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शहीदों के खून से सींची मानिकपुर की माटी को कब मिलेगा सम्मान? खंडहर बन रहा आजादी का मूक गवाह

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मानिकपुर (चित्रकूट)। स्वतंत्रता संग्राम के इतिहास को अपने भीतर समेटे चित्रकूट के मानिकपुर स्थित ब्रिटिशकालीन पुराने थाना भवन को अब आधिकारिक रूप से ‘शहीद स्थल’ घोषित किए जाने की मांग जोर पकड़ने लगी है। क्षेत्र के युवा समाजसेवी एवं यूथ आइकॉन अनुज हनुमत ने इस ऐतिहासिक धरोहर के संरक्षण, जीर्णोद्धार और राष्ट्रीय स्मारक के रूप में विकसित किए जाने की मांग को लेकर पुलिस अधीक्षक अरुण कुमार सिंह को विस्तृत ज्ञापन सौंपा।ज्ञापन में कहा गया है कि यह भवन केवल एक पुरानी इमारत नहीं, बल्कि 1857 के प्रथम स्वतंत्रता संग्राम और स्वाधीनता आंदोलन का जीवंत साक्षी है, जो आज उपेक्षा के कारण धीरे-धीरे खंडहर में तब्दील होता जा रहा है।

100 वर्ष से अधिक पुराना है मानिकपुर का ऐतिहासिक थाना भवन

राजस्व अभिलेखों (1906-1909) के अनुसार यह भवन ‘थाना मानिकपुर’ के रूप में दर्ज है। ऐतिहासिक तथ्यों और स्थानीय अभिलेखों के आधार पर माना जाता है कि इसका अस्तित्व 1905 से पहले तथा 1857 के प्रथम स्वतंत्रता संग्राम के समय से है।इतिहासकारों और स्थानीय जानकारों के अनुसार यह भवन अंग्रेजी शासन के दौरान प्रशासनिक और दमनकारी गतिविधियों का प्रमुख केंद्र हुआ करता था।

स्वतंत्रता सेनानियों की शहादत का मूक गवाह

स्थानीय जनश्रुतियों और ऐतिहासिक संस्मरणों के अनुसार अंग्रेजी शासन के दौरान स्वतंत्रता सेनानियों, किसानों, मजदूरों और युवाओं को इसी परिसर में लाकर अमानवीय यातनाएं दी जाती थीं।बताया जाता है कि परिसर में स्थित पुराने पेड़ और कुएं के आसपास कई क्रांतिकारियों को फांसी दी गई थी। हालांकि इन घटनाओं के विस्तृत आधिकारिक अभिलेख सीमित हैं, लेकिन स्थानीय स्तर पर यह स्थान आज भी शहीदों की स्मृतियों से जुड़ा माना जाता है।

उपेक्षा के कारण खंडहर बनती जा रही राष्ट्रीय धरोहर

युवा समाजसेवी अनुज हनुमत ने कहा कि विभागीय उदासीनता और संरक्षण के अभाव में यह ऐतिहासिक धरोहर तेजी से नष्ट हो रही है।उन्होंने बताया कि भवन के विशाल लोहे के ऐतिहासिक दरवाजे, बहुमूल्य सामग्री और कई पुराने अभिलेख या तो गायब हो चुके हैं या नष्ट हो गए हैं। यदि समय रहते संरक्षण नहीं किया गया तो इतिहास का यह महत्वपूर्ण अध्याय हमेशा के लिए मिट सकता है।

ASI की टीम कर चुकी है प्रारंभिक सर्वेक्षण

ज्ञापन में यह भी उल्लेख किया गया है कि भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) की टीम पूर्व में इस स्थल का प्रारंभिक सर्वेक्षण कर चुकी है।समाजसेवियों का मानना है कि यह तथ्य इस भवन के ऐतिहासिक महत्व को और अधिक मजबूत करता है तथा इसे संरक्षित धरोहर घोषित करने की दिशा में महत्वपूर्ण आधार बन सकता है।

ज्ञापन में उठाई गई प्रमुख मांगें

युवा समाजसेवी अनुज हनुमत ने पुलिस अधीक्षक को सौंपे गए ज्ञापन में निम्न प्रमुख मांगें रखीं—

1. पुरातत्व विभाग के संरक्षण में लिया जाए भवन

ब्रिटिशकालीन थाना भवन को पुरातत्व विभाग के संरक्षण में लेकर इसका वैज्ञानिक तरीके से जीर्णोद्धार कराया जाए।

2. ‘शहीद स्थल’ का दर्जा मिले

1857 के स्वतंत्रता संग्राम और आजादी की लड़ाई में इसके ऐतिहासिक महत्व को देखते हुए इसे आधिकारिक रूप से ‘शहीद स्थल’ घोषित किया जाए।

3. स्मारक एवं संग्रहालय का निर्माण

यहां एक भव्य स्मारक, सूचना पट्ट एवं संग्रहालय बनाया जाए, जिसमें स्वतंत्रता सेनानियों और स्थानीय वीरों के संघर्ष एवं बलिदान का इतिहास प्रदर्शित किया जाए।

4. ऐतिहासिक सामग्रियों की बरामदगी

भवन से गायब हुई ऐतिहासिक वस्तुओं, अभिलेखों एवं अन्य बहुमूल्य सामग्रियों की जांच कर उन्हें बरामद करने का प्रयास किया जाए।

SP ने दिया उचित कार्रवाई का आश्वासन

पुलिस अधीक्षक अरुण कुमार सिंह ने ज्ञापन प्राप्त करने के बाद मामले के ऐतिहासिक महत्व को गंभीरता से लेते हुए उचित स्तर पर आवश्यक कार्रवाई कराने का आश्वासन दिया।इस अवसर पर क्षेत्र के अनेक गणमान्य नागरिक, युवा एवं सामाजिक कार्यकर्ता भी उपस्थित रहे, जिन्होंने इस पहल का समर्थन करते हुए ऐतिहासिक धरोहर को संरक्षित किए जाने की मांग दोहराई।

इतिहास संरक्षण के साथ पर्यटन को भी मिलेगा बढ़ावा

विशेषज्ञों का मानना है कि यदि मानिकपुर के इस ऐतिहासिक थाना भवन को संरक्षित कर ‘शहीद स्थल’ के रूप में विकसित किया जाता है, तो इससे न केवल स्वतंत्रता संग्राम की अमूल्य विरासत सुरक्षित होगी, बल्कि चित्रकूट जिले में ऐतिहासिक और विरासत पर्यटन (Heritage Tourism) को भी नई पहचान मिलेगी। साथ ही नई पीढ़ी को देश के स्वतंत्रता संग्राम और स्थानीय इतिहास से जुड़ने का अवसर प्राप्त होगा।

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