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मिशन कर्मयोगी से बदल रही यूपी की प्रशासनिक तस्वीर

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मिशन कर्मयोगी

उत्तर प्रदेश में योगी सरकार अब सिर्फ शिक्षा व्यवस्था ही नहीं बल्कि सरकारी कर्मचारियों और अधिकारियों की कार्यकुशलता, डिजिटल दक्षता और प्रशासनिक क्षमता को भी तेजी से मजबूत कर रही है। मिशन कर्मयोगी प्रशिक्षण कार्यक्रम के तहत यूपी ने बड़ी उपलब्धि हासिल की है।

आंकड़ों के मुताबिक प्रदेश के 5 लाख 41 हजार से ज्यादा कर्मचारियों ने चार से अधिक प्रशिक्षण मॉड्यूल सफलतापूर्वक पूरे कर लिए हैं, जो कुल पंजीकृत कर्मचारियों का करीब 88 प्रतिशत है। सरकार का फोकस प्रशासन को तकनीक आधारित, जवाबदेह और परिणाममुखी बनाने पर है। मिशन कर्मयोगी के जरिए कर्मचारियों को डिजिटल वर्किंग सिस्टम, ई-गवर्नेंस और आधुनिक प्रशासनिक तकनीकों की ट्रेनिंग दी जा रही है। इसका सीधा असर योजनाओं के बेहतर क्रियान्वयन, मॉनिटरिंग सिस्टम और सेवा वितरण पर देखने को मिल रहा है।

प्रदेश में अब तक 6 लाख 14 हजार से ज्यादा कर्मचारियों ने पोर्टल पर रजिस्ट्रेशन कराया है। इनमें से अधिकांश कर्मचारी लगातार प्रशिक्षण मॉड्यूल पूरे कर रहे हैं। खास बात यह है कि प्रदेश में केवल 0.50 प्रतिशत कर्मचारी ही ऐसे हैं जिनकी लर्निंग शून्य है। कई जिलों ने इस मिशन में शानदार प्रदर्शन किया है। बागपत, संतकबीरनगर, मथुरा, बस्ती, बाराबंकी और श्रावस्ती जैसे जिलों में 90 प्रतिशत से ज्यादा कर्मचारियों ने चार से अधिक कोर्स पूरे कर लिए हैं।

वहीं लखनऊ, वाराणसी और प्रयागराज जैसे बड़े जिलों में भी तेजी से प्रशिक्षण कार्य पूरा किया जा रहा है। योगी सरकार पहले ही ई-ऑफिस, डिजिटल मॉनिटरिंग और ऑनलाइन ट्रेनिंग सिस्टम को बढ़ावा दे रही है। अब मिशन कर्मयोगी के जरिए प्रशासनिक कार्यसंस्कृति को और ज्यादा आधुनिक, पारदर्शी और परिणाम आधारित बनाने की दिशा में बड़ा कदम उठाया गया है। यानी आने वाले समय में यूपी की प्रशासनिक व्यवस्था पूरी तरह डिजिटल और स्मार्ट मॉडल की ओर बढ़ती नजर आ रही है।

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