर सिंह को अपना एक हाथ गंवाना पड़ा, लेकिन उनका यह बलिदान देशभर के युवाओं के लिए प्रेरणा बन गया। उन्होंने कहा कि कुंवर सिंह का साहस आज भी देशभक्ति और संघर्ष की मिसाल है।

विजयोत्सव कार्यक्रम में एक तरफ जहां स्वतंत्रता संग्राम के महानायक को श्रद्धांजलि दी गई, वहीं दूसरी ओर नेताओं के बयानों ने राजनीतिक हलकों में नई चर्चा छेड़ दी है।

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