अयोध्या स्थित राम मंदिर की दान पेटी में कथित गड़बड़ी और चढ़ावे को लेकर उठे विवाद ने अब राजनीतिक रंग ले लिया है। समाजवादी पार्टी इस मुद्दे को लेकर भारतीय जनता पार्टी और प्रदेश सरकार पर लगातार हमलावर है। पार्टी इसे आगामी 2027 विधानसभा चुनाव में बड़ा राजनीतिक मुद्दा बनाने की रणनीति पर काम कर रही है।
इसी क्रम में राजधानी लखनऊ स्थित समाजवादी पार्टी के प्रदेश कार्यालय के बाहर लगाए गए पोस्टर चर्चा का विषय बन गए हैं। इन पोस्टरों में सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव को भगवान राम की प्रतिमा के साथ दर्शाया गया है। पोस्टर पर लिखा गया है, “27 में आ रहे हैं अखिलेश”, जिसे आगामी विधानसभा चुनाव के संदर्भ में पार्टी के राजनीतिक संदेश के रूप में देखा जा रहा है।
पोस्टरों में राम मंदिर के चढ़ावे से जुड़े कथित विवाद का भी उल्लेख किया गया है। समाजवादी पार्टी का आरोप है कि मंदिर में श्रद्धालुओं द्वारा दिए गए दान और चढ़ावे को लेकर उठे सवालों ने लोगों की आस्था को प्रभावित किया है। पार्टी लगातार इस मामले में पारदर्शी जांच और जवाबदेही की मांग कर रही है।
अखिलेश यादव ने सोशल मीडिया पर साधा निशाना
समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव भी इस मुद्दे को लेकर लगातार सरकार पर निशाना साध रहे हैं। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक पोस्ट में लिखा कि अयोध्या महापापियों के लिए “कुरुक्षेत्र” साबित होगी। उन्होंने दावा किया कि जिस अयोध्या से भाजपा की राजनीति को मजबूती मिली थी, वहीं से उसके राजनीतिक पतन की शुरुआत भी हो सकती है।
अखिलेश यादव ने आरोप लगाया कि चढ़ावे, दान और मंदिर से जुड़े कथित विवादों के बाद अयोध्या आने वाले श्रद्धालुओं की संख्या पर नकारात्मक प्रभाव पड़ा है। उनके अनुसार, इससे स्थानीय व्यापार, पर्यटन और आम लोगों की आय पर भी असर पड़ा है।
स्थानीय लोगों की चिंताओं का किया जिक्र
सपा प्रमुख ने कहा कि सरकार की कथित गलतियों का खामियाजा आम जनता को भुगतना पड़ रहा है। उन्होंने दावा किया कि अयोध्या और आसपास के क्षेत्रों में लोगों के बीच नाराजगी का माहौल है। साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि कुछ स्थानीय लोग जांच प्रक्रिया को लेकर आशंकित हैं और अनावश्यक कार्रवाई की चिंता जता रहे हैं।
SIT जांच पर उठाए सवाल
अखिलेश यादव ने मामले की जांच कर रही विशेष जांच टीम (SIT) की कार्यवाही को लेकर भी सवाल उठाए हैं। उन्होंने मांग की कि जांच की प्रगति के बारे में प्रतिदिन सार्वजनिक जानकारी दी जाए ताकि लोगों के बीच पारदर्शिता बनी रहे।
हालांकि, राज्य सरकार पहले ही स्पष्ट कर चुकी है कि मामले की निष्पक्ष जांच की जा रही है और दोषी पाए जाने पर किसी को भी बख्शा नहीं जाएगा। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने भी कहा है कि SIT जांच पूरी होने के बाद “दूध का दूध और पानी का पानी” हो जाएगा।
राम मंदिर चढ़ावा विवाद को लेकर राजनीतिक बयानबाजी लगातार तेज हो रही है। ऐसे में आने वाले दिनों में यह मुद्दा प्रदेश की राजनीति में और अधिक चर्चा का केंद्र बन सकता है।






