सुल्तानगंज (बिहार): श्रावणी मेला 2026 के शुभारंभ के अवसर पर बिहार सरकार ने बाबा अजगैबीनाथ धाम और सुल्तानगंज के समग्र विकास को लेकर कई महत्वाकांक्षी योजनाओं की घोषणा की है। उद्घाटन समारोह में मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने “हर-हर महादेव” और “बाबा अजगैबीनाथ की जय” के उद्घोष के साथ अपने संबोधन की शुरुआत करते हुए कहा कि सावन केवल आस्था का पर्व नहीं, बल्कि सेवा, समर्पण और सामाजिक एकता का भी प्रतीक है।मुख्यमंत्री ने कहा कि श्रावणी मेले के दौरान देश के विभिन्न राज्यों से लाखों श्रद्धालु सुल्तानगंज पहुंचते हैं और यहां से गंगाजल लेकर बाबा बैद्यनाथ धाम के लिए कांवड़ यात्रा करते हैं। यह यात्रा भारत की सांस्कृतिक एकता और धार्मिक परंपराओं का जीवंत उदाहरण है, जहां जाति, भाषा और क्षेत्र की सीमाएं समाप्त होकर केवल “बोल बम” का जयघोष सुनाई देता है।
अजगैबीनाथ धाम को मिलेगा अंतरराष्ट्रीय पहचान
सम्राट चौधरी ने अपने संबोधन में कहा कि राज्य सरकार का लक्ष्य अजगैबीनाथ धाम को देश ही नहीं, बल्कि विश्व स्तर पर एक प्रमुख धार्मिक पर्यटन केंद्र के रूप में विकसित करना है। इसके लिए कई बड़ी आधारभूत संरचना परियोजनाओं पर कार्य करने की योजना तैयार की गई है।सरकार की प्रस्तावित योजनाओं में सुल्तानगंज में एयरपोर्ट का निर्माण, सुल्तानगंज से देवघर तक फोरलेन सड़क, अजगैबीनाथ मंदिर से अगुवानी घाट तक रोपवे, तथा गंगा तट पर आधुनिक यात्री सुविधाओं का विकास शामिल है। मुख्यमंत्री ने कहा कि इन परियोजनाओं के पूरा होने से श्रद्धालुओं की यात्रा अधिक सुरक्षित, सुगम और सुविधाजनक बनेगी।
स्थानीय अर्थव्यवस्था को मिलेगा बढ़ावा
मुख्यमंत्री ने कहा कि धार्मिक पर्यटन के विस्तार से केवल श्रद्धालुओं को ही लाभ नहीं मिलेगा, बल्कि स्थानीय व्यापार, होटल उद्योग, परिवहन, हस्तशिल्प और छोटे व्यवसायों को भी नई गति मिलेगी। इससे क्षेत्र में रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे और सुल्तानगंज की अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी।
उन्होंने अधिकारियों और स्थानीय नागरिकों से अपील करते हुए कहा कि सुल्तानगंज की धार्मिक पहचान को और मजबूत बनाने के लिए इसे “अजगैबीनाथ धाम” के नाम से व्यापक स्तर पर प्रचारित किया जाए, ताकि राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर इसकी अलग पहचान स्थापित हो सके।
तकनीक से जुड़ेगा श्रावणी मेला
श्रद्धालुओं की सुविधा को ध्यान में रखते हुए मुख्यमंत्री ने श्रावणी मेला ऐप और मेला पुस्तिका का भी लोकार्पण किया। इन डिजिटल सुविधाओं के माध्यम से श्रद्धालुओं को यात्रा मार्ग, चिकित्सा सेवाओं, सुरक्षा व्यवस्था, आवास, पार्किंग, यातायात और अन्य आवश्यक जानकारियां एक ही प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध कराई जाएंगी।
राज्य सरकार का मानना है कि आधुनिक तकनीक और बेहतर बुनियादी ढांचे के जरिए श्रावणी मेले का प्रबंधन अधिक प्रभावी बनाया जा सकेगा।
धार्मिक पर्यटन का नया केंद्र बनने की तैयारी
सरकार का दावा है कि प्रस्तावित परियोजनाओं के पूरा होने के बाद अजगैबीनाथ धाम केवल श्रावणी मेले तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि पूरे वर्ष धार्मिक पर्यटन, निवेश, रोजगार और सांस्कृतिक गतिविधियों का प्रमुख केंद्र बनकर उभरेगा। इससे बिहार की पर्यटन क्षमता को नई पहचान मिलेगी और राज्य की अर्थव्यवस्था को भी दीर्घकालिक लाभ होने की उम्मीद है।






