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बलूचिस्तान के ‘आजादी दिवस’ पर भारत का जिक्र क्यों? क्या सच में स्वतंत्र हो गया बलूचिस्तान?

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नई दिल्ली: पाकिस्तान के अशांत प्रांत बलूचिस्तान में 11 अगस्त को ‘स्वतंत्रता दिवस’ के तौर पर मनाए जाने के बाद एक बार फिर अलग बलूचिस्तान की मांग चर्चा में आ गई है। बलूचिस्तान की आजादी की मांग करने वाले नेताओं ने इस मौके पर अंतरराष्ट्रीय समुदाय से समर्थन की अपील की है। इसी बीच भारत का जिक्र भी इस पूरे घटनाक्रम में खास तौर पर सामने आया है।बलूच नेता मीर यार बलूच ने संयुक्त राष्ट्र सहित अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं और विभिन्न देशों से बलूचिस्तान को एक स्वतंत्र राष्ट्र के रूप में समर्थन देने की अपील की है। उन्होंने भारत में बलूचिस्तान से जुड़े मुद्दे को मिल रही चर्चा का स्वागत करते हुए भारत का आभार भी जताया है। हालांकि, इस पूरे मामले में एक महत्वपूर्ण तथ्य यह है कि भारत ने बलूचिस्तान को स्वतंत्र और संप्रभु देश के रूप में मान्यता नहीं दी है।

आखिर 11 अगस्त का क्या है महत्व?

बलूचिस्तान की आजादी के समर्थक 11 अगस्त को ‘स्वतंत्रता दिवस’ के रूप में मनाते हैं। अलगाववादी नेताओं का दावा है कि बलूचिस्तान की अपनी अलग ऐतिहासिक और राजनीतिक पहचान रही है और क्षेत्र के लोगों को आत्मनिर्णय का अधिकार मिलना चाहिए।हालांकि, पाकिस्तान इस दावे को स्वीकार नहीं करता। पाकिस्तान के आधिकारिक रुख के मुताबिक बलूचिस्तान उसके देश का अभिन्न हिस्सा है। वहां सक्रिय अलगाववादी और सशस्त्र संगठनों को पाकिस्तान अपनी राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए चुनौती मानता है।

भारत का नाम क्यों आया?

बलूच नेताओं की ओर से भारत का जिक्र किए जाने की एक बड़ी वजह नई दिल्ली की ओर से पाकिस्तान के कब्जे वाले जम्मू-कश्मीर और वहां मानवाधिकारों से जुड़े मुद्दों पर दिए जाने वाले बयान हैं। बलूच आंदोलन से जुड़े नेता इन बयानों को अपने मुद्दे के संदर्भ में पेश करते रहे हैं।मीर यार बलूच ने भी भारतीय मीडिया में बलूचिस्तान के मुद्दे को मिल रही जगह और भारत के कुछ आधिकारिक बयानों का स्वागत किया है। हालांकि, इसे भारत की ओर से बलूचिस्तान की स्वतंत्रता के समर्थन के तौर पर देखना सही नहीं होगा।

क्या भारत ने बलूचिस्तान को मान्यता दे दी है?

जवाब है—नहीं।

किसी क्षेत्र के नेता या संगठन अगर खुद को स्वतंत्र घोषित कर दें, तो इससे वह क्षेत्र अंतरराष्ट्रीय स्तर पर स्वतः एक स्वतंत्र देश नहीं बन जाता। किसी क्षेत्र की वास्तविक स्वतंत्रता और उसे अंतरराष्ट्रीय समुदाय से मिलने वाली औपचारिक मान्यता दो अलग-अलग विषय हैं।फिलहाल बलूचिस्तान पाकिस्तान का एक प्रांत है और उसे स्वतंत्र, संप्रभु राष्ट्र के रूप में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर व्यापक मान्यता प्राप्त नहीं है।

क्यों लंबे समय से चर्चा में है बलूचिस्तान?

बलूचिस्तान में लंबे समय से राजनीतिक अधिकारों, संसाधनों के बंटवारे, विकास, सुरक्षा और मानवाधिकारों को लेकर विवाद और असंतोष की खबरें सामने आती रही हैं। अलगाववादी समूह इन मुद्दों को आधार बनाकर स्वतंत्र बलूचिस्तान की मांग करते हैं।वहीं पाकिस्तान सरकार और सुरक्षा प्रतिष्ठान इन संगठनों को देश की सुरक्षा और संप्रभुता के लिए खतरा मानते हैं। क्षेत्र में समय-समय पर हिंसा और सुरक्षा अभियानों ने भी स्थिति को जटिल बनाया है।

अब आगे क्या?

11 अगस्त के ‘आजादी दिवस’ के बहाने बलूचिस्तान का मुद्दा एक बार फिर अंतरराष्ट्रीय मंच पर चर्चा में आया है। बलूच नेतृत्व अंतरराष्ट्रीय समर्थन हासिल करने की कोशिश कर रहा है, जबकि पाकिस्तान इस मांग को अपनी क्षेत्रीय अखंडता के खिलाफ मानता है।अब बड़ा सवाल यही है कि क्या बलूच आंदोलन को भविष्य में व्यापक अंतरराष्ट्रीय समर्थन मिल पाएगा या यह मांग पाकिस्तान के भीतर ही राजनीतिक और अलगाववादी संघर्ष तक सीमित रहेगी। फिलहाल इतना स्पष्ट है कि बलूचिस्तान के ‘स्वतंत्रता दिवस’ मनाए जाने का मतलब यह नहीं है कि बलूचिस्तान वास्तव में एक स्वतंत्र देश बन गया है।

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