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राम मंदिर चढ़ावा विवाद पर भड़कीं देवोलीना भट्टाचार्जी, बोलीं- “श्रेय लेने वाले जवाबदेही से पीछे क्यों हटते हैं?”

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अयोध्या के राम मंदिर में श्रद्धालुओं द्वारा दिए गए चढ़ावे में कथित अनियमितताओं और हेराफेरी के आरोपों ने देशभर में बहस छेड़ दी है। इस मामले में अब मनोरंजन जगत की प्रतिक्रियाएं भी सामने आने लगी हैं। टीवी अभिनेत्री देवोलीना भट्टाचार्जी ने सोशल मीडिया के माध्यम से इस पूरे प्रकरण पर अपनी नाराजगी जाहिर करते हुए जवाबदेही और पारदर्शिता को लेकर कई सवाल उठाए हैं।

अपने बेबाक बयानों के लिए पहचानी जाने वाली देवोलीना ने एक लंबी पोस्ट साझा करते हुए कहा कि जब राम मंदिर निर्माण का श्रेय लेने की बात आती है तो राजनीतिक नेतृत्व सबसे आगे दिखाई देता है, लेकिन जब किसी प्रकार की गड़बड़ी या भ्रष्टाचार के आरोप सामने आते हैं तो जिम्मेदारी तय करने से बचने की कोशिश की जाती है।

“श्रेय के साथ जिम्मेदारी भी जरूरी”

देवोलीना ने अपनी पोस्ट में लिखा कि राम मंदिर निर्माण को लेकर राजनीतिक स्तर पर व्यापक प्रचार किया गया और इसे चुनावी अभियानों का प्रमुख मुद्दा बनाया गया। उन्होंने सवाल उठाया कि यदि किसी परियोजना की सफलता का श्रेय लिया जा सकता है, तो उससे जुड़े विवादों और आरोपों की जिम्मेदारी भी स्वीकार की जानी चाहिए।

अभिनेत्री ने कहा कि जब चोरी, कुप्रबंधन या वित्तीय अनियमितताओं जैसे आरोप सामने आते हैं, तब जवाबदेही तय होना उतना ही जरूरी है जितना उपलब्धियों का जश्न मनाना। उन्होंने बिना किसी व्यक्ति या दल का नाम लिए यह संकेत दिया कि सार्वजनिक विश्वास से जुड़े मामलों में पारदर्शिता सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए।

श्रद्धालुओं की आस्था से जुड़ा है मामला

देवोलीना ने अपने पोस्ट में कहा कि राम मंदिर केवल एक धार्मिक स्थल नहीं बल्कि करोड़ों लोगों की आस्था और विश्वास का केंद्र है। ऐसे में मंदिर को मिलने वाले दान और चढ़ावे का पूरी पारदर्शिता के साथ प्रबंधन होना चाहिए।

उन्होंने कहा कि धार्मिक और सार्वजनिक संस्थानों में वित्तीय जवाबदेही सुनिश्चित करना आवश्यक है ताकि लोगों का भरोसा कायम रहे। अभिनेत्री ने यह भी कहा कि किसी भी पक्ष को केवल उपलब्धियों का श्रेय लेने तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि विवाद की स्थिति में भी जिम्मेदारी निभानी चाहिए।

देश को व्यक्ति से ऊपर रखने की अपील

अपने संदेश के अंत में देवोलीना ने नागरिकों से देश और उसके मूल्यों को प्राथमिकता देने की अपील की। उन्होंने कहा कि लोगों की निष्ठा किसी व्यक्ति, नेता या राजनीतिक दल के बजाय देश और उसके सिद्धांतों के प्रति होनी चाहिए। उनका मानना है कि जब नागरिक सही और गलत का फैसला निष्पक्ष होकर करेंगे, तभी लोकतांत्रिक जवाबदेही मजबूत होगी।

क्या है राम मंदिर चढ़ावा विवाद?

राम मंदिर चढ़ावा मामले की शुरुआत उस समय हुई जब मंदिर ट्रस्ट से जुड़े एक पूर्व कर्मचारी ने दान राशि के प्रबंधन में अनियमितताओं के आरोप लगाए। शिकायत के बाद जांच शुरू हुई और मामले में कई लोगों को गिरफ्तार किया गया। जांच एजेंसियों ने अब तक लाखों रुपये की बरामदगी का दावा किया है।

उत्तर प्रदेश सरकार ने मामले की जांच के लिए विशेष जांच दल (SIT) का गठन किया है। जांच के दौरान चढ़ावा प्रबंधन प्रणाली में कुछ खामियों की ओर भी संकेत मिले हैं। इस बीच ट्रस्ट के तत्कालीन महासचिव चंपत राय ने नैतिक आधार पर अपना इस्तीफा सौंप दिया है। मामले को लेकर राजनीतिक और सामाजिक स्तर पर भी लगातार प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं।

फिलहाल पूरे देश की नजर जांच एजेंसियों की रिपोर्ट और आगे होने वाली कार्रवाई पर टिकी हुई है, क्योंकि यह मामला करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था और विश्वास से सीधे तौर पर जुड़ा हुआ है।