13 साल की उम्र में संघ से जुड़ा एक साधारण किसान का बेटा… जिसके हाथ की लकीरें देखकर दशकों पहले ही कह दिया गया था—”यह लड़का एक दिन देश का बहुत बड़ा नेता बनेगा”… और वक्त ने साबित कर दिया कि वह भविष्यवाणी गलत नहीं थी। भारतीय राजनीति में कुछ नाम ऐसे होते हैं जो सिर्फ पदों से नहीं, बल्कि अपने व्यक्तित्व, सादगी और संगठन के प्रति समर्पण से इतिहास लिखते हैं। ऐसा ही एक नाम है राजनाथ सिंह। करीब पांच दशक से राजनीति में सक्रिय राजनाथ सिंह आज अपना जन्मदिन मना रहे हैं। इस मौके पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ समेत भाजपा के तमाम बड़े नेताओं ने उन्हें शुभकामनाएं दी हैं।

राजनाथ सिंह उन चुनिंदा नेताओं में गिने जाते हैं जिन्होंने राजनीति के लगभग हर बड़े पड़ाव को पार किया। उत्तर प्रदेश जैसे विशाल राज्य के मुख्यमंत्री बने, देश के गृह मंत्री बने और आज भारत के रक्षा मंत्री के रूप में जिम्मेदारी निभा रहे हैं। राजनीतिक गलियारों में यह चर्चा भी समय-समय पर होती रही है कि भविष्य में वे देश के राष्ट्रपति पद तक भी पहुंच सकते हैं। लेकिन इस बुलंदी की शुरुआत किसी बड़े राजनीतिक परिवार से नहीं, बल्कि उत्तर प्रदेश के चंदौली जिले की चकिया तहसील के छोटे से गांव बाभोरा से हुई थी। किसान परिवार में जन्मे राजनाथ सिंह ने गांव में शुरुआती पढ़ाई की, फिर गोरखपुर विश्वविद्यालय से भौतिक विज्ञान में स्नातकोत्तर की डिग्री हासिल की। कुछ समय तक उन्होंने अध्यापक और प्राध्यापक के रूप में भी विद्यार्थियों को पढ़ाया।महज 13 साल की उम्र में वे राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ से जुड़ गए और संगठन में वर्षों तक अलग-अलग जिम्मेदारियां निभाईं। बाद में जयप्रकाश नारायण के आंदोलन से प्रभावित होकर सक्रिय राजनीति में आए और जनता पार्टी के साथ अपना राजनीतिक सफर शुरू किया।

1975 की आपातकाल के दौरान, लोकतंत्र की लड़ाई लड़ने वाले अनेक विपक्षी नेताओं की तरह उन्हें भी जेल जाना पड़ा।इसी जेल में उनकी मुलाकात संघ के वरिष्ठ नेता राम प्रकाश गुप्त से हुई। कहा जाता है कि एक दिन राम प्रकाश गुप्त ने उनकी हथेली देखकर कहा था—”तुम एक दिन बहुत बड़े नेता बनोगे।” उस समय शायद किसी ने इस बात को गंभीरता से नहीं लिया होगा, लेकिन समय बीतता गया और यह भविष्यवाणी एक-एक करके सच होती चली गई।करीब ढाई दशक बाद, वर्ष 2000 में भाजपा ने उत्तर प्रदेश की राजनीति में बड़ा फैसला लेते हुए राम प्रकाश गुप्त की जगह राजनाथ सिंह को मुख्यमंत्री बनाया। इसके बाद उन्होंने कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा।1977 में जनता पार्टी के टिकट पर पहला चुनाव जीतने से शुरू हुआ सफर भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष, उत्तर प्रदेश भाजपा अध्यक्ष, केंद्रीय मंत्री, गृह मंत्री और आज रक्षा मंत्री तक पहुंच चुका है। राजनाथ सिंह का राजनीतिक जीवन इस बात का उदाहरण है कि संघर्ष, संगठन और सादगी के दम पर भी भारतीय राजनीति के सर्वोच्च शिखर तक पहुंचा जा सकता है।






