प्रयागराज: माफिया अतीक अहमद, उसके भाई अशरफ उर्फ खालिद अजीम और पत्नी शाइस्ता परवीन के खिलाफ उत्तर प्रदेश प्रशासन ने बड़ी कार्रवाई करते हुए गैंगस्टर एक्ट के तहत करीब 345 करोड़ रुपये मूल्य की 18 चल और अचल संपत्तियां जब्त कर ली हैं। प्रशासन ने इन संपत्तियों की सुरक्षा, रखरखाव और निगरानी सुनिश्चित करने के लिए मुख्य विकास अधिकारी हर्षिका सिंह की अध्यक्षता में एक विशेष समिति का गठन किया है।
प्रयागराज, कौशांबी और लखनऊ की संपत्तियां कार्रवाई के दायरे में
जब्त की गई संपत्तियों में प्रयागराज, कौशांबी और लखनऊ में स्थित मकान, व्यावसायिक और आवासीय भूखंड, कृषि भूमि, बैंक खातों में जमा धनराशि तथा वाहन शामिल हैं। प्रशासन के अनुसार यह कार्रवाई गैंगस्टर एक्ट के तहत की गई है।दस्तावेजों के मुताबिक प्रयागराज के चकिया, करेली, झूंसी, धूमनगंज, कसारी मसारी, देवघाट, सरेयां, रहीमाबाद, अकबरपुर मिर्जापुर और होलागढ़ समेत कई क्षेत्रों की संपत्तियां जब्त की गई हैं। वहीं कौशांबी और लखनऊ के गोमतीनगर व शेखपुर स्थित संपत्तियां भी कार्रवाई के दायरे में आई हैं।
13 बैंक खाते भी किए गए सीज
प्रशासन ने विभिन्न बैंकों में मौजूद 13 बैंक खातों को भी सीज कर दिया है। इन खातों में जमा करोड़ों रुपये की धनराशि को जब्ती कार्रवाई में शामिल किया गया है। इसके अलावा अशरफ उर्फ खालिद अजीम के नाम दर्ज एक वाहन को भी जब्त किया गया है।
होलागढ़ की कृषि भूमि सबसे मूल्यवान
जांच के दौरान सामने आए दस्तावेजों के अनुसार प्रयागराज के होलागढ़ क्षेत्र में स्थित अतीक अहमद की कृषि भूमि सबसे मूल्यवान संपत्ति मानी जा रही है। इस भूमि का अनुमानित बाजार मूल्य 123.28 करोड़ रुपये आंका गया है, जो जब्त की गई सभी संपत्तियों में सबसे अधिक है।
इसके अलावा:
- रहीमाबाद-अकबरपुर क्षेत्र की संपत्तियों का मूल्य लगभग 76 करोड़ रुपये।
- कौशांबी स्थित कृषि भूमि का मूल्य करीब 24 करोड़ रुपये।
- लखनऊ के शेखपुर स्थित भूमि का मूल्य लगभग 30.60 करोड़ रुपये बताया गया है।
इसके अतिरिक्त कई मकानों और भूखंडों की कीमत 4 करोड़ से 10 करोड़ रुपये के बीच आंकी गई है।
समिति करेगी निगरानी और संरक्षण
जिलाधिकारी मनीष कुमार वर्मा ने बताया कि जब्त संपत्तियों के संरक्षण और रखरखाव के लिए गठित समिति में प्रयागराज विकास प्राधिकरण (PDA) के उपाध्यक्ष, एडीएम (एफआर), एडीएम (नजूल) तथा अन्य संबंधित विभागों के वरिष्ठ अधिकारियों को शामिल किया गया है। समिति नियमित निरीक्षण, सुरक्षा व्यवस्था और आवश्यक प्रशासनिक कार्रवाई सुनिश्चित करेगी।
संपत्तियों की जांच जारी
प्रशासन और जांच एजेंसियां अब इन संपत्तियों के स्वामित्व, खरीद के स्रोत, वित्तीय लेनदेन और संबंधित दस्तावेजों की गहन जांच कर रही हैं। अधिकारियों का कहना है कि जांच के निष्कर्षों के आधार पर आगे की कानूनी कार्रवाई भी की जाएगी।उत्तर प्रदेश में माफिया और अपराधियों की अवैध संपत्तियों के खिलाफ चल रहे अभियान के तहत यह अब तक की बड़ी कार्रवाइयों में से एक मानी जा रही है।
