गाजियाबाद के 17 वर्षीय सूर्य प्रताप चौहान हत्याकांड का जिक्र करते हुए बागेश्वर धाम के पीठाधीश्वर पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री ने इसे “फ्रेंड जिहाद” बताया। उनके बयान पर कांग्रेस ने कड़ी प्रतिक्रिया दी है। उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद के खोड़ा इलाके में 17 वर्षीय सूर्य प्रताप चौहान की हत्या के मामले को लेकर बागेश्वर धाम के पीठाधीश्वर पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री का बयान चर्चा में आ गया है। उन्होंने इस घटना का जिक्र करते हुए कहा कि “लव जिहाद” के बाद अब “फ्रेंड जिहाद” जैसी प्रवृत्ति सामने आई है। गुजरात में एक कार्यक्रम के दौरान धीरेंद्र शास्त्री ने कहा कि देश में पहले थूक जिहाद, मूत्र जिहाद, लैंड जिहाद और लव जिहाद जैसे शब्द सामने आए और अब गाजियाबाद के सूर्य प्रताप चौहान की घटना को देखते हुए “फ्रेंड जिहाद” की बात हो रही है। उन्होंने दक्षिण गुजरात में धर्मांतरण और लव जिहाद को लेकर भी चिंता जताई और कहा कि जल्द ही वहां “घर वापसी” कार्यक्रम आयोजित किया जाएगा।
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‘AI के बाद HI की जरूरत’
धीरेंद्र शास्त्री ने कहा कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के दौर में देश को “हिंदुत्व इंटेलिजेंस (HI)” की आवश्यकता है। उनके मुताबिक, समाज में आर्थिक रूप से सक्षम हिंदुओं को जरूरतमंद हिंदुओं का सहयोग करना चाहिए और जातिगत भेदभाव से ऊपर उठकर हिंदू एकता को मजबूत करना चाहिए।
श्रद्धा और अंधश्रद्धा पर भी रखी राय
उन्होंने कहा कि श्रद्धा और अंधश्रद्धा के बीच बहुत बारीक अंतर है। उनका कहना था कि उन्होंने कभी अपनी पूजा की बात नहीं की, बल्कि हनुमान जी की भक्ति और सामूहिक प्रार्थना पर जोर दिया है। उन्होंने कहा कि यदि मंदिर जाना और हनुमान चालीसा का पाठ अंधविश्वास माना जाता है, तो अन्य धार्मिक परंपराओं को भी उसी कसौटी पर देखा जाना चाहिए।
युवाओं से नशे से दूर रहने की अपील
धीरेंद्र शास्त्री ने युवाओं में बढ़ती नशे की प्रवृत्ति पर चिंता जताते हुए कहा कि नशे के आदी होने से बेहतर है कि युवा धार्मिक और सकारात्मक गतिविधियों से जुड़ें। उन्होंने गुजरात समेत पूरे देश में नशे की समस्या को गंभीर बताया।
कांग्रेस ने की आलोचना
धीरेंद्र शास्त्री के “फ्रेंड जिहाद” वाले बयान पर कांग्रेस प्रवक्ता अंशू अवस्थी ने तीखी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ लोग धर्म और संत की वेशभूषा का इस्तेमाल कर राजनीतिक एजेंडा चला रहे हैं। उन्होंने कहा कि गाजियाबाद की घटना दुखद है और दोषियों को कड़ी सजा मिलनी चाहिए, लेकिन किसी एक घटना के आधार पर व्यापक धारणा बनाना उचित नहीं है।अंशू अवस्थी ने यह भी कहा कि युवाओं में बढ़ते नशे और बेरोजगारी जैसे मुद्दों पर सरकार और धर्मगुरुओं को अधिक ध्यान देने की जरूरत है। उनके मुताबिक, समाज में नफरत फैलाने वाले एजेंडे को जनता स्वीकार नहीं करेगी।






