विश्व पर्यावरण दिवस और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के जन्मदिन पर हरियाली बढ़ाने के लिए चलाए जा रहे पौधारोपण अभियान पर उत्तर प्रदेश के हापुड़ जिले से एक चौंकाने वाली तस्वीर सामने आई है। पर्यावरण संरक्षण और हरित विकास के बड़े-बड़े दावों के बीच सरकारी धन से खरीदे गए पौधे कूड़े के ढेर में पड़े मिले हैं। इस घटना ने प्रशासनिक कार्यप्रणाली, पौधारोपण अभियान की निगरानी और सरकारी संसाधनों के उपयोग पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
हापुड़ में कूड़े के ढेर में मिले सरकारी पौधे

पूरा मामला हापुड़ जिले के बहादुरगढ़ थाना क्षेत्र के लुहारी गांव का है। यहां पौधारोपण के लिए भेजे गए सरकारी पौधे खेतों, सड़कों और सार्वजनिक स्थलों पर लगाए जाने के बजाय कूड़े के ढेर में फेंके हुए पाए गए। स्थानीय लोगों द्वारा सामने लाई गई तस्वीरों ने पूरे मामले को चर्चा का विषय बना दिया।बताया जा रहा है कि इन पौधों की कीमत करीब 1.95 लाख रुपये है। जिन पौधों को पर्यावरण संरक्षण के उद्देश्य से रोपित किया जाना था, वे लावारिस हालत में पड़े मिले। इससे सरकारी योजनाओं की जमीनी हकीकत उजागर हो गई है।
प्रशासन हरकत में, SDM ने किया निरीक्षण
मामले की जानकारी मिलने के बाद गढ़मुक्तेश्वर के एसडीएम श्रीराम यादव मौके पर पहुंचे और पूरे मामले का निरीक्षण किया। जांच के दौरान उन्होंने इसे गंभीर लापरवाही माना और कहा कि जिन पौधों का रोपण होना था, उन्हें जिम्मेदार अधिकारियों और कर्मचारियों की लापरवाही के चलते एक स्थान पर छोड़ दिया गया।एसडीएम ने तत्काल मामले की जांच के आदेश देते हुए ग्राम पंचायत अधिकारी और ग्राम प्रधान की भूमिका की जांच करने के निर्देश दिए हैं।
पौधारोपण अभियान पर उठे बड़े सवाल
इस घटना के बाद कई महत्वपूर्ण सवाल खड़े हो गए हैं—
- क्या पौधारोपण अभियान केवल कागजों तक सीमित रह गया है?
- क्या सरकारी आंकड़ों को बेहतर दिखाने के लिए सिर्फ रिकॉर्ड में पौधे लगाए गए?
- पौधों की निगरानी और रोपण की जिम्मेदारी किसकी थी?
- जब पौधे कूड़े में फेंके जा रहे थे, तब संबंधित अधिकारी क्या कर रहे थे?
- क्या सरकारी धन का दुरुपयोग हुआ है?
1.95 लाख पौधे लगाने के दावों पर सवाल
जिले में बड़े स्तर पर पौधारोपण के दावे किए गए थे। प्रशासनिक रिकॉर्ड के अनुसार लाखों पौधे लगाने का लक्ष्य तय किया गया था। लेकिन लुहारी गांव की यह तस्वीरें इस बात की ओर इशारा करती हैं कि जमीनी स्तर पर निगरानी और जवाबदेही में गंभीर कमी रही है।विशेषज्ञों का मानना है कि यदि पौधों को समय पर रोपा नहीं जाता, तो उनकी उपयोगिता समाप्त हो जाती है और सरकारी धन भी व्यर्थ चला जाता है।
ग्राम प्रधान और पंचायत अधिकारियों पर कार्रवाई की तैयारी
प्रारंभिक जांच में ग्राम पंचायत स्तर पर लापरवाही की आशंका जताई जा रही है। प्रशासन ने संकेत दिए हैं कि जांच रिपोर्ट के आधार पर जिम्मेदार अधिकारियों और कर्मचारियों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।हालांकि, स्थानीय लोगों का कहना है कि केवल ग्राम प्रधान और सचिव पर कार्रवाई पर्याप्त नहीं होगी, बल्कि पूरे पौधारोपण अभियान की निगरानी करने वाले उच्च अधिकारियों की जिम्मेदारी भी तय होनी चाहिए।
पर्यावरण संरक्षण के दावों पर लगा सवालिया निशान
विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर जहां एक ओर हरियाली बढ़ाने और जलवायु परिवर्तन से लड़ने की बातें की जा रही थीं, वहीं दूसरी ओर सरकारी पौधों का कूड़े में मिलना प्रशासनिक दावों की पोल खोलता नजर आया।अब सभी की नजर प्रशासनिक जांच पर टिकी है। यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि जांच के बाद जिम्मेदार लोगों पर क्या कार्रवाई होती है और क्या भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए कोई ठोस कदम उठाए जाते हैं।






