उत्तर प्रदेश के Mau से बड़ी कानूनी खबर सामने आई है। राज्य सरकार में कैबिनेट मंत्री Om Prakash Rajbhar के खिलाफ अदालत ने गैरजमानती वारंट (NBW) जारी कर दिया है। यह कार्रवाई 2019 के लोकसभा चुनाव के दौरान दिए गए एक कथित विवादित बयान से जुड़े मामले में की गई है।
अदालत का सख्त रुख, हाजिरी से अनुपस्थित रहने पर कार्रवाई
जानकारी के मुताबिक, मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट (MP-MLA) डॉ. कृष्ण प्रताप सिंह की अदालत ने Om Prakash Rajbhar के खिलाफ यह गैरजमानती वारंट जारी किया है। अदालत ने उन्हें 16 मई 2026 को पेश होने का निर्देश दिया है।बताया जा रहा है कि इस मामले में आरोप तय होने की प्रक्रिया चल रही थी, लेकिन कई बार बुलाए जाने के बावजूद राजभर अदालत में उपस्थित नहीं हुए। इसी के चलते कोर्ट ने सख्त रुख अपनाते हुए NBW जारी कर दिया।
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क्या है पूरा मामला?
यह मामला साल 2019 के लोकसभा चुनाव के दौरान Ratanpura बाजार में आयोजित एक चुनावी सभा से जुड़ा है, जो Haldharpur थाना क्षेत्र में आता है।शिकायत के अनुसार, 17 मई 2019 को एक जनसभा को संबोधित करते हुए Om Prakash Rajbhar ने कथित तौर पर भाजपा नेताओं के खिलाफ आपत्तिजनक भाषा का इस्तेमाल किया और कार्यकर्ताओं को उन्हें अपमानित करने के लिए उकसाया।उस समय उड़नदस्ता टीम में तैनात एसआई रुद्रभान पांडेय की तहरीर पर इस मामले में एफआईआर दर्ज की गई थी। आरोप है कि यह बयान आदर्श चुनाव आचार संहिता और लोकतांत्रिक मर्यादाओं का उल्लंघन करता है।
पुलिस ने दाखिल की चार्जशीट
मामले की जांच के बाद पुलिस ने अदालत में चार्जशीट दाखिल कर दी थी। इसके बाद कोर्ट में आरोप तय किए जाने की प्रक्रिया शुरू हुई। हालांकि, सुनवाई के दौरान आरोपी के अनुपस्थित रहने से मामला लंबित होता गया।अदालत ने इसे गंभीरता से लेते हुए अब गैरजमानती वारंट जारी कर दिया है, जिससे मामले में तेजी आने की संभावना है।
क्या होता है गैरजमानती वारंट (NBW)?
गैरजमानती वारंट एक सख्त कानूनी प्रक्रिया होती है। इसमें अदालत पुलिस को निर्देश देती है कि आरोपी को गिरफ्तार कर सीधे कोर्ट में पेश किया जाए।इस स्थिति में आरोपी को तुरंत जमानत मिलने का अधिकार नहीं होता। पहले उसे अदालत के सामने पेश किया जाता है, जहां आगे की कानूनी प्रक्रिया तय होती है।
आगे क्या होगा?
अब Om Prakash Rajbhar को 16 मई को अदालत में पेश होना होगा। यदि वह तय तारीख पर उपस्थित नहीं होते हैं, तो पुलिस उन्हें गिरफ्तार कर कोर्ट में पेश कर सकती है।इस मामले ने राजनीतिक और कानूनी हलकों में हलचल बढ़ा दी है। अब सभी की नजरें अगली सुनवाई पर टिकी हैं, जहां यह तय होगा कि आगे की कार्रवाई किस दिशा में जाती है।






