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दिल्ली प्रदर्शन हिंसा: क्या पुलिस फेस रिकग्निशन से प्रदर्शनकारियों का आपराधिक रिकॉर्ड खंगाल रही है? जानिए वायरल दावे की पूरी सच्चाई

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 दिल्ली में हाल ही में हुए CJP (Cockroach Janata Party) से जुड़े प्रदर्शन और उसके बाद हुई हिंसा को लेकर पुलिस की जांच लगातार तेज होती जा रही है। इसी बीच सोशल मीडिया पर एक पोस्ट तेजी से वायरल हो रही है, जिसमें दावा किया जा रहा है कि दिल्ली पुलिस प्रदर्शन में शामिल लोगों के चेहरे स्कैन कर उनके आपराधिक रिकॉर्ड की जांच कर रही है। साथ ही यह भी कहा जा रहा है कि जिन लोगों का पहले से दंगा, उपद्रव या अन्य आपराधिक मामलों में रिकॉर्ड मिला है, उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई शुरू कर दी गई है। इतना ही नहीं, पोस्ट में यह भी दावा किया गया है कि यदि CJP ने ऐसे लोगों का समर्थन किया है तो पार्टी के नेताओं पर भी कार्रवाई हो सकती है।इस वायरल दावे ने सोशल मीडिया पर नई बहस छेड़ दी है। ऐसे में यह जानना जरूरी है कि आखिर इस दावे में कितनी सच्चाई है और पुलिस की जांच किस चरण में पहुंच चुकी है।दिल्ली पुलिस ने जंतर-मंतर और आसपास के इलाकों में लगे हाई-रिजॉल्यूशन CCTV कैमरों, ड्रोन फुटेज और अन्य डिजिटल साक्ष्यों की मदद से प्रदर्शन में शामिल लोगों की पहचान शुरू कर दी है। पुलिस जांच में Facial Recognition System (FRS) यानी फेस रिकग्निशन तकनीक का इस्तेमाल किया जा रहा है।पुलिस अधिकारियों के अनुसार, इस तकनीक की सहायता से हजारों लोगों के चेहरे स्कैन किए गए हैं। इनमें से कई ऐसे लोगों की पहचान हुई है, जिनका नाम पहले भी विभिन्न आपराधिक मामलों में सामने आ चुका है। जांच एजेंसियां अब इन सभी मामलों का रिकॉर्ड खंगाल रही हैं ताकि यह पता लगाया जा सके कि हिंसा में कौन-कौन लोग शामिल थे और उनकी क्या भूमिका रही।

2,500 से अधिक लोगों की पहचान होने का दावा

मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, फेस रिकग्निशन सिस्टम के माध्यम से लगभग 2,500 से अधिक ऐसे लोगों की पहचान की गई है जिनका नाम पहले किसी न किसी पुलिस रिकॉर्ड में दर्ज रहा है।

इनमें कथित रूप से शामिल हैं—

  • हिस्ट्रीशीटर
  • दंगा मामलों के आरोपी
  • मारपीट के मामलों में नामित व्यक्ति
  • सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाने के आरोपी
  • अन्य आपराधिक मामलों से जुड़े लोग

हालांकि, पुलिस का कहना है कि केवल किसी व्यक्ति का पुराना आपराधिक रिकॉर्ड होना यह साबित नहीं करता कि वह इस हिंसा में भी शामिल था। प्रत्येक व्यक्ति की भूमिका अलग-अलग साक्ष्यों के आधार पर जांची जा रही है।

हिंसा के मामले में दर्ज हुईं 10 एफआईआर

दिल्ली पुलिस ने प्रदर्शन के दौरान हुई घटनाओं को लेकर कई मामले दर्ज किए हैं।

जांच में शामिल प्रमुख बिंदु—

  • पुलिस पर हमला
  • सरकारी संपत्ति को नुकसान
  • हिंसा
  • कानून-व्यवस्था भंग करने के आरोप

इन मामलों में अब तक 10 एफआईआर दर्ज की गई हैं। जांच एजेंसियां CCTV फुटेज, वीडियो रिकॉर्डिंग और अन्य डिजिटल साक्ष्यों का विश्लेषण कर रही हैं।

जिन लोगों की पहचान हुई है, उन्हें पूछताछ के लिए बुलाया जा सकता है। यदि पर्याप्त साक्ष्य मिलते हैं, तो कानून के अनुसार आगे की कार्रवाई की जा सकती है।

क्या CJP नेताओं पर होगी कार्रवाई?

