पहले ब्राह्मणों को गालियां, फिर चुनाव आते ही चरण स्पर्श और सम्मान की बातें! लेकिन इस बार मामला उल्टा पड़ता दिख रहा है। यूपी का नाराज ब्राह्मण समाज 2027 में 100 सीटों पर बड़ा खेल करने के मूड में बताया जा रहा है। ऐसे में मायावती ने 20 साल पुराना वही ब्रह्मास्त्र निकाल दिया है, जिसने 2007 में सत्ता का ताज पहनाया था। बसपा सुप्रीमो की इस चाल से बीजेपी और सपा के खेमों में बेचैनी बढ़ने की चर्चा तेज हो गई है।

उत्तर प्रदेश में 2027 विधानसभा चुनाव से पहले ब्राह्मण वोट बैंक को लेकर सियासी जंग तेज होती दिखाई दे रही है। 12 से 15 फीसदी आबादी वाला ब्राह्मण समाज करीब 100 सीटों पर असर रखने वाला माना जाता है और इसी वजह से सभी दल उन्हें साधने में जुटे हैं। इसी बीच बसपा प्रमुख मायावती ने एक बार फिर 2007 वाले सोशल इंजीनियरिंग फॉर्मूले को सामने रखकर बड़ा सियासी संदेश दे दिया है। मायावती ने अपने बयान में कहा कि जब से बसपा ने अपर कास्ट, खासकर ब्राह्मण समाज को ध्यान में रखकर उम्मीदवारों का चयन शुरू किया है, तब से विरोधी दलों में बेचैनी बढ़ गई है। उन्होंने दावा किया कि 2007 में ब्राह्मण समाज के सहयोग से बसपा ने पूर्ण बहुमत की सरकार बनाई थी और 2027 में भी इतिहास दोहराया जा सकता है। बसपा सुप्रीमो ने कहा कि पार्टी “जिसकी जितनी तैयारी, उसकी उतनी भागीदारी” के आधार पर टिकट दे रही है और ब्राह्मण समाज का हित बसपा में सुरक्षित है। साथ ही उन्होंने 2007 के चर्चित नारे “हाथी नहीं गणेश है, ब्रह्मा विष्णु महेश है” की याद दिलाते हुए साफ संकेत दिया कि बसपा एक बार फिर उसी सोशल इंजीनियरिंग के सहारे चुनावी मैदान में उतरने की तैयारी कर रही है। अब बड़ा सवाल यही है कि क्या मायावती का 20 साल पुराना ब्राह्मण कार्ड 2027 में फिर कोई बड़ा सियासी चमत्कार करेगा, या बीजेपी और समाजवादी पार्टी इस चुनौती का नया जवाब तैयार कर चुकी हैं? फिलहाल, बसपा सुप्रीमो के इस दांव ने यूपी की राजनीति में नई हलचल जरूर पैदा कर दी है।






