नई दिल्ली। भारत की स्टार वेटलिफ्टर साइखोम मीराबाई चानू ने ग्लासगो Commonwealth Games 2026 में इतिहास रचते हुए महिलाओं के 48 किलोग्राम भार वर्ग में स्वर्ण पदक जीत लिया। इस जीत के साथ उन्होंने लगातार तीसरी बार राष्ट्रमंडल खेलों में गोल्ड मेडल जीतने का शानदार कारनामा किया।
इससे पहले मीराबाई ने 2018 गोल्ड कोस्ट और 2022 बर्मिंघम राष्ट्रमंडल खेलों में भी स्वर्ण पदक जीता था। वहीं, 2014 ग्लासगो में उन्होंने रजत पदक (सिल्वर मेडल) अपने नाम किया था। इस तरह उनके नाम अब राष्ट्रमंडल खेलों में तीन स्वर्ण और एक रजत पदक दर्ज हो चुके हैं, जिससे वह कॉमनवेल्थ गेम्स इतिहास की सबसे सफल महिला वेटलिफ्टरों में शामिल हो गई हैं।
लगातार तीसरे गोल्ड से बनाई ऐतिहासिक हैट्रिक
ग्लासगो 2026 में स्वर्ण पदक जीतकर मीराबाई चानू ने लगातार तीसरी बार राष्ट्रमंडल खेलों का खिताब अपने नाम किया। उनकी इस उपलब्धि ने उन्हें भारतीय वेटलिफ्टिंग की सबसे सफल खिलाड़ियों में और मजबूती से स्थापित कर दिया है।
ओलंपिक और विश्व चैंपियनशिप में भी दिखाया दम
मीराबाई चानू केवल राष्ट्रमंडल खेलों की स्टार नहीं हैं, बल्कि उन्होंने अंतरराष्ट्रीय मंच पर भी भारत का गौरव बढ़ाया है।
उनकी प्रमुख उपलब्धियां—
- टोक्यो ओलंपिक 2020 में रजत पदक।
- विश्व वेटलिफ्टिंग चैंपियनशिप में स्वर्ण पदक।
- लगातार तीन Commonwealth Games में स्वर्ण पदक।
- 2014 Commonwealth Games में रजत पदक।
टोक्यो ओलंपिक में जीता गया उनका सिल्वर मेडल कर्णम मल्लेश्वरी के बाद किसी भारतीय वेटलिफ्टर का दूसरा ओलंपिक पदक था। साथ ही वह पीवी सिंधु के बाद ओलंपिक में रजत पदक जीतने वाली दूसरी भारतीय महिला बनीं।
रियो ओलंपिक की निराशा से टोक्यो की सफलता तक
मीराबाई का करियर हमेशा आसान नहीं रहा।
रियो ओलंपिक 2016 में वह अपनी कोई भी क्लीन एंड जर्क लिफ्ट पूरी नहीं कर सकीं, जिससे उन्हें गहरा मानसिक आघात लगा। उस समय उन्होंने खेल छोड़ने तक का विचार कर लिया था।लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी। कठिन मेहनत, अनुशासन और आत्मविश्वास के दम पर उन्होंने वापसी की और टोक्यो ओलंपिक 2020 में रजत पदक जीतकर पूरी दुनिया को अपनी क्षमता का परिचय दिया।
संघर्ष से सफलता तक का प्रेरणादायक सफर
मणिपुर के इम्फाल के निकट नोंगपोक काकचिंग गांव में जन्मी मीराबाई चानू का बचपन बेहद साधारण परिस्थितियों में बीता।
छह भाई-बहनों में सबसे छोटी मीराबाई बचपन में जंगल से जलाने के लिए लकड़ियां लाती थीं। कहा जाता है कि वह इतनी कम उम्र में भी लकड़ियों का ऐसा भारी गट्ठर उठा लेती थीं जिसे उनका उनसे बड़ा भाई भी आसानी से नहीं उठा पाता था।
यहीं से उनकी शारीरिक क्षमता और ताकत की पहचान हुई, जिसने आगे चलकर उन्हें वेटलिफ्टिंग की दुनिया का सितारा बना दिया।
भारत के लिए प्रेरणा बनीं मीराबाई
मीराबाई चानू आज केवल एक खिलाड़ी नहीं, बल्कि करोड़ों युवाओं के लिए प्रेरणा हैं। उन्होंने साबित किया है कि सीमित संसाधन और कठिन परिस्थितियां भी बड़े सपनों को रोक नहीं सकतीं।
उनकी सफलता भारतीय खेल जगत में मेहनत, अनुशासन और समर्पण की मिसाल बन चुकी है।
मीराबाई चानू: एक नजर में
| विवरण | जानकारी |
|---|---|
| पूरा नाम | साइखोम मीराबाई चानू |
| खेल | वेटलिफ्टिंग |
| राज्य | मणिपुर |
| Commonwealth Games 2026 | स्वर्ण पदक (48 किग्रा वर्ग) |
| Commonwealth Games रिकॉर्ड | 3 स्वर्ण (2018, 2022, 2026), 1 रजत (2014) |
| ओलंपिक उपलब्धि | टोक्यो 2020 रजत पदक |
| विश्व चैंपियनशिप | स्वर्ण पदक विजेता |






