मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के मार्गदर्शन में संचालित मुख्यमंत्री बाल सेवा योजना (सामान्य) अनाथ और असहाय परिस्थितियों में जीवन यापन कर रहे बच्चों के लिए मजबूत सहारा बन रही है। योजना के माध्यम से सरकार न केवल बच्चों की आर्थिक जरूरतों को पूरा कर रही है, बल्कि उनकी शिक्षा जारी रखने और बेहतर भविष्य की नींव मजबूत करने का भी प्रयास कर रही है। योगी सरकार का उद्देश्य है कि आर्थिक अभाव के कारण किसी भी बच्चे की पढ़ाई बाधित न हो। इसी सोच के तहत योजना में बचपन से लेकर उच्च शिक्षा तक आर्थिक सहायता उपलब्ध कराने की व्यवस्था की गई है।
इस योजना की खास बात यह है कि इसका लाभ कक्षा 12 तक सीमित नहीं है। ऐसे छात्र-छात्राएं, जिन्होंने अपने माता-पिता दोनों या उनमें से किसी एक को खो दिया है और कक्षा 12 के बाद स्नातक अथवा डिप्लोमा पाठ्यक्रम में प्रवेश लिया है, उन्हें 18 से 23 वर्ष की आयु तक प्रतिमाह 2,500 रुपये की आर्थिक सहायता दी जाती है। यह सहायता 23 वर्ष की आयु पूरी होने या संबंधित पाठ्यक्रम समाप्त होने तक, जो पहले हो, जारी रहती है। इससे जरूरतमंद बच्चे आर्थिक दबाव से मुक्त होकर अपनी उच्च शिक्षा पर ध्यान केंद्रित कर सकते हैं।
मुख्यमंत्री बाल सेवा योजना (सामान्य) का लाभ वर्तमान में प्रदेश के 1,09,539 बच्चे प्राप्त कर रहे हैं। योजना के लगातार बढ़ते दायरे से स्पष्ट है कि सरकार जरूरतमंद बच्चों तक सामाजिक सुरक्षा योजनाओं का लाभ पहुंचाने के लिए गंभीरता और संवेदनशीलता के साथ काम कर रही है। नियमित आर्थिक सहायता से बच्चों के पालन-पोषण, शिक्षा, पोषण और दैनिक जरूरतों को पूरा करने में मदद मिल रही है। साथ ही, बच्चों की देखभाल कर रहे संरक्षक परिवारों पर पड़ने वाला आर्थिक बोझ भी कम हो रहा है।
मुख्यमंत्री बाल सेवा योजना केवल आर्थिक सहायता उपलब्ध कराने तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका उद्देश्य बच्चों को शिक्षा और आगे बढ़ने के अवसर उपलब्ध कराकर उन्हें आत्मनिर्भर बनाना भी है। सरकार की यह पहल उन बच्चों के लिए उम्मीद की किरण बन रही है, जिन्होंने कम उम्र में अपने माता-पिता का साया खो दिया है। योजना के माध्यम से प्रदेश के हजारों बच्चों को अपनी पढ़ाई जारी रखने का अवसर मिल रहा है और उनके सुरक्षित एवं बेहतर भविष्य की आधारशिला मजबूत हो रही है।