सोशल मीडिया पर सबसे अधिक चर्चा इस दावे को लेकर हो रही है कि यदि प्रदर्शन में आपराधिक रिकॉर्ड वाले लोग शामिल पाए गए तो CJP नेताओं पर भी कार्रवाई होगी।

इस दावे की फिलहाल कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।

कानूनी विशेषज्ञों के अनुसार—

  • केवल इस आधार पर कि किसी कार्यक्रम में आपराधिक रिकॉर्ड वाला व्यक्ति मौजूद था, किसी राजनीतिक दल या उसके नेताओं के खिलाफ कार्रवाई नहीं की जा सकती।
  • यदि जांच में यह साबित होता है कि किसी नेता, आयोजक या संगठन ने हिंसा की साजिश रची, लोगों को उकसाया या अपराध में सक्रिय भूमिका निभाई, तभी कानून के तहत कार्रवाई संभव है।
  • किसी भी संगठन को केवल सोशल मीडिया पोस्ट या अनुमान के आधार पर दोषी नहीं ठहराया जा सकता।

CJP ने क्या कहा?

दूसरी ओर CJP ने पुलिस की कार्रवाई पर सवाल उठाए हैं।

पार्टी का कहना है कि—

  • प्रदर्शन के दौरान पुलिस ने आवश्यकता से अधिक बल प्रयोग किया।
  • कई प्रदर्शनकारियों के साथ मारपीट की गई।
  • घायल लोगों के बयान और सबूत एकत्र किए जा रहे हैं।
  • संबंधित पुलिस अधिकारियों के खिलाफ शिकायत दर्ज कराने की तैयारी की जा रही है।
  • इसके लिए एक ऑनलाइन प्लेटफॉर्म शुरू करने की भी बात कही गई है, जहां लोग फोटो और वीडियो अपलोड कर सकेंगे।

इन दावों की जांच और सत्यता का निर्धारण संबंधित जांच एवं कानूनी प्रक्रिया के बाद ही होगा।

सोशल मीडिया पर वायरल दावों से रहें सावधान

बड़े आंदोलनों और राजनीतिक घटनाओं के दौरान सोशल मीडिया पर कई अपुष्ट और भ्रामक दावे तेजी से वायरल हो जाते हैं।

विशेषज्ञों की सलाह है कि—

  • किसी भी वायरल पोस्ट पर तुरंत विश्वास न करें।
  • आधिकारिक पुलिस बयान देखें।
  • विश्वसनीय समाचार स्रोतों से जानकारी की पुष्टि करें।
  • अधूरी जानकारी साझा करने से बचें।

Facial Recognition System (FRS) क्या है?

Facial Recognition System (FRS) एक बायोमेट्रिक तकनीक है जो किसी व्यक्ति के चेहरे की विशेषताओं—जैसे आंखें, नाक, जबड़ा और चेहरे की संरचना—का डिजिटल विश्लेषण करती है।

इसके बाद यह उपलब्ध डेटाबेस से मिलान कर संभावित पहचान बताती है।

हालांकि, केवल FRS के आधार पर किसी व्यक्ति को दोषी नहीं माना जाता। अंतिम कानूनी कार्रवाई के लिए पुलिस को अन्य साक्ष्य, वीडियो, प्रत्यक्षदर्शियों के बयान और जांच के निष्कर्षों पर भी निर्भर रहना पड़ता है।

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