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राहुल गांधी कल कोटद्वार में ‘मोहम्मद दीपक’ से करेंगे मुलाकात, जिम की सदस्यता लेने की भी चर्चा

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लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी 4 जून को उत्तराखंड दौरे पर रहेंगे, अपने इस दौरे के दौरान वह पौड़ी गढ़वाल जिले के कोटद्वार पहुंचकर चर्चित युवक दीपक कुमार उर्फ ‘मोहम्मद दीपक’ से मुलाकात करेंगे, सूत्रों के मुताबिक राहुल गांधी का यह कार्यक्रम पूरी तरह गैर-राजनीतिक रखा गया है और इसके लिए करीब एक घंटे का समय निर्धारित किया गया है।

जिम की सदस्यता लेने की भी तैयारी

जानकारी के अनुसार राहुल गांधी कोटद्वार में दीपक के जिम का दौरा करेंगे और वहां की सदस्यता भी ले सकते हैं, हालांकि कांग्रेस की ओर से इस संबंध में आधिकारिक घोषणा नहीं की गई है, लेकिन स्थानीय स्तर पर इस मुलाकात को लेकर तैयारियां तेज हो गई हैं।

कौन हैं ‘मोहम्मद दीपक’?

दीपक कुमार इसी वर्ष जनवरी में अचानक चर्चा में आए थे, कोटद्वार में एक दुकान पर हुए विवाद के दौरान उन्होंने एक बुजुर्ग दुकानदार का बचाव किया था, इसी दौरान उन्होंने अपना नाम “मोहम्मद दीपक” बताया था, जिसके बाद यह मामला सोशल मीडिया और विभिन्न समाचार माध्यमों में व्यापक रूप से चर्चा का विषय बन गया था।

सैनिक संवाद कार्यक्रम में भी होंगे शामिल

कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और पूर्व मंत्री सुरेंद्र सिंह नेगी ने राहुल गांधी के उत्तराखंड दौरे की पुष्टि की है, उन्होंने बताया कि राहुल गांधी पौड़ी स्थित कंडोलिया पार्क में आयोजित सैनिक संवाद सम्मेलन में भी भाग लेंगे और पूर्व सैनिकों व उनके परिवारों से संवाद करेंगे।

भाजपा ने उठाए सवाल

राहुल गांधी की प्रस्तावित मुलाकात को लेकर भारतीय जनता पार्टी ने सवाल खड़े किए हैं, भाजपा के कोटद्वार जिलाध्यक्ष ऐश्वर्या राज गौरव नौटियाल ने आरोप लगाया कि कांग्रेस नेतृत्व अपने पुराने और समर्पित कार्यकर्ताओं की बजाय ऐसे व्यक्ति से मिलने को प्राथमिकता दे रहा है, जिसका नाम हाल के विवादों में सामने आया था, भाजपा ने इसे तुष्टीकरण की राजनीति से जोड़ते हुए कांग्रेस पर निशाना साधा है, वहीं कांग्रेस नेताओं का कहना है कि यह मुलाकात सामाजिक संवाद और व्यक्तिगत स्तर पर की जा रही है, जिसका राजनीति से कोई संबंध नहीं है।

राजनीतिक हलकों में बढ़ी चर्चा

राहुल गांधी और ‘मोहम्मद दीपक’ की प्रस्तावित मुलाकात को लेकर राजनीतिक गलियारों में चर्चाएं तेज हो गई हैं, अब सभी की निगाहें 4 जून को होने वाली इस मुलाकात पर टिकी हैं और यह देखने पर भी कि इसके राजनीतिक और सामाजिक मायने क्या निकलते हैं।