तमिलनाडु की राजनीति में एक ऐतिहासिक बदलाव देखने को मिला है। Vijay ने आधिकारिक तौर पर राज्य के नए मुख्यमंत्री के रूप में शपथ ले ली है। Tamilaga Vettri Kazhagam (TVK) प्रमुख विजय ने तमिल भाषा में पद और गोपनीयता की शपथ ग्रहण की। चेन्नई में आयोजित इस भव्य समारोह में कई राष्ट्रीय और क्षेत्रीय नेताओं की मौजूदगी ने कार्यक्रम को और खास बना दिया।
शपथ ग्रहण समारोह में Rahul Gandhi समेत कई वरिष्ठ नेता मौजूद रहे। इस दौरान एक दिलचस्प पल भी देखने को मिला, जब विजय शपथ की निर्धारित पंक्तियों से आगे कुछ अतिरिक्त शब्द बोलने लगे। इस पर तमिलनाडु के राज्यपाल Rajendra Arlekar ने उन्हें बीच में रोकते हुए कहा कि वे वही पढ़ें जो आधिकारिक तौर पर लिखित रूप में दिया गया है। यह क्षण समारोह का सबसे चर्चित हिस्सा बन गया।
विजय के साथ उनकी कैबिनेट के 9 अन्य मंत्रियों ने भी शपथ ली। इनमें एन आनंद, आधव अर्जुन, डॉ. केजी अरुणराज, के.ए. सेंगोट्टैयन, पी. वेंकटरमणन, आर. निर्मलकुमार, राजमोहन, डॉ. टीके प्रभु और सेल्वी एस. कीर्तना शामिल हैं। खास बात यह रही कि सभी मंत्री TVK पार्टी से ही चुने गए विधायक हैं। विजय ने अपने पहले मंत्रिमंडल में किसी सहयोगी दल के नेता को शामिल नहीं किया है, जिससे साफ संकेत मिलता है कि पार्टी फिलहाल अपनी स्वतंत्र राजनीतिक पहचान को मजबूत करना चाहती है।
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सरकार गठन से पहले विजय ने राज्यपाल को TVK के साथ-साथ Indian National Congress, Communist Party of India, Communist Party of India (Marxist), Viduthalai Chiruthaigal Katchi (VCK) और Indian Union Muslim League (IUML) के कुल 121 विधायकों के समर्थन पत्र सौंपे थे। इसके बाद राज्यपाल ने उन्हें सरकार बनाने के लिए आमंत्रित किया।
TVK की यह सफलता इसलिए भी खास मानी जा रही है क्योंकि पार्टी को बने अभी केवल दो साल ही हुए हैं। अपने पहले ही विधानसभा चुनाव में पार्टी ने 234 में से 108 सीटों पर जीत दर्ज कर तमिलनाडु की राजनीति में बड़ा उलटफेर कर दिया। सहयोगी दलों के समर्थन के साथ विजय के नेतृत्व वाले गठबंधन के पास कुल 121 विधायक हो गए, जबकि बहुमत के लिए 118 सीटों की आवश्यकता थी।
इस जीत के साथ राज्य की राजनीति में एक नया अध्याय शुरू हो गया है। साल 1967 के बाद पहली बार तमिलनाडु में किसी गैर-द्रविड़ दल का मुख्यमंत्री बना है। इससे पहले 1963 से 1967 तक M. Bhaktavatsalam कांग्रेस सरकार में मुख्यमंत्री रहे थे। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि विजय की जीत केवल सत्ता परिवर्तन नहीं, बल्कि राज्य की बदलती राजनीतिक सोच और नई पीढ़ी की उम्मीदों का प्रतीक भी है।






